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15 नवंबर 2012

मुहर्रम 1434: अय्यामे अज़ा का आगाज़


मुहर्रम का चाँद नमूदार हो चुका है। दुनिया भर के अज़ादार गमे हुसैन (अ,स) मनाने के लिए आमादा  हो चुके है। अज़ाखाने सज चुके हैं। फरशे अज़ा बिछ चुका है। सबीलें लग चुकी हैं। हर तरफ नौहा ख्वानी हो रही है।

करारी में भी चाँद देखा गया। आज पहली मुहर्रम की शब् है। अभी थोड़ी ही देर में अम्बाही बाग़, नया गंज में ज़ाहिद अली साहब के मकान पर मजलिस होने जा रही है और बाद मजलिस शबीहे अलमो ताबूत बरामद होंगे।

कल पहली मुहर्रम को नमाज़े ज़ोहरैन के बाद करबला के क़रीब, हीरा भाई के घर पर मजलिस होगी और उसके बाद शबीहे अलम , ताबूत और ज़ुलजनाह बरामद होँगे। यह जुलूस अभी चंद साल पहले से बरामद हो रहा है। 

04 जनवरी 2012

करारी करबला में परचमे अब्बास

जुलूसे अजा ख़त्म  होने पर करारी की करबला में परचम दारान अलमे मुबारक को दीवार से लगा कर जियारत करने गए.

05 दिसंबर 2011

करारी में आठ मुहर्रम के कुछ ख़ास प्रोग्राम

आठ मुहर्रम नमाज़े ज़ोहरैन के बाद रेहान भाई के घर से जुलूसे अजा बरामद होता है. यह खरकापर तक जाकर उनके दौलत खाने पर पलट कर आता है. शबीहे ज़ुल्जनाह भी जुलूस के साथ साथ रहता है.  मुख्तलिफ साहिबे बयाज़ नौहा खानी करते हैं. इन में करारी के मशहूर साहेबे बयाज़ जनाब हीरा साहब और जामिन अब्बास अपनी दर्द भरी आवाज़ में लोगों की आँखों में आंसू ले आते हैं.
उसके बाद शब् में रेहान भाई अपने दौलत कदे   पर नजर का इंतज़ाम भी करते हैं.
दिन में नमाज़े जोहर से क़ब्ल नाच घर पर शमीम हैदर उर्फ़ छोक्कन भाई के मकान पैर मजलिसे अजा बरपा हुई जिसमें मौलाना अख्तर रिज़वी ने खिताबत की. उसके बाद नौहाओ मातम हुआ. नमाज़ के बाद नजर का एहतेमाम भी था.
आठ मुहर्रम को ही करारी से करीब सरय्याँ गाँव में भी मजलिसओ जुलूस का सिलसिला था.

जुलूस खरकापर की तरफ  जाते  हुए 

04 दिसंबर 2011

सात मुहर्रम का जुलूस

कल 7 मुहर्रम थी. महल पर मोहल्ला से जुलूसे अजा तकरीबन 3 बजे दोपहर बरामद हुआ. शबीहे ज़ुल्जनाह हमराह था. कई अदद नौहे पढ़े गए.
यह जुलूस करबला में तमाम हुआ. इस जुलूसे के रूहे रवां जनाब गुलाम पंजतन काफी एहतेमाम करते हैं. ठीक मगरिब की नमाज़ के वक़्त जुलूस करबला पहुंचा और वहां से दोबारा महल पर पलटा.
बच्चे और नौजवानों  ने पुर जोर मातम किया.
करारी की कर्बला 

26 दिसंबर 2010

करारी की पहली मजलिस

मुहर्रम में करारी में मजालिस का आग़ाज़ सुबह सात बजे से हो जाता है. पहली मजलिस डिप्टी साहब के इमामबाड़े में होती है जिसे मौलाना ज़ोहैरकैन साहब खिताब फरमाते हैं. लेकिन उनसे पहले करारी के मशहूर सोज़ खान जनाब महमूदुल हसन आकर माईक पर पढना शुरू करते हैं. उनकी आवाज़ सुनकर अज़ादार अपने घरों से निकलना शुरू करते है. इस विडियो में माईक वाला आकर पहले माईक सेट कर रहा है. उसके बाद सोज़ शुरू होता है.

01 सितंबर 2010

ज़फर की नज़र से

21 रमजान की सुबह जैनाबिया इमामबाड़ा में मौला अली (अ.स.) के ताबूत बरामद होने  के बाद ज़फर (पापा) ने अपने तास्सुरात पेश किये .  ज़फर का ताल्लुक तलाब्पर करारी से है.

13 अप्रैल 2010

The Funeral of Salman

The funeral took place on Monday 12th April 2010 at Rehmatabad Graveyard, Bombay. He passed away the same morning at 11.00 AM in Bandra. He had been in the ICCU for 40 days. Later brought back to his home, but, never recovered fully. He is survived by his wife and 2 daughters, 2 sisters and a brother including his mother. He had been on Hajj in 2006 and later went for ziyarat to Syria, Iran and Iraq. He was an active member of Anjumane Azadaraane Husain (a.s.). Organised Juloos, Majalis and Mahafil. His father, Niyaz Banarsi, a poet, died just 18 months back. He had a large social contacts. Well known in Shia community. A surah Fateha is all we can gift him for the increase of his barzakhi status.

11 मार्च 2008

Juloos-e-Amaari in Karari

This is the 43rd Year of Juloos-e-Amaari in Karari, Distt. Koshambi (Allahabad). One of the best in the Indian Sub-continent. People come to attend from different districts and States of India. The uniqueness is its management and discipline. Volunteers from the age of 5 yrs upto the senior citizens are the part of the Team.

This year InshaAllah the Juloos will be held on Sunday 16th March 2008 from 7.00 AM onwards. Share with us your views on rizvi59@gmail.com or write your opinions in the comment pop-up.
Was Salaam
Razi Rizvi

PS: This is the Volunteer Badge for the current year.