14 नवंबर 2012

केसन भाई के दोनों हाथों में लड्डू ।

अल्लाह तआला केसन भाई को बा सेहत रख्खे। 
बहुत अच्छी  और दर्द भरी सोज़ ख्वानी करते हैं।
रोते हुए को हंसाते हैं और हँसते हुए को देख कर मुस्कुराते हैं।
बा हुनर इंसान हैं लेकिन अपने हुनर को तरक्क़ी के लिए इस्तेमाल नहीं करते। छमिरछा को रहीमपुर मुलानी पर तरजीह दी।
रहीमपूर मुलानी में 7 रबीउल अव्वल को जुलूसे अमारी निकालते हैं।
बहुत मेहनत  करते हैं। बहुत अच्छा शबीहे ज़ुल्जनाह सजाते हैं।उसके जेवरात का ख़ास ख़याल रखते हैं।
महफ़िल की ज़ीनत हैं। अगर केसन भाई बोल रहे हों तो सब ख़ामोश रहते हैं, सिर्फ सुनकर लुत्फ़ अन्दोज़ होते  है।
उन जैसा क़िस्सा गो परगना करारी में मुश्किल से मिलेगा।
अगर कैमरे के सामने भी ऐसी गुफ्तगू करें तो सीरियल के अच्छे नायक हो जाएं।एहकाम की पाबंद शख्सियत हैं। परवरदिगार इनकी परेशानियों को दूर करे। आमीन रब्बल आलमीन 
केसन भाई के दोनों हाथों में लड्डू  है। यानी दीन  और दुनिया 

11 नवंबर 2012

मरहूम ग़ुलाम पंजतन की बरसी की मजलिस

करारी शिया जामे मस्जिद में आज 11.00 बजे मरहूम ग़ुलाम पंजतन की बरसी की मजलिस हुई जिसे मौलाना रजा हैदर साहब ने ख़िताब किया।
आप से सूरह फातेहा की दरख्वास्त है। 
मरहूम ग़ुलाम पंजतन इब्ने क़ाज़ी हुसैन।


10 नवंबर 2012

आज इलाहबाद, क़ाज़ी जी की मस्जिद में मजलिसे तरहीम


शेरू और शीलू ब्रद्रान ने आज अपनी वालेदा मरहूमा हुसैन फातेमा के ईसाले सवाब के लिए मस्जिदे क़ाज़ी में नमाज़े मग्रेबैन के बाद मजलिस का एहतेमाम किया है।

आप लोगों से शिरकत की दरख्वास्त है। मोमेनीन से एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है। 

08 नवंबर 2012

दर की है ज़िद ........

मरहूम दबीर सीतापुरी अपने बेहतरीन अंदाज़ में 13 रजब के मौके पर क़सीदा पढ़ते हुए। 
सुनिए और उन्हें सूरह फातेहा से याद करिए। 
अल्लाह मरहूम पर रहमत नाजिल करे।

06 नवंबर 2012

मीरा रोड में महफिले ग़दीर

मीरा रोड में जनाब हुसैन आलम के दौलत कदे पर हर साल की तरह इम्साल भी 4 नवम्बर को महफिले मक़ासिदा का इह्तेमाम किया गया।
जिसमें 10/12 मौला के चाहने वालों ने अपना कलाम पढ़ा। 
पढ़ने और सुनने वालों की खिदमत में तहाइफ़ पेश किए गए और ज़म ज़म बिरयानी पर प्रोग्राम इख्तेताम पज़ीर हुआ।
नीचे दो कलाम का ऑडियो है। जनाब हसन ईलाहाबादी और मुनीर फैज़ाबादी की अपनी आवाज़ में।




04 नवंबर 2012

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

करारी के करीब बेरूई के मरहूम शहेंशाह आलम की ज़ौजा का आज 6.30 शाम अपने वतन में एक तवील अलालत के बात इन्तेकाल हो गया।
तीन साल पहले मरहूम शहेंशाह आलम ने इस दुन्याए फानी को खैरबाद कहा था।
तद्फीन कल दोशम्बे (पीर) को होगी। 

14 अक्टूबर 2012

21 सितंबर 2012

मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए

करारी जामे मस्जिद के इमामे जुमा और जमात मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए, मौलाना ने ईरान जाने का प्रोग्राम बनाया है। काज़मी साहब तकरीबन डेढ़ साल तक जमे मस्जिद में अपनी खिदमात दे रहे थे।
अपनी इमामत के दौरान अपनी एहलिया के हमराह मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के मकान पर कयाम पजीर रहे।
करारी जामे मस्जिद की कमिटी ने नए इमामे जमात की तलाश शुरू कर दी है।
अगर करारी का कोई फर्द इस सिलसिले में कोई राय देना चाहता है तो वोह करारी जामे मस्जिद के मेनेजर जनाब शमीम हैदर साहब से राबता कर सकता है।  

15 सितंबर 2012

"एहानते रसूल" की मज़म्मत पर इरफ़ान इलाहाबादी के चार मिसरे


अफ़सोस  का  मक़ाम  है  इरफ़ान जाने  क्यूँ  ?
तौहीने   मुस्तफा  प  भी   लब  खोलते  नहीं 
हैरत  ये  है  की  हिंद  के  हिन्दू  हैं  मोतरिज़ 
सब  बोलते  हैं  पर  ये  अरब  बोलते  नहीं 

12 सितंबर 2012

सिब्ते भाई कुरआन पढ़ते हुए

सिब्ते साहब मीरा रोड की हैदरी मस्जिद में मरहूम शाहिद हुसैन नकवी के चेहलुम की मजलिस से पहले ईसाले सवाब के लिए कुरआन करीम का पारह ख़त्म करते हुए।  


07 सितंबर 2012

ऑन मोहम्मद रिज़वी

ऑन मोहम्मद रिज़वी माहे रमज़ान में मुंबई की माहिम की महफ़िल में अपना कलाम पेश करते हुए।

09 अगस्त 2012

मुसलमानों पर 30 रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए गए



किताब "मन ला यहज़ुर" में हज़रत अली (अ.स.) से मन्कूल है, आप ने फ़रमाया:

यहूदियों का एक गिरोह रसूले ख़ुदा (स.अ.) की खिदमत में हाज़िर हुआ. उनके आलिम ने हज़रत से कुछ मसाएल पूछे, उन में एक मसला यह भी था के अल्लाह तआला ने आप की उम्मत पर तीस गिन के रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए जब की दूसरी उम्मतों पर इससे ज़्यादा रोज़े फ़र्ज़ थे?

उन हज़रत (स.अ.) ने फ़रमाया:
जब हज़रत आदम ने शजरे मम्नूआ का फल खाया तो वह तीस दिनों तक उनके पेट में बाक़ी रहा, इस लिए अल्लाह तआला ने उनकी औलाद के लिए तीस दिन तक खाना पीना मम्नू करार दिया. रात के वक़्त खाने की इजाज़त अल्लाह तआला का खुसूसी एहसान है और यही एहसान आदम पर भी किया गया था. 
(तफसीरे नूरुस सक़लैन, जिल्द 2 सफहा 118 )   

01 अगस्त 2012

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

सरैय्याँ के अमीर हसन जो कैसर के नाम से जाने जाते थे, कल मालोनी मलाड में दिल का दवरा पड़ने से इन्तेकाल हो गया।
तद्फीन आज रेह्मताबाद, मजगांव में रात 9 बजे होगी.
मरहूम के लिए नमाज़े वहशत पढना न भूलें।