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10 नवंबर 2012

आज इलाहबाद, क़ाज़ी जी की मस्जिद में मजलिसे तरहीम


शेरू और शीलू ब्रद्रान ने आज अपनी वालेदा मरहूमा हुसैन फातेमा के ईसाले सवाब के लिए मस्जिदे क़ाज़ी में नमाज़े मग्रेबैन के बाद मजलिस का एहतेमाम किया है।

आप लोगों से शिरकत की दरख्वास्त है। मोमेनीन से एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है। 

22 मार्च 2012

मस्जिदे क़ाज़ी में मजलिसे तरहीम

मरहूमा हुसैन फातेमा (हुसैना) बिन्ते मरहूम नफीसुल हसन के ईसाले सवाब के लिए मस्जिदे क़ाज़ी (इलाहाबाद) में आज नमाज़े मग्रेबैन के बाद मजलिसे तरहीम का इनेकाद किया गया है जिनका इन्तेकाल 25 ज़िलहज (21 मार्च 2001 ) को हुआ था.
मरहूमा ने 1997 में अपने वालिद, मरहूम नफीसुल हसन (जिन्हें हम लोग भुग्गी कह कर मुखातिब करते थे) के हमराह हज के फराएज अंजाम दिए थे. हमें याद है कि  उस साल हमारा पहला हज था और हमारी मुलाक़ात मरहूमा से सफा की पहाड़ी पर सई करते हुए हुई थी. हमारी वालेदाह भी साथ थीं.
मरहुमीन मुस्लिम टूर के काफिले के साथ आए थे जो मरहूम मौलाना ज़फर अब्बास की जेरे निगरानी में था.
अल्लाह तआला इन मरहुमीन के दरजात में बुलंदी अता करे. यह लोग बहुत नेक इंसान थे.
आप लोगों से सुरह फातेहा की गुज़ारिश है. 

29 जनवरी 2012

मरहूम ज़फर अब्बास आबिदी का चेहलुम

मरहूम सय्यद ज़फर अब्बास आबिदी 
आज इलाहाबाद में  अनवारुल  ओलूम  के  सामने  वाले  मैदान में मरहूम ज़फर अब्बास साहब के चेहलुम के  मौके पर सुबह दस बजे मजलिसे तरहीम का इनेकाद किया गया है. 
इलाहबाद का कोई ऐसा मर्द, औरत या बच्चा नहीं है जो मरहूम ज़फर अब्बास को न जानता रहा हो.
एक मुखलिस मुबललिग़. एक जाज़िब खतीब. नेक, भरोसेमंद, बा अमल जाकिर. मुख्तार नामाह पढने का फनकार, मिम्बर की जीनत. और सब से बड़ी सिफत; एक निहायत ही लोगों के काम आने वाला सादा इंसान. जब तक सेहत साथ दे रही थी, करारी से जुड़े हुए थे. 
हज का बेहतरीन रहबर. एक अरसा मुस्लिम टूर्स  के साथ होकर शिया हाजिओं को सहीह हज करवाते रहे. बाद में जब कंपनी कमज़ोर हो गई तो शिया प्राइवेट टूर में रहबरी की.
हिंदुस्तान और पाकिस्तान के हाजी ज़फर अब्बास के नाम से मानूस थे. हज के काफिले में खुसूसन खवातीन के  पूरी तरह मुआविन रहते. मक्का में होटल के कमरे के दरवाज़ों पर नाम बनाम हाज्जा को  पुकारते और हरम जाने के लिए आमादा करते.
जब भी मरहूम से मक्का या मदीना में हज के मौके पर हमसे मुलाक़ात होती तो हमारे वालिद को याद करते और लोगों से यह  कहते की "रज़ी मियां के वालिद (मरहूम गुलाम हसनैन करारवी) ने ही मुझे मुस्लिम टूर्स के साथ जाने पर जोर दिया ता की मोमिनीन हज के सही अरकान अदा कर सकें."
बहुत मोहब्बती, खादिमे कौम और मुन्कसिर मिज़ाज (आज के दौर में खादिमे कौम का मुन्कसिर मिज़ाज होना नायाब है, वोह खादिम कम और मखदूम जियादा होते हैं).
मरहूम हमेशा शेरवानी  में मलबूस होते. मुझे तो याद ही नहीं पड़ता के मैंने कभी  उन्हें बगैर शेरवानी के देखा हो. 
परवर दिगार मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे. मुमकिन है की जौनपुर की यह शख्सियत मैदाने महशर में इलाहबाद के मोमिनीन की शफाअत की सिफारिश करे.
आप से गुज़ारिश है की इस अज़ीम इंसान को सुरह फातेहा से ज़रूर याद करें.
  

28 जनवरी 2012

काजी जी की मस्जिद में चेहलुम की मजलिस

क़ाज़ी जी की मस्जिद, बख्शी बाज़ार, इलाहबाद 
आज इलाहबाद की  बख्शी बाज़ार में क़ाज़ी जी की मस्जिद में मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी के चेहलुम की मजलिस हुई जिसे  मौलाना एहसान हैदर जवादी ने ख़िताब फ़रमाया. मस्जिद मरहूम के चाहने वालों से छलक रही  थी जो हिंदुस्तान के मुख्तलिफ शहरों से तशरीफ़ लाए थे.
मजलिस से पहले सोज़ खानी और पेश्खानी हुई. शाएरों ने अपना मंजूम नजराना पेश किया.
मरहूम के फर्ज़न्दान राजू, अनवार और राशिद के लिए ये बहुत दुःख  भरा  दिन  था . राशिद अबू  धाबी  से चेहलुम के लिए आए  थे. अल्लाह  इनको  सबरे  जमील  अता  करे .
मरहूम के छोटे  भाई  जनाब  मुख़्तार  साहब  पर अपने भाई  के बिछड़  जाने  से बहुत ज्यादा  असर  रहा , उन्होंने इलाज  में कोई  कसर  नहीं  छोड़ी  थी.
परवरदिगार मरहूम को जवारे मासूमीन में जगह दे.

18 मार्च 2011

रज़ा रिज़वी (शीलू) की वालेदा की बरसी की मजलिस

मरहूमा  सय्यदा हुसैन फ़ातेमा बिन्ते मरहूम सय्यद नफीसुल हसन (भुग्गी बाबा) की बरसी की मजलिस कल  इलाहाबाद में काजी जी की मस्जिद में नमाज़े मग्रबैन की नमाज़ के बाद हुई. मरहूमा के दो फरजंद हैं. शीलू (रज़ा रिज़वी ) और जिया रिज़वी (शेरू). मरहूमा के ईसाले सवाब के लिए एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.

23 जुलाई 2008

Chhamahi (Six month) of marhum Sagheer Ahmad

On the completion of 6 months of passing away of marhum Sagheer Ahmad (Attan) son of Azhar Hasan marhum, a majlis has been organised to elevate his status in the next world.
Programme:
Date: Saturday, 16th August 2008 at 9.00 in the morning
Venue: Masjid-e-Qazi, Buxi Bazar, Allahabad.

Tel.: 0532-2642786, mobile: 9936883443, 09876095129, 09415513779