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27 जून 2023

मरहूम याकूब हसन रिज़वी के सब से बड़े दामाद का इन्तेकाल

 



मरहूम याकूब हसन रिज़वी के सब से बड़े दामाद 
सय्यद क़मर रज़ा इब्ने सय्यद आबिद रज़ा 
 का आज शाम ४ बजे 
इलाहाबाद में इन्तेकाल हो गया है . 
एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है. 

24 दिसंबर 2022

मरहूम वज़ीर हैदर रिज़वी (Kobe Sizzlers) की तद्फीन आज

 कुछ अरसे से बीमार चल रहे सय्यद वज़ीर हैदर कल 28 जमादिल अव्वल को मीरा रोड में इन्तेकाल कर  गए.

मरहूम दीनदार थे और हज्जो ज्यारात का फ़रीज़ा अदा कर चुके थे. हज् में  रोज़े अरफा की दुआ, उर्दू तर्जुमा के साथ आपने ही छपवाया था. आप एक नफासत पसंद शख्सियत थीं. अपने रिश्तेदारों का ख़याल  करते थे. अपने  वतन अंडहरा से बेलौस मोहब्बत थी. पाबन्दी से हर साल मुहर्रम वहीँ  गुजारते. 

आज बोम्बे के कब्रस्तान रह्मताबाद में सिपुर्दे ख़ाक कर दिए गए. अल्लाह  मरहूम की मग्फेरत करे. 

17 अक्टूबर 2013

एजाज़ की वालेदा की रेहलत के 6 माह

एजाज़ (रिज़वी कॉलेज, मुंबई)  की वालेदा की रेहलत के 6 माह मुकम्मल होने पर 27 अक्तूबर को इलाहाबाद में मजलिसे तर्हीम।

26 मई 2013

एजाज़ हैदर को सदमा

 इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन 
तकरीबन 2 घंटे पहले रिज़वी कॉलेज के एजाज़ हैदर की वाल्वेदा का इलाहबाद में इन्तेक़ाल हो गया। 
तद्फीन कल होगी।
एजाज़ से 09890151852  पर राबता किया जा सकता है. वो मीरा रोड, मुंबई में हैं। 

07 फ़रवरी 2013

आज असगर हुसैन चल बसे

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन  
करबल्या के असगर हुसैन साहब का अभी अज़ाने मगरिब के वक़्त करारी के बड़ऊँपर में इन्तेकाल हो गया वोह फैज़ी के वालिद थे। कल जोहरैन की नमाज़ के बाद करारी कर्बला में तद्फीन होगी। 
आप हज़रात मरहूम असग़र हुसैन इब्ने एजाज़ हुसैन को एक सुरह फातेहा से याद करें।

10 नवंबर 2012

आज इलाहबाद, क़ाज़ी जी की मस्जिद में मजलिसे तरहीम


शेरू और शीलू ब्रद्रान ने आज अपनी वालेदा मरहूमा हुसैन फातेमा के ईसाले सवाब के लिए मस्जिदे क़ाज़ी में नमाज़े मग्रेबैन के बाद मजलिस का एहतेमाम किया है।

आप लोगों से शिरकत की दरख्वास्त है। मोमेनीन से एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है। 

30 जून 2012

मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी की मजलिसे तरहीम


मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी के इन्तेक़ाल के छे महीने मोकम्मल होने पर मजलिसे अजा का एहतिमाम किया गया है। 
इलाहाबाद के मोमिनीन से शिरकत की दरख्वास्त है।


तारीख :     1 July, इतवार , रात 8.30 बजे।
मक़ाम:      A-52, अब्बास हाउस, करेली, इलाहबाद.
ज़ाकिर :    मौलाना क़मर सुलतान साहब (Noida) 


आप से मरहूम के लिए सुरह फातेहा की गुज़ारिश है। 



07 अप्रैल 2012

29 जनवरी 2012

मरहूम ज़फर अब्बास आबिदी का चेहलुम

मरहूम सय्यद ज़फर अब्बास आबिदी 
आज इलाहाबाद में  अनवारुल  ओलूम  के  सामने  वाले  मैदान में मरहूम ज़फर अब्बास साहब के चेहलुम के  मौके पर सुबह दस बजे मजलिसे तरहीम का इनेकाद किया गया है. 
इलाहबाद का कोई ऐसा मर्द, औरत या बच्चा नहीं है जो मरहूम ज़फर अब्बास को न जानता रहा हो.
एक मुखलिस मुबललिग़. एक जाज़िब खतीब. नेक, भरोसेमंद, बा अमल जाकिर. मुख्तार नामाह पढने का फनकार, मिम्बर की जीनत. और सब से बड़ी सिफत; एक निहायत ही लोगों के काम आने वाला सादा इंसान. जब तक सेहत साथ दे रही थी, करारी से जुड़े हुए थे. 
हज का बेहतरीन रहबर. एक अरसा मुस्लिम टूर्स  के साथ होकर शिया हाजिओं को सहीह हज करवाते रहे. बाद में जब कंपनी कमज़ोर हो गई तो शिया प्राइवेट टूर में रहबरी की.
हिंदुस्तान और पाकिस्तान के हाजी ज़फर अब्बास के नाम से मानूस थे. हज के काफिले में खुसूसन खवातीन के  पूरी तरह मुआविन रहते. मक्का में होटल के कमरे के दरवाज़ों पर नाम बनाम हाज्जा को  पुकारते और हरम जाने के लिए आमादा करते.
जब भी मरहूम से मक्का या मदीना में हज के मौके पर हमसे मुलाक़ात होती तो हमारे वालिद को याद करते और लोगों से यह  कहते की "रज़ी मियां के वालिद (मरहूम गुलाम हसनैन करारवी) ने ही मुझे मुस्लिम टूर्स के साथ जाने पर जोर दिया ता की मोमिनीन हज के सही अरकान अदा कर सकें."
बहुत मोहब्बती, खादिमे कौम और मुन्कसिर मिज़ाज (आज के दौर में खादिमे कौम का मुन्कसिर मिज़ाज होना नायाब है, वोह खादिम कम और मखदूम जियादा होते हैं).
मरहूम हमेशा शेरवानी  में मलबूस होते. मुझे तो याद ही नहीं पड़ता के मैंने कभी  उन्हें बगैर शेरवानी के देखा हो. 
परवर दिगार मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे. मुमकिन है की जौनपुर की यह शख्सियत मैदाने महशर में इलाहबाद के मोमिनीन की शफाअत की सिफारिश करे.
आप से गुज़ारिश है की इस अज़ीम इंसान को सुरह फातेहा से ज़रूर याद करें.
  

30 दिसंबर 2011

सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी साहब का इन्तेकाल



आज सुबह 3 बजे जनाब सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी साहब का इलाहाबाद में इन्तेकाल हो गया. तद्फीन की तफसील का इंतज़ार है. उनके छोटे भाई मुख्तार रिज़वी से 08127653123  पर राबता किया जा सकता है.

29 दिसंबर 2011

दुआ की Urgent दरखास्त

हामिद चचा की तबियत कुछ ज्यादा सिरिअस होगई है.
आप लोग उनकी सेहत के लिए " अम्मैं योजीबुल मुज्तर्रा इजा दआ हो व यक्षेफुस सू " पढ़ें.
वह इलाहबाद में ICU में दाखिल हैं और घर के तमाम अफराद उनके पास मोजूद हैं.

21 नवंबर 2011

मरहूम पंजतन की तद्फीन आज दो बजे दिन में

 मरहूम पंजतन की तद्फीन आज दोपहर दो बजे करारी कर्बला में होगी.
एक तूलानी बीमारी के बाद कल घर पर इन्तेकाल हो गया था.
आप से नमाज़े मग़रिब के बाद मरहूम के लिए नमाज़े वहशत की दरख्वास्त है.
मरहूम पंजतन इब्ने काजिम हुसैन.

15 नवंबर 2011

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

करारी के करीब, अतरसुय्या के रहने वाले हाजी सादिक अब्बास का आज सुबह इन्तेकाल हो गया. मरहूम तकरीबन 80 बरस के थे.
कल इंशाअल्लाह उनके आबाई गाँव अतर सुय्या में तद्फीन होगी.
मरहूम के दो फरजंद, हैदर अब्बास (हद्दू) और मोहम्मद अब्बास हैं.
एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है.

11 जून 2011

मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी

कल 9 रजब को हमारे दादा मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी है. मरहूम का इन्तेकाल 1985 में तकरीबन 95 साल की उम्र में करारी में हुआ था. मरहूम इलाहाबाद और करारी परगना के अतराफ में अपने दौर के जाने माने मर्सिया खाँ थे. अक्रबा परवरी की एक मिसाल से. 
कर्बला की जियारत का भी शरफ हासिल किया था. उनके दौर में इमाम हुसैन (अ.स.) की जियारत के लिए जाना नहीं था, पानी के जहाज़ से बसरा (इराक) सफ़र किया जाता था और वहां से रेल से कर्बला जाना पड़ता था. 
अल्लाह तआला मरहूम का शुमार अहलेबैत (अ.स.) के चाहने वालों में करे. एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.
मरहूम अमीर अली की 26 वीं बरसी पर बम्बई में उनकी तीसरी, चौथी और पांचवीं नस्ल फातेहा देते हुए.

26 मार्च 2011

बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम

 यह तस्वीरें करारी में बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम की हैं. गुज़िश्ता मुहर्रम (1432 ) 2010 में इस कब्रस्तान में 12 मुहर्रम को मौलाना रज़ा हैदर साहब ने मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के कब्र के सरहाने मजलिस पढ़ी थी .

18 मार्च 2011

रज़ा रिज़वी (शीलू) की वालेदा की बरसी की मजलिस

मरहूमा  सय्यदा हुसैन फ़ातेमा बिन्ते मरहूम सय्यद नफीसुल हसन (भुग्गी बाबा) की बरसी की मजलिस कल  इलाहाबाद में काजी जी की मस्जिद में नमाज़े मग्रबैन की नमाज़ के बाद हुई. मरहूमा के दो फरजंद हैं. शीलू (रज़ा रिज़वी ) और जिया रिज़वी (शेरू). मरहूमा के ईसाले सवाब के लिए एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.