15 नवंबर 2012
14 नवंबर 2012
केसन भाई के दोनों हाथों में लड्डू ।
अल्लाह तआला केसन भाई को बा सेहत रख्खे।
बहुत अच्छी और दर्द भरी सोज़ ख्वानी करते हैं।
रोते हुए को हंसाते हैं और हँसते हुए को देख कर मुस्कुराते हैं।
बा हुनर इंसान हैं लेकिन अपने हुनर को तरक्क़ी के लिए इस्तेमाल नहीं करते। छमिरछा को रहीमपुर मुलानी पर तरजीह दी।
रहीमपूर मुलानी में 7 रबीउल अव्वल को जुलूसे अमारी निकालते हैं।
बहुत मेहनत करते हैं। बहुत अच्छा शबीहे ज़ुल्जनाह सजाते हैं।उसके जेवरात का ख़ास ख़याल रखते हैं।
महफ़िल की ज़ीनत हैं। अगर केसन भाई बोल रहे हों तो सब ख़ामोश रहते हैं, सिर्फ सुनकर लुत्फ़ अन्दोज़ होते है।
उन जैसा क़िस्सा गो परगना करारी में मुश्किल से मिलेगा।
अगर कैमरे के सामने भी ऐसी गुफ्तगू करें तो सीरियल के अच्छे नायक हो जाएं।एहकाम की पाबंद शख्सियत हैं। परवरदिगार इनकी परेशानियों को दूर करे। आमीन रब्बल आलमीन
| केसन भाई के दोनों हाथों में लड्डू है। यानी दीन और दुनिया |
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केसन भाई,
छमिरछा,
ज़ुल्जनाह,
रहीमपुर मुलानी,
सोज़ ख्वानी
11 नवंबर 2012
10 नवंबर 2012
आज इलाहबाद, क़ाज़ी जी की मस्जिद में मजलिसे तरहीम
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08 नवंबर 2012
दर की है ज़िद ........
मरहूम दबीर सीतापुरी अपने बेहतरीन अंदाज़ में 13 रजब के मौके पर क़सीदा पढ़ते हुए।
सुनिए और उन्हें सूरह फातेहा से याद करिए।
अल्लाह मरहूम पर रहमत नाजिल करे।
06 नवंबर 2012
मीरा रोड में महफिले ग़दीर
मीरा रोड में जनाब हुसैन आलम के दौलत कदे पर हर साल की तरह इम्साल भी 4 नवम्बर को महफिले मक़ासिदा का इह्तेमाम किया गया।
जिसमें 10/12 मौला के चाहने वालों ने अपना कलाम पढ़ा।
पढ़ने और सुनने वालों की खिदमत में तहाइफ़ पेश किए गए और ज़म ज़म बिरयानी पर प्रोग्राम इख्तेताम पज़ीर हुआ।
नीचे दो कलाम का ऑडियो है। जनाब हसन ईलाहाबादी और मुनीर फैज़ाबादी की अपनी आवाज़ में।
जिसमें 10/12 मौला के चाहने वालों ने अपना कलाम पढ़ा।
पढ़ने और सुनने वालों की खिदमत में तहाइफ़ पेश किए गए और ज़म ज़म बिरयानी पर प्रोग्राम इख्तेताम पज़ीर हुआ।
नीचे दो कलाम का ऑडियो है। जनाब हसन ईलाहाबादी और मुनीर फैज़ाबादी की अपनी आवाज़ में।
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04 नवंबर 2012
03 नवंबर 2012
24 अक्टूबर 2012
21 अक्टूबर 2012
14 अक्टूबर 2012
क्या कोई इन साहब का असल नाम बता सकता है?
10 अक्टूबर 2012
08 अक्टूबर 2012
21 सितंबर 2012
मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए
करारी जामे मस्जिद के इमामे जुमा और जमात मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी करारी से विदा हुए, मौलाना ने ईरान जाने का प्रोग्राम बनाया है। काज़मी साहब तकरीबन डेढ़ साल तक जमे मस्जिद में अपनी खिदमात दे रहे थे।
अपनी इमामत के दौरान अपनी एहलिया के हमराह मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के मकान पर कयाम पजीर रहे।
करारी जामे मस्जिद की कमिटी ने नए इमामे जमात की तलाश शुरू कर दी है।
अगर करारी का कोई फर्द इस सिलसिले में कोई राय देना चाहता है तो वोह करारी जामे मस्जिद के मेनेजर जनाब शमीम हैदर साहब से राबता कर सकता है।
अपनी इमामत के दौरान अपनी एहलिया के हमराह मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के मकान पर कयाम पजीर रहे।
करारी जामे मस्जिद की कमिटी ने नए इमामे जमात की तलाश शुरू कर दी है।
अगर करारी का कोई फर्द इस सिलसिले में कोई राय देना चाहता है तो वोह करारी जामे मस्जिद के मेनेजर जनाब शमीम हैदर साहब से राबता कर सकता है।
19 सितंबर 2012
15 सितंबर 2012
"एहानते रसूल" की मज़म्मत पर इरफ़ान इलाहाबादी के चार मिसरे
अफ़सोस का मक़ाम है इरफ़ान जाने क्यूँ ?
तौहीने मुस्तफा प भी लब खोलते नहीं
हैरत ये है की हिंद के हिन्दू हैं मोतरिज़
सब बोलते हैं पर ये अरब बोलते नहीं
12 सितंबर 2012
सिब्ते भाई कुरआन पढ़ते हुए
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07 सितंबर 2012
ऑन मोहम्मद रिज़वी
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05 सितंबर 2012
03 सितंबर 2012
02 सितंबर 2012
27 अगस्त 2012
22 अगस्त 2012
21 अगस्त 2012
19 अगस्त 2012
14 अगस्त 2012
09 अगस्त 2012
मुसलमानों पर 30 रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए गए
किताब "मन ला यहज़ुर" में हज़रत अली (अ.स.) से मन्कूल है, आप ने फ़रमाया:
यहूदियों का एक गिरोह रसूले ख़ुदा (स.अ.) की खिदमत में हाज़िर हुआ. उनके आलिम ने हज़रत से कुछ मसाएल पूछे, उन में एक मसला यह भी था के अल्लाह तआला ने आप की उम्मत पर तीस गिन के रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए जब की दूसरी उम्मतों पर इससे ज़्यादा रोज़े फ़र्ज़ थे?
उन हज़रत (स.अ.) ने फ़रमाया:
जब हज़रत आदम ने शजरे मम्नूआ का फल खाया तो वह तीस दिनों तक उनके पेट में बाक़ी रहा, इस लिए अल्लाह तआला ने उनकी औलाद के लिए तीस दिन तक खाना पीना मम्नू करार दिया. रात के वक़्त खाने की इजाज़त अल्लाह तआला का खुसूसी एहसान है और यही एहसान आदम पर भी किया गया था.
(तफसीरे नूरुस सक़लैन, जिल्द 2 सफहा 118 )
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08 अगस्त 2012
04 अगस्त 2012
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