31 जुलाई 2012
लखते हसनैन के घर कूंडा
23 जुलाई 2012
21 जुलाई 2012
20 जुलाई 2012
इमाम महदी (अ.स.) की शान में सादिक़ रिज़वी का क़सीदा
मुंबई में मुक़ीम, करारी के शाएर सादिक रिज़वी साहब ने अपना कलाम शाबान के मौक़े पर My Karari के लिए खुसूसी तौर पर रिकॉर्ड करवाया
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18 जुलाई 2012
17 जुलाई 2012
16 जुलाई 2012
मीरा रोड, मुंबई में खतीब के घर महफ़िल
करारी,इलाहबाद के नवजवान शाएर जावेद रिज़वी के छोटे भाई ख़तीब साहब के मकान पर रात महफिले मुक़सिदा का इनेकाद हुआ था। यह महफ़िल इमामे ज़माना (अ.स.) की शान में हर साल शाबान के आखरी इतवार को होती है।
महफ़िल में इलाहबाद से आए हुए कई अफराद मौजूद थे। ओलमा हज़रात में मौलाना क़मर महदी, मौलाना एहसान हैदर जवादी, मौलाना जवाद हैदर जवादी और मौलाना हसनैन करारवी तशरीफ़ फरमा थे। रिज़वान हैदर जवादी ने हर अच्छे शेर पर खुल कर दाद दी।
इलाहबाद से मुख़्तार रिज़वी और जावेद रिज़वी ने महफ़िल में शिरकत की। अब्बास आलम साहब ने नेज़ामत के फ़राएज़ जावेद रिज़वी को सौँप दिया.
बहुत अच्छे अच्छे कलाम पढ़े गए। रोशन करारवी , मुख़्तार रिज़वी ने वाह वाही लूटी। हुसैन आलम ने छोटी बहेर में बेहतरीन कसीदा कहा।
फहीम इलाहाबादी के शानदार और मुख़्तसर कलाम पर महफ़िल का इख्तेताम हुआ।
1BHK के फ्लैट में "10ftx15ft" के हॉल में यह एक बड़ी महफ़िल थी। बॉम्बे में अपने घर पर मजलिस और महफ़िल करना एक बड़ी बात है।
महफ़िल में इलाहबाद से आए हुए कई अफराद मौजूद थे। ओलमा हज़रात में मौलाना क़मर महदी, मौलाना एहसान हैदर जवादी, मौलाना जवाद हैदर जवादी और मौलाना हसनैन करारवी तशरीफ़ फरमा थे। रिज़वान हैदर जवादी ने हर अच्छे शेर पर खुल कर दाद दी।
इलाहबाद से मुख़्तार रिज़वी और जावेद रिज़वी ने महफ़िल में शिरकत की। अब्बास आलम साहब ने नेज़ामत के फ़राएज़ जावेद रिज़वी को सौँप दिया.
बहुत अच्छे अच्छे कलाम पढ़े गए। रोशन करारवी , मुख़्तार रिज़वी ने वाह वाही लूटी। हुसैन आलम ने छोटी बहेर में बेहतरीन कसीदा कहा।
फहीम इलाहाबादी के शानदार और मुख़्तसर कलाम पर महफ़िल का इख्तेताम हुआ।
1BHK के फ्लैट में "10ftx15ft" के हॉल में यह एक बड़ी महफ़िल थी। बॉम्बे में अपने घर पर मजलिस और महफ़िल करना एक बड़ी बात है।
| हैदर अब्बास साहब अपना कलाम पढ़ते हुए |
15 जुलाई 2012
ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर का निकाह
मुम्बरा में मुक़ीम करारी के जनाब ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर अज़ीज़ फातेमा सल्लमहा का निकाह मौलाना मोहसिन हसन इब्ने ज़फरुल हसन (बनारस) के हमराह 27 जून को क़ाज़ीजी की मसजिद, बख्शी बाज़ार, इलाहबाद में नमाज़े मग़रेबैन के बाद हुआ।
इस तकरीब में करारी से तमाम रिश्तेदार मोजूद थे। बारात का इस्तेकबाल करेली के दुल्हन पैलेस में किया गया.
भाई ओन मोहम्मद रिज़वी साहब को उनके 09821719933 नंबर पर मुबारकबाद दे सकते हैं।
इस तकरीब में करारी से तमाम रिश्तेदार मोजूद थे। बारात का इस्तेकबाल करेली के दुल्हन पैलेस में किया गया.
भाई ओन मोहम्मद रिज़वी साहब को उनके 09821719933 नंबर पर मुबारकबाद दे सकते हैं।
13 जुलाई 2012
12 जुलाई 2012
06 जुलाई 2012
क़ब्रस्तान बेहिश्ते ज़हरा, मीरा रोड
मरहूम शाहिद हुसैन नक़वी की तद्फीन अभी नमाज़े जुमा के बाद मीरा रोड के कब्रस्तान होने वाली है। इसका नाम मोमिनीन ने बेहिश्ते ज़हरा रख्खा है
इसी क़ब्रस्तान की तारीख़ मरहूम ने April 2010 में रिकॉर्ड की थी। आप की खिदमत में पेश है।
इसी क़ब्रस्तान की तारीख़ मरहूम ने April 2010 में रिकॉर्ड की थी। आप की खिदमत में पेश है।
05 जुलाई 2012
04 जुलाई 2012
जनाब शाहिद हुसैन नकवी ICU में दाखिल
02 जुलाई 2012
इन्तेजारे अदलो अम्न
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30 जून 2012
मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी की मजलिसे तरहीम
मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी के इन्तेक़ाल के छे महीने मोकम्मल होने पर मजलिसे अजा का एहतिमाम किया गया है।
इलाहाबाद के मोमिनीन से शिरकत की दरख्वास्त है।
तारीख : 1 July, इतवार , रात 8.30 बजे।
मक़ाम: A-52, अब्बास हाउस, करेली, इलाहबाद.
ज़ाकिर : मौलाना क़मर सुलतान साहब (Noida)
आप से मरहूम के लिए सुरह फातेहा की गुज़ारिश है।
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29 जून 2012
कूंडा की याद
कूंडा खाए आज चौदा दिन हो गए हैं लेकिन याद अब भी सता रही है. अब एक मौक़ा और है।
शबे बरात। लेकिन उस रात तो हलवा बनता है। चने का हलवा और रवा का, खीर तो साल में एक बार ही मज़ा देती है चाहे आप साल भर बनाते रहें। कूंडे की खीर का ज़ाइका ही कुछ और है। माहे रजब में ताकीबात और कूंडे वाह ... इबादत की लज्ज़त और खीर की लज्ज़त।
25 जून 2012
माही दर आब (पानी में मच्छली)
सय्यद अली काज़ी तबातबाई (र.अ.) ने वसीय्यत में लिखा है की "मोमिन को मस्जिद में नमाज़ अदा करनी चाहिए, मिसाल देते हुए फरमाते हैं, की मोमिन की हैसियत मस्जिद में उसी तरह होना चाहिए जैसे मच्छली का पानी में रहना. "
आप फरमाते हैं की नमाज़ को बाज़ारी न बनाओ उसे अव्वले वक़्त अदा करो। अगर तुम ने नमाज़ की हिफाज़त की तो तमाम चीज़ें महफूज़ हो जाएँगी। नमाज़ के बाद तस्बीहे हज़रत ज़हरा (अ.स.) पढ़ना न भूलना क्यूंकि इस शुमार "ज़िक्रे कबीर " में होता है। उसके बाद आयतल कुर्सी को तर्क न करना।
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24 जून 2012
हैदर अब्बास साहब के मकान पर महफिले मकासिदा
| मोमिनीन शाएर को गौर से सुनते हुए। |
अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी को बिखरने से बचाएं
![]() |
| "ज़नो शौहर के हुकूक " |
आज की इस मशीनी और दौड़ती भागती ज़िन्दगी में, शादी शुदा जिंदगियों में बहुत से मसाएल उभर कर सामने आ जाते हैं. घर के पुर सुकून माहोल को महेंगाई और आर्थिक परेशानी खराब कर देती है मियां बीवी के दरमियान मोहब्बत को कडवाहट में बदल देती हैं.
बीवी और शौहर की तालीमी न बराबरी भी टेंशन का बाईस होजाती है. किताब "ज़नो शौहर के हुकूक " मियां बीवी के पाक रिश्तो को बाक़ी रखने के लिए एक अच्छी गाइड है. इसे ज़रूर पढ़ें. उर्दू और अंग्रेजी ज़बानों में दस्तयाब है.
फ़ारसी ज़बान में मरहूम शैख़ मोहम्मद इस्माइल रजबी ने लिखी थी, जिसका तर्जुमा मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी ने किया था और उर्दू से अंग्रेजी में सय्यद अतहर हुसैन ने किया है. अगर कोई साहब दीन की खिदमत के लिए इस्लाम में "जनों शौहर के हुकूक" को हिंदी में तर्जुमा करदे तो बहुत से रिश्ते टूटने से बच सकते हैं.
उर्दू और अंग्रेजी की किताब निशुल्क/मुफ्त हासिल करने के लिए आप मुंबई के इस फ़ोन नंबर पर अपना नाम और पता लिखवा दें ताकि यह किताब आपके घर तक पहुँच जाए.
Phone: 022-23463237
23 जून 2012
22 जून 2012
राएगाँ जाती नहीं कोई दुआ शब्बीर की
हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की विलादत के मौके पर ज़हीर इलाहाबादी (शैज़ी रिज़वी ) ने
नजफे अशरफ, इराक से अपना कलाम www.MyKarari.com के लिए भेजा है.
हम तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करते हैं.
ज़हीर इलाहाबादी नजफे अशरफ में हौज़े इल्मिया में दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं.
मदहा की कुव्वत अता कर दे खुदा शब्बीर की
ज़िन्दगी बे मानिओ मतलब गुज़र जाती मेरी
शुक्रिया तेरा के तू ने दी अजा शब्बीर की
मालिके खुल्दे बरीं हो जाता है लम्हों में वो
गर किसी बन्दे पे हो जाए अता शब्बीर की
नोके नेजा पे तिलावत कर रहे हैं शाहे दीं
और जियारत कर रहा है हल अता शब्बीर की
मिस्ले राहिब बे समर उम्मीद को बख्शे समर
राएगाँ जाती नहीं कोई दुआ शब्बीर की
क्या कोई बच पाया है कहरे खुदा से आज तक
कहरे खालिक की तरह से है विगा शब्बीर की
जिस घडी तलवार के कब्जे में था दस्ते हुसैन
देखता था खालिके अकबर अदा शब्बीर की
अश्क आखों में छलक पड़ते थे पैग़म्बर के भी
आँख में आंसू अगर एक आ गया शब्बीर की .
नामए आमाल मेरा देखने से पहले तुम
जा के पूछो तो जरा मर्ज़ी है क्या शब्बीर की
पूछ बैठा ख्वाब में जिब्रील से मैं क्या करूं
कह उठे लिख दो ज़हीर अब कुछ सना शब्बीर की
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19 जून 2012
12 जून 2012
05 जून 2012
13 रजब के मौके पर सादिक हसन रिज़वी का ताज़ा कसीदा My Karari के लिए
वेलादत की खबर हैदर की पहुंची दो जहाँ तक है ,
गिरे काबे के बुत डर कर हदीसों में बयां तक है ,
है काबा मुन्तजिर बिन्ते असद के पाक कदमों का ,
अली के वास्ते जाये वेलादत का मकाँ तक है ,
बनेगा फ़ातेमा बिन्ते असद का ज़चाखाना यह ,
के इस्तेकबाल में दीवारे काबा शादमा तक है ,
अज़ल का नूर दुनिया में हुआ है आज जलवागर ,
सजी बज्मे वेलाये मुर्तजा राहे जेना तक है ,
करेंगे मीसमे तम्मार की मानिंद मिदहत हम ,
अली का सच्चा आशिक दहर में पीरो जवाँ तक है ,
मुनाफ़िक़ जानवर से भी गया गुज़रा न हो क्यों कर ,
अकीदत दहर में रखता अली से बे-ज़ुबां तक है ,
बरहना देख कर दुश्मन की जाँ भी बख्श दी हंसकर ,
अली बुजदिल अदू के इस अमल पर मेहरबाँ तक है ,
अली के नाम पर सर धुनते हैं अर्शी फरिश्ते तक ,
हुकूमत Murtaza की यह ज़मीन क्या आसमाँ तक है ,
सुनाऊंगा कसीदे मर के मरकद में फरिश्तों को ,
अली की मद हा का शैदा गिरोहे -कुद्सियाँ तक है ,
अकीदे की न पूछो इन्तेहा बीमार सादिक से ,
अली के नाम से उल्फत तो क़ल्बे नातवां तक है .
03 जून 2012
01 जून 2012
दस्तरखाने हज़रत इमाम मोहम्मद तकी (अ.स.)
रात मीरा रोड में हुसैन आलम के मकान पर दसवें इमाम, हज़रत इमाम मोहम्मद तकी (अ.स.) की मुनासिबत से दस्तरखान था. जिसमें मुख्तलिफ किस्म की ग्जाएं थीं. करारी के मोमिनीन सिलसिला वार आ रहे थे. चना बटाटा काफी लज़ीज़ था.
अल्लाह तआला हुसैन आलम साहब की रोज़ी में बरकत अता करे. मीरा रोड में वोह वक्तन फवक्तन अपने दौलत ख़ाने पर इस तरह के प्रोग्राम का इनेकाद करते रहते हैं.
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| दस्तरखान पर अम्बाही, करारी के हाजी ज़की साहब भी मसरूफ हैं और हुसैन आलम मेहमान नवाज़ी करते हुए |
31 मई 2012
मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 27 वीं बरसी
![]() |
| marhum Sayyad Ameer Ali ibne Roshan Ali |
मार्च 1985 और रजबुल मुरज्जब की आठ तारीख़ को हमारे दादा मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी का इन्तेकाल हुआ था. कल उनकी 27 वीं बरसी थी.
इसी मुनासिबत से मीरा रोड में अपने ग़रीब ख़ाने पर मरहूम की तकरीबे फातेहा का एहतेमाम किया.
दादा मरहूम में अकरबा परवरी पाई जाती थी. अपने ज़माने में अच्छे मर्सिया पढने वालों में उनका शुमार होता था. उर्दू ज़बान के आला खुश नवीस थे. मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर के मरासी अपने हाथों से लिख कर अपने पास रख्खे हुए थे.
रिज़्के हलाल ही ज़रिए मआश था. बच्चों को सौमो सलात का पाबंद बनाया. अज़ादारी में पेश पेश रहे और अपनी औलाद को मोहब्बते अहले बैत (अ.स.) घोल कर पिलाया. उनको मुती और फरमा बरदार बनाया.
अल्लाह तआला उनको जवारे मासूमीन (अ.स.) में जगह दे.
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| घर के अफराद सवाबे सुरह फातेहा हदया करते हुए |
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