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26 मार्च 2012

अब्बास रिज़वी का निकाह हो गया

कल रात बम्बई के रिज़वी स्प्रिंग फील्ड स्कूल हाल में मरहूम सय्यद मंज़ूर हसन रिज़वी के पोते और सय्यद सिब्ते हसन रिज़वी के तीसरे फरजंद अब्बास रिज़वी का निकाह हो गया. इस तकरीब में  रिज़वी खानदान के सभी लोग और अब्बास के दोस्त अह्ब्बाब मोजूद  थे.
दुल्हन के वकील मौलाना सय्यद ज़की नूरी साहब और अब्बास के वकील मौलाना ज़ुल्फ़िकार महदी साहब थे. यह सादी तकरीब नमाज़े मग्रबैन के बाद खाने पर ख़त्म हुई.
अल्लाह तआला इस जोड़े को नेक ज़िन्दगी गुज़ारने की तौफीक अता करे और उनकी नस्ल में नेक और अहलेबैत (अ.स.) की चाहने वालों की आमद हो.  

13 फ़रवरी 2011

करारी में जुलूसे अमारी: 2011

इलाहबाद दोआबा इलाके में, बल्कि अगर यह कहा जाए की पूरे उत्तर भारत में, या फिर पूरे हिन्दुस्तान में आठ रबीउल अव्वल को अमारी का जुलूस इस तरह नहीं बरामद होता जिस तरह करारी में होता है. जुलूस का नज़्म इतना आला है की दूर दराज़ से लोग इसकी ज़ियारत करने आते हैं.
शबीहे तबर्रुकात तो हर जगह मिल जाएंगी लेकिन शाम क़ैद खाना जैसी शबीह कहीं न मिलेगी. शबीह बरामद होते हुए तक़रीर हर जगह होगी लेकिन हामिद चचा के मुनफ़रिद अंदाज़ में कहीं सुनने न मिलेगा. मैदान में तक़रीर और नौहा पढने के लिए तख़्त मिल जाएंगे लेकिन यहाँ जैसा स्टेज  कहीं नज़र न आएगा.
इस जुलूस की कामयाबी का राज़ कारकुनान का  ख़ुलूस है. दिन रात मेहनत के बाद ही यह यादगार बनता है. Volunteer हजरात अपना बिल्ला फखरिया लगाए हुए अपने अपने कामों में  मसरूफ रहते हैं.
तश्हीर के लिए रंगीन और खुबसूरत हैंड बिल लोगों की तवज्जो अपनी तरफ खींचता हैं. जिस की वजह से अत्राफो अक्नाफ के साथ साथ बीरुनी मोमिनीन भी शिरकत करते हैं.
मौसम की शदीद ठंडक की वजह से जुलूस बरामद होने में ताखीर हो गई. पहली मजलिस के बाद जुमा की नमाज़ अदा की गई और फिर शबीहें बरामद हुईं. मेरठ से आए साहेबे बयाज़ ने बहुत अच्छा नौहा पढ़ कर माहौल को गरमा दिया. मीसम गोपालपुरी जो कई बरसों से मुसलसल शिरकत कर के नौहा पढ़ रहे थे इस साल किसी वजह से करारी नहीं पहुँच सके. खवातीन शबीहे ज़िन्दाने शाम की ज़ियारत मोकम्मल कर के अश्कबार आँखों से बाहर आतीं.
अब्बास रिज़वी के दिल्सोज़ नौहे ने अज़दारों को रुला दिया. ऐनुर रेज़ा (हुसैन) ने निजामत के फराएज़ अपने खुबसूरत अंदाज़ में अदा किए. इस तरह करारी वालों ने कर्बला से मदीना पहुंचे लुटे हुए काफले की याद मनाते हुए "कर्बला में सोनेवालो माहपारो  अलविदा " का नौहा पढ़कर पुर जोश मातम करते हुए अय्यामे अज़ा को अलविदा कहा. 

21 मार्च 2009

Juloos-e-Amaari, Nauha by Abbas Rizvi

The video clip is of the Nauha recited by a youth Janab Abbas Rizvi s/o of Janab Mukhtar Rizvi. Abbas Rizvi started reciting nauhas since last 3 years. He is one of the best solo nauha reciter in and around Allahabad. The best part of his nauha recitation is that he recites sorrowful nauhas which were penned down more than 40/50 years. He was inspired by Mr. Jaddan who was very famous in 60s & 70s in Allahabad district. The nauha he has recited in this clip is on the day of Juloos-e-Amaari on 5th March 2008 in Karari. It was very popular 3 decades ago. May Allah give taufeeq to Abbas Rizvi so that he gives his maximum service in the azadaari of Imam Husain (a.s.).

16 अप्रैल 2008

Dr. Ahmad Abbas Rizvi

Dr. Ahmad Abbas Rizvi of Soni had been admitted to Holy Family hospital in Bandra, Mumbai for the treatment of pneumonia. He has recovered from his illness. Dr. Abbas has performed Hajj and ziyaraat. He has written no. of books on Unani Medicines in Urdu languages.