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06 नवंबर 2012

मीरा रोड में महफिले ग़दीर

मीरा रोड में जनाब हुसैन आलम के दौलत कदे पर हर साल की तरह इम्साल भी 4 नवम्बर को महफिले मक़ासिदा का इह्तेमाम किया गया।
जिसमें 10/12 मौला के चाहने वालों ने अपना कलाम पढ़ा। 
पढ़ने और सुनने वालों की खिदमत में तहाइफ़ पेश किए गए और ज़म ज़म बिरयानी पर प्रोग्राम इख्तेताम पज़ीर हुआ।
नीचे दो कलाम का ऑडियो है। जनाब हसन ईलाहाबादी और मुनीर फैज़ाबादी की अपनी आवाज़ में।




17 नवंबर 2011

हुसैन आलम के मकान पर महफिले ग़दीर

husain aalam apna kalaam pesh karte hue
ईदे ग़दीर की मुनासेबत से मंगल को रात 9 बजे मीरा रोड, मुंबई  में हुसैन आलम के दौलत खाने पर महफिले मक़सिदा का इनेकाद कियागया. जिस मोमिनीन ने अच्छी तादाद में शिरकत की.

मीरा रोड के शाएरों के अलावा मेहमान शाएरों ने भी शिरकत की.
इर्ला से सादिक रिज़वी तशरीफ़ लाए थे. शमीम अब्बास ने भी अपने कलाम से नवाज़ा.
हसन करारवी ने सामईन से बहुत दाद बटोरी.
यह महफ़िल गुज़िश्ता तीन बरसों से ग़दीर के रोज़ हो रही है.
जिन लोगों ने अपना कलाम पेश किया उन्हें तहाऍफ़  से नवाज़ा गया.
हुसैन आलम साहब अक्सर अपने घर पर इस किस्म की तक्रीबात रखते हैं. अल्लाह उनकी तौफिक़ात में इजाफा करे.
ज़मज़म पुलाव बहुत शानदार रहा.

30 नवंबर 2010

जश्ने ग़दीर का स्टेज

जैनाबिया बॉम्बे में जश्ने ग़दीर का स्टेज. यह जश्न सनीचर 27 नवम्बर को हुआ था. अंग्रेज़ी में रिपोर्ट के लिए click करें.

25 नवंबर 2010

ग़दीर पर दबीर सीतापूरी का कसीदा

दबीर सीतापुरी का शुमार हिन्दुस्तान के मशहूर शाएरों में  होता है. मरहूम अपना कलाम तरन्नुम में पढ़ा करते थे और खूब पढ़ते थे. जब वोह कोई कसीदा पढ़ते थे तो  सुनने वाला भी झूम उठता था. इमामे ज़माना (अ.स.) के सिलसिले में उनकी नज़्म  "अधूरा इंतज़ार " ने खूब शोहरत पाई थी. आज ईदे ग़दीर के मौके पर उनकी आवाज़ में ही उनका कलाम जो उन्हों ने ग़दीर के 1400 साल मोकम्मल होने पर केसर बाग़ में पढ़ी थी, पेश कर रहे हैं. विडियो ना मिलने पर उनकी आवाज़ को तसावीर में ज़म किया है. अल्लाह मरहूम की आवाज़ पर रहमत नाजिल करे. इमकानात पूरे हैं की इस वक़्त वोह अपना कसीदा आलमे बरज़ख में मोमिनीन अर्वाह को सुना कर उन्हें मेह्जूज़ कर रहे हों. इस आलमे दुनिया में आप भी सुनें और मसरूर हों.