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30 अप्रैल 2018

मौलाना सिब्ते हसन साहब मरहूम, हिंदो-पाक के पहले ख़तीब




मौलाना सिब्ते हसन साहब मरहूम 
बर्रे सग़ीर के पहले ख़तीब,
मुहर्रम में 
मरसिया,
सोज़,
सलाम,
रौज़ा ख्वानी को 
खिताबत में तब्दील करनेवाले ज़ाकिर
जिन्हों ने मजलिसे अजा में 
खिताबत के फन को राएज किया 





10 अक्टूबर 2014

करारी के एक अच्छे सोज़ ख़ान


 
  जनाब नज़ीर हसन (मुन्नू) साहब  का शुमार करारी के अच्छे सोज़ खानो में होता है. आप फ़रोखाबाद  में मुलाज़मत करते हैं और अश्रय ऊला में वहीँ अज़ादारी के फराइज़ अंजाम देते हैं. 

12 जनवरी 2013

हिंदू ब्रदर्स की टीम ने नौहा पढ़ा

‘हम हिंदुओं ने पढ़ लिया कलमा हुसैन का, 

गाती है नाम गंगा और जमुना हुसैन का’।


मुहर्रम के 40वें दिन हुसैन की चालीसी मनाने बलदेव प्रसाद के नेतृत्व में पटना सिटी पहुंचे ‘हिंदू ब्रदर्स’ की टीम ने यह नौहा गाया। यह मौका सिया मुसलमान भाइयों की ओर से आयोजित ‘शाब-ए-दारी’ का था। 

पहले विद्वानों ने सभा को संबोधित किया। इसके बाद जुलूस निकला गया जिसमें बलदेव का साथ रामलाल शर्मा, राम लखन प्रसाद और विनोद कुमार ने दिया। अपने गीत में उन्होंने करबला में यजीदी व हुसैन के बीच हुए धर्म-युद्ध का बखान किया। उनलोगों ने यजीद को रावण और हुसैन को भगवान की संज्ञा दे डाली।

हुसैन की चालीसी पर सिया मुसलमानों के जुलूस में हिन्दू मातमी अंजुमन-ए-हुसैनी हिन्दू ब्रदर्स की टीम ने मातम मनाया। मुस्लिम महिलाओं ने भी मातम में हिस्सा लिया। जुलूस सैयद मुबारक अली साहब के इमामबाड़े से निकली और गलियों में घूम कर वापस इमामबाड़े पर समाप्त हुई।  

27 दिसंबर 2012

तू ने इस्लाम पे एहसान किया है जैनब

अम्बाही बाग़ की मातमी अंजुमन, अंजुमने अब्बसिया ने 6 मुहर्रम की शब् में छोटे तालाबपर में मजलिस के बाद नौहा पढ़ा था।

20 दिसंबर 2012

अबू मोहम्मद रिज़वी ने मरसिया पढ़ा

रौशन अली के इमामबाड़े में 5 मुहर्रम को जनाब अबू मोहम्मद रिज़वी ने पयाम आज़मी का मुसद्दस "जिहाद" पढ़ा। नीचे उसी का ऑडियो पेश है।
 

06 दिसंबर 2011

अली मंजिल में मजलिसे अजा


मुहर्रम की नौ तारीख को हर साल अली मंजिल में मग़रिब की नमाज़ के बाद मजलिस होती है. इस साल इस मजलिस का आगाज़ केसन की सोज़ खानी से हुआ. जावेद रिज़वी ने जोश मलीहाबादी का मर्सिया पढ़ा और मौलाना मुन्तजिर अब्बास रिज़वी ने खेताब फ़रमाया.
नौहा और मातम पर मजलिस तमाम हुई.

03 दिसंबर 2011

फाटक में शबीहे ताबूत

फाटक का  इमामबाडा बहुत क़दीम है. यहाँ पर हिन्दोस्तान के बड़े बड़े जाकेरीन ने खिताबत की है. इस साल मरहूम हिदायत हुसैन उर्फ़ हिद्दन के फरजंद की ज़िम्मेदारी है की वोह मजालिस को बरपा करें. वोह कर भी रहे हैं.
मौलाना जवाद हैदर साहब ज़ाकरी फरमा रहे हैं. आज रात फाटक से शबीहे ताबूत बरामद होंगे.
मौलाना जवाद हैदर साहब खिताब करते हुए.
     

30 नवंबर 2011

करारी की मज्लिसें

इस्लामी तारीख़ के हिसाब से 1433 का आज चौथा दिन है. करारी में अब शहर से लोग आना शुरू हो जायेंगे. ज़ाकेरीन की तादाद इस साल अच्छी है.
सुबह 10 बजे रोशन अली के इमामबाड़े (बरगद) में मौलाना मुन्तज़िर महदी का बयान होता है.
मग्रिबैन के बाद  फाटक की मजलिस मौलाना जवाद  हैदर (जूडी) पढ़ रहे हैं.
रात ही में चौधरी के इमाम बाड़े में मौलाना शमीम रज़ा साहब जाकरी कर रहे हैं और रात की आखरी मजलिस खरकापर में मौलाना ज़ोहैरकैन साहब की खिताबत होती है.
बकिया तफसील करारी पहुँच कर. 

08 जनवरी 2011

पानी पियो और इमाम हुसैन (अ.स.) की प्यास को याद करो

इमाम जाफर सादिक (अ.स.) ने कहा के ऐ दावूद ! इमाम हुसैन (अ.स.) के क़ातिलों पर लानत भेजो . कोई बंद ऐसा नहीं है जो पानी पीने के बाद इमाम हुसैन (अ.स.) को याद करे और उनके कातिलों पर लानत भेजे तो अल्लाह तआला उसके आमाल में एक लाख नेकियाँ दर्ज करता है, एक लाख गुनाह माफ़ करता है और उसका दर्जा एक लाख गुना बढ़ा देता है. क़यामत के रोज़ अल्लाह तआला उसके दिल को इत्मीनान ओ सुकून बख्शेगा.
(कामिलुज़ ज़ियारात, ३४ वाँ बाब, हदीस १, सफहा 346 )

26 दिसंबर 2010

वादिस सलाम में मजलिस

वदिस सलाम में ११ मुहर्रम को दोपहर तीन बजे मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी की क़ब्र पर मजलिसे अजा मुनकिद की गई जिसे मौलाना रज़ा हैदर ने खिताब किया .

15 दिसंबर 2010

छोटे तालाबपर में मजलिसो मातम

छेह मुहर्रम की शब्  में छोटे तालाब्पर में मजलिस हुई . उसके बाद अम्बाही की अंजुमन ने नौहओं मातम किया. रात 7.30 बजे यह प्रोग्राम जावेद रिज़वी के मर्सिये से शुरू हुआ. लहना  के आलिमे दीन मौलाना अली रेज़ा साहब ने खेताब फ़रमाया. लखनऊ में मुकीम सय्यद ऐनुर रज़ा सिर्फ इसी मजलिस में शिरकत करने आए थे. यह उनके हिस्से  की सालाना मजलिस होती  है जिसमें उनका हर भाई मौजूद रहने की कोशिश करता है.

छोटे तालाबपर का इमामबाड़ा 

10 दिसंबर 2010

इमाम हुसैन (अ.स.) पर गिरया.

रसूले इस्लाम (स.अ.) इमाम हुसैन (अ.स.) के बारे में फरमाते हैं :
अल्लाह उसे दोस्त रखता है जो हुसैन को दोस्त रखे.
हुसैन मुझ से है और मैं हुसैन से हूँ
यह हसन और हुसैन जन्नत के नौजवानों के सरदार हैं.

    04 दिसंबर 2010

    मीर अनीस के मर्सिये का बंद

    यह मर्सिये का बंद मीर अनीस का है. यह पत्थर करारी के छोटे तालाब पर के इमामबाड़े में नस्ब है.  

    29 नवंबर 2010

    अली मियाँ का अंगूठा ज़ख्मी

    मरहूम शरीफुल हसनैन के छोटे फरजंद, वजीहुल हसनैन जिनको लोग अली मियाँ के नाम से जानते हैं 25 नवम्बर को लोकल ट्रेन में लड़ाई कर रहे दो अजनबी आदमियों को छोडाते हुए उन  में से एक ने  ने उनके सीधे हाथ का अंगूठा चबा लिया. अली मियाँ को फ़ौरन अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें 1600 रूपये ईलाज में खर्च करना पड़े. मीरा रोड से रिजवी कॉलेज ड्यूटी    जा रहे थे. अब उन्हों ने कान पकड़ लिया है की दो लड़ते अजनबियों के बीच कभी ना बोलेंगे. इस साल करारी में  मुहर्रम की पहली तीन मजलिसें उनके हिस्से की हैं. My Karari उनके ग़म में बराबर का शरीक है.

    26 अक्टूबर 2010

    मरहूम मंज़ूर तकवी (कज्जन)

    मरहूम मंज़ूर तकवी (कज्जन), इस मुहर्रम में बहुत याद आएँगे. गुज़िश्ता साल वोह हर मजलिस में शरीक हुआ करते थे. अल्लाह उनका शुमार अहलेबैत  के चाहनेवालों में करे.
    मजलिस में गिरया करते हुए.

    16 जनवरी 2010

    Inna Lillahe wa Inna lillahe Raajeoon

    A sad news. Mother of Zahoor Mahdi famous as Guddu of Talabpar, has passed away today evening 7.05 pm in Mira Road, Mumbai. She was a heart patient. Recently, in Moharram his father known as Naggan saheb survived a brain hameorage in Karari, Allahabad. The burial will take place on Sunday after namaz of Zohrayn at Mira Road Qabrastan.
    For detail contact: Prof. Abbas Aalam 9821193390

    18 जनवरी 2009