21 सितंबर 2012

मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए

करारी जामे मस्जिद के इमामे जुमा और जमात मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए, मौलाना ने ईरान जाने का प्रोग्राम बनाया है। काज़मी साहब तकरीबन डेढ़ साल तक जमे मस्जिद में अपनी खिदमात दे रहे थे।
अपनी इमामत के दौरान अपनी एहलिया के हमराह मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के मकान पर कयाम पजीर रहे।
करारी जामे मस्जिद की कमिटी ने नए इमामे जमात की तलाश शुरू कर दी है।
अगर करारी का कोई फर्द इस सिलसिले में कोई राय देना चाहता है तो वोह करारी जामे मस्जिद के मेनेजर जनाब शमीम हैदर साहब से राबता कर सकता है।  

15 सितंबर 2012

"एहानते रसूल" की मज़म्मत पर इरफ़ान इलाहाबादी के चार मिसरे


अफ़सोस  का  मक़ाम  है  इरफ़ान जाने  क्यूँ  ?
तौहीने   मुस्तफा  प  भी   लब  खोलते  नहीं 
हैरत  ये  है  की  हिंद  के  हिन्दू  हैं  मोतरिज़ 
सब  बोलते  हैं  पर  ये  अरब  बोलते  नहीं 

12 सितंबर 2012

सिब्ते भाई कुरआन पढ़ते हुए

सिब्ते साहब मीरा रोड की हैदरी मस्जिद में मरहूम शाहिद हुसैन नकवी के चेहलुम की मजलिस से पहले ईसाले सवाब के लिए कुरआन करीम का पारह ख़त्म करते हुए।  


07 सितंबर 2012

ऑन मोहम्मद रिज़वी

ऑन मोहम्मद रिज़वी माहे रमज़ान में मुंबई की माहिम की महफ़िल में अपना कलाम पेश करते हुए।

09 अगस्त 2012

मुसलमानों पर 30 रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए गए



किताब "मन ला यहज़ुर" में हज़रत अली (अ.स.) से मन्कूल है, आप ने फ़रमाया:

यहूदियों का एक गिरोह रसूले ख़ुदा (स.अ.) की खिदमत में हाज़िर हुआ. उनके आलिम ने हज़रत से कुछ मसाएल पूछे, उन में एक मसला यह भी था के अल्लाह तआला ने आप की उम्मत पर तीस गिन के रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए जब की दूसरी उम्मतों पर इससे ज़्यादा रोज़े फ़र्ज़ थे?

उन हज़रत (स.अ.) ने फ़रमाया:
जब हज़रत आदम ने शजरे मम्नूआ का फल खाया तो वह तीस दिनों तक उनके पेट में बाक़ी रहा, इस लिए अल्लाह तआला ने उनकी औलाद के लिए तीस दिन तक खाना पीना मम्नू करार दिया. रात के वक़्त खाने की इजाज़त अल्लाह तआला का खुसूसी एहसान है और यही एहसान आदम पर भी किया गया था. 
(तफसीरे नूरुस सक़लैन, जिल्द 2 सफहा 118 )   

01 अगस्त 2012

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

सरैय्याँ के अमीर हसन जो कैसर के नाम से जाने जाते थे, कल मालोनी मलाड में दिल का दवरा पड़ने से इन्तेकाल हो गया।
तद्फीन आज रेह्मताबाद, मजगांव में रात 9 बजे होगी.
मरहूम के लिए नमाज़े वहशत पढना न भूलें।

20 जुलाई 2012

इमाम महदी (अ.स.) की शान में सादिक़ रिज़वी का क़सीदा

मुंबई में मुक़ीम, करारी के शाएर सादिक रिज़वी साहब ने अपना कलाम शाबान के मौक़े पर My Karari के लिए खुसूसी तौर पर रिकॉर्ड करवाया 

16 जुलाई 2012

मीरा रोड, मुंबई में खतीब के घर महफ़िल

करारी,इलाहबाद के नवजवान शाएर जावेद रिज़वी के छोटे भाई ख़तीब साहब के मकान पर रात महफिले मुक़सिदा का इनेकाद हुआ था। यह महफ़िल इमामे ज़माना (अ.स.) की शान में हर साल शाबान के आखरी इतवार को होती है।
महफ़िल में इलाहबाद से आए हुए कई अफराद मौजूद थे। ओलमा हज़रात में मौलाना क़मर महदी, मौलाना एहसान हैदर जवादी, मौलाना जवाद हैदर जवादी और मौलाना हसनैन करारवी तशरीफ़ फरमा थे। रिज़वान हैदर जवादी ने हर अच्छे शेर पर खुल कर दाद दी।
इलाहबाद से मुख़्तार रिज़वी और जावेद रिज़वी ने महफ़िल में शिरकत की। अब्बास आलम साहब ने नेज़ामत के फ़राएज़ जावेद रिज़वी को सौँप दिया.
बहुत अच्छे अच्छे कलाम पढ़े गए। रोशन करारवी , मुख़्तार रिज़वी ने वाह  वाही  लूटी। हुसैन आलम ने छोटी बहेर में बेहतरीन कसीदा कहा। 
फहीम इलाहाबादी के शानदार और मुख़्तसर कलाम पर महफ़िल का इख्तेताम हुआ।  
1BHK के फ्लैट में "10ftx15ft" के हॉल में यह एक बड़ी महफ़िल थी। बॉम्बे में अपने घर पर मजलिस और महफ़िल करना एक बड़ी बात है।


हैदर अब्बास साहब अपना कलाम पढ़ते हुए 

15 जुलाई 2012

ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर का निकाह

मुम्बरा में मुक़ीम करारी के जनाब ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर अज़ीज़ फातेमा सल्लमहा  का निकाह मौलाना मोहसिन हसन इब्ने ज़फरुल हसन (बनारस) के हमराह 27 जून को क़ाज़ीजी की मसजिद, बख्शी बाज़ार, इलाहबाद में नमाज़े मग़रेबैन के बाद हुआ।
इस तकरीब में करारी से तमाम रिश्तेदार मोजूद थे। बारात का इस्तेकबाल करेली के दुल्हन पैलेस में किया गया.
भाई  ओन मोहम्मद रिज़वी साहब को उनके 09821719933 नंबर पर मुबारकबाद दे सकते हैं। 

क़ाज़ीजी की मसजिद में निकाह का मंज़र , दुल्हन के मामूं मौलाना मोहम्मद अख्तर साहब दुल्हे के  बाईं  तरफ बैठे मुस्कुरा रहे हैं। मौलाना जवाद हैदर, मौलाना एहसान हैदर और मौलाना मोहम्मद अब्बास भी निकाह खानी में मौजूद थे।

13 जुलाई 2012

जुलूसे अमारी का एक और मन्ज़र

गुज़िश्ता 8 रबीउल अव्वल को करारी के जुलूसे अमारी में मौलाना मोहम्मद अख्तर साहब तक़रीर करते हुए। मौलाना साहब अहमदाबाद, गुजरात में जामए  इमाम ख़ुमैनी में मुदर्रिस हैं। 


12 जुलाई 2012

आप का तआवुन: अमारी जुलूस की हयात

 जनाब अज़ीज़ुल हसन साहब मोमिनीन को सवाब का मोक़ा देते हुए।  

यह कौन आया ज़माना सलाम करने लगा

 ज़ामिन अब्बास 8 रबीउल अव्वल  को जुलूसे अमारी, करारी में इसी साल नौहा पढ़ते हुए।