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21 अप्रैल 2021
23 मई 2020
क्या अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) राफ़िज़ा हैं?
अबूल जारूद का बयान हैः
‘‘अल्लाह उस शख़्स के कानों को बेहरा कर दे जिस तरह उसने उसकी आँखों को अंधा किया उगर उस ने हज़रत अबू जाफ़र (इमाम मुहम्मद बाक़िर - अलैहिसस्लाम) को यह कहते हुए नहीं सुना जब किसी ने उन से यह कहा किः ‘‘फलाँ शख़्स हमें एक नाम से पुकारता है।’’
इमाम (अलैहिस्सलाम) ने पूछाः ‘‘वह नाम क्या है?’’
उस शख़्स ने जवाब दियाः ‘‘वह हमें राफ़िज़ा (ठुकराने वाले) पुकारता है।’’
तब इमाम बाक़िर (अलैहिस्सलाम) ने अपने सीने पर हाथ रखते हुए फ़रमायाः ‘‘मैं राफ़िज़ा में से हूँ और वह (राफ़िज़ी) हम में से है।’’
यह बात इमाम (अलैहिस्सलाम) ने तीन मर्तबा दोहराई।
📖 हवाले
• अल-महासिन अज़ अहमद अल-बरकी, पृ. १५७, ह. ९१
• बिहारुल अनवार, जि. ६५, पृ. ९७, ह. २
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15 मई 2020
09 मई 2020
सुलहे इमाम हसन के चौदह सौ साल
इमाम हसन अ.स. की ऐतिहासिक सुलह ने इस्लाम की हिफ़ाज़त की ख़ातिर जो अहम भूमिका निभाई है उसे देख हर अक़्लमंद और मंझा हुआ सियासी इंसान भी आज तक दांतों के नीचे उंगली दबाए हुए है, हालांकि हंगामों की आदी दुनिया ने इस ख़ामोश लेकिन ऐतिहासिक कारनामे को उसका वह हक़ बिल्कुल नहीं दिया जो उसे मिलना चाहिए था, और इमाम हसन अ.स. का यह अज़ीम कारनामा भी आपकी अज़ीम शख़्सियत की तरह मज़लूमियत की भेंट चढ़ गया।
यह पूरे का पूरा फ़ज़ीलत का गुलिस्तान हम इसका ज़िक्र तो क्या उसके बारे में तसव्वुर भी नहीं कर सकते।
जिनमें से इस आर्टिकल में सुलह और बहादुरी की अज़ीम मिसाल इमाम हसन अ.स. का ज़िक्र करना मक़सद है, जो बहुत सारी सिफ़ात और कमालात में अकेले होने के साथ साथ अपनी अनोखी ख़िदमात को लेकर भी बे मिसाल हैं, जिनमें इबादत, इल्म, बहादुरी, सख़ावत, अदब, अख़लाक़ और भी बहुत सारी सिफ़ात शामिल हैं।
संक्षेप में इतना समझ लीजिए कि अकेले आपकी शख़्सियत में वह सारी अच्छाईयां जमा थीं जो सारे नेक लोगों में थीं।
और आपके कारनामे में सबसे अनोखा और ज़्यादा जिसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा वह आपका सुलह करना है।
पैग़म्बर स.अ. के दोनों शहज़ादों इमाम हसन अ.स. और इमाम हुसैन अ.स. ने इस्लाम की कश्ती को निजात दिलाने के लिए दो अलग अलग बेहतरीन और नुमायां काम अंजाम दिए हैं जिनके बिना असली इस्लाम तो बहुत दूर शायद उसके नाम भी बाक़ी रहना ना मुमकिन नहीं होता। Read Full
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07 मई 2020
06 मई 2020
26 अप्रैल 2020
अबू लहेब का हश्र
रवायात में आया है के बद्र की जंग में क़ुरैश के मुश्रिकीन को बुरी हार के हुई।
अबू लहब इस जंग में शरीक नहीं था।
जंग में हारे अबू सुफियान से रिपोर्ट मांगी।
अबू सुफियान ने क़ुरैश की हार बयान की और कहा के इस जंग में आसमान और ज़मीन के दरमियान ऐसे सवार देखे जो मोहम्मद की मदद के लिए आये थे।
इस मौक़े पर अब्बास के एक ग़ुलाम "अबू राफ़े" ने कहा; मैं वहां बैठा हुआ था उसने अपने हाथ उठाते हुए कहा: वह आसमानी फ़रिश्ते थे।
इस पर अबू लहब भड़क उठा और उसने एक ज़ोरदार थप्पड़ मारा और ज़मीन पर पटक दिया और अपनी भड़ास निकालने के लिए अबू राफे को पीटे जा रहा था।
वहाँ अब्बास की बीवी "उम्मुल फ़ज़्ल" भी मौजूद थी। उसने एक छड़ी उठाई और अबू लहब के सर पर दे मारी और कहा : क्या तूने इस कमज़ोर आदमी को अकेला समझा है?
अबू लहब का सर फट गया और उस से खून बहने लगा।
सात दिन के बाद अस के बदन में बदबू पैदा हो गई , उसके मुंह पर ताऊन के दाने निकल आये और वह उसी बीमारी से वासिले जहन्नम हो गया।
उसके बदन से इतनी बदबू आ रही थी के लोग उसके नज़दीक जाने की जुरअत नहीं करते थे।
उसे मक्का से बाहर ले जाया गया और दूर से उस पर पानी डाला और उस के बाद उसपर पथ्थर फेंके , यहाँ तक के उस का नजिस बदन पथ्थर और मिटटी के नीचे छुप गया।
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13 मार्च 2017
23 फ़रवरी 2017
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19 फ़रवरी 2017
26 जुलाई 2016
26 फ़रवरी 2016
करारी के सितारे
छीँक आने पर पढ़ना
06 नवंबर 2015
30 जुलाई 2015
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