09 अगस्त 2012

मुसलमानों पर 30 रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए गए



किताब "मन ला यहज़ुर" में हज़रत अली (अ.स.) से मन्कूल है, आप ने फ़रमाया:

यहूदियों का एक गिरोह रसूले ख़ुदा (स.अ.) की खिदमत में हाज़िर हुआ. उनके आलिम ने हज़रत से कुछ मसाएल पूछे, उन में एक मसला यह भी था के अल्लाह तआला ने आप की उम्मत पर तीस गिन के रोज़े क्यूँ फ़र्ज़ किए जब की दूसरी उम्मतों पर इससे ज़्यादा रोज़े फ़र्ज़ थे?

उन हज़रत (स.अ.) ने फ़रमाया:
जब हज़रत आदम ने शजरे मम्नूआ का फल खाया तो वह तीस दिनों तक उनके पेट में बाक़ी रहा, इस लिए अल्लाह तआला ने उनकी औलाद के लिए तीस दिन तक खाना पीना मम्नू करार दिया. रात के वक़्त खाने की इजाज़त अल्लाह तआला का खुसूसी एहसान है और यही एहसान आदम पर भी किया गया था. 
(तफसीरे नूरुस सक़लैन, जिल्द 2 सफहा 118 )   

01 अगस्त 2012

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

सरैय्याँ के अमीर हसन जो कैसर के नाम से जाने जाते थे, कल मालोनी मलाड में दिल का दवरा पड़ने से इन्तेकाल हो गया।
तद्फीन आज रेह्मताबाद, मजगांव में रात 9 बजे होगी.
मरहूम के लिए नमाज़े वहशत पढना न भूलें।

20 जुलाई 2012

इमाम महदी (अ.स.) की शान में सादिक़ रिज़वी का क़सीदा

मुंबई में मुक़ीम, करारी के शाएर सादिक रिज़वी साहब ने अपना कलाम शाबान के मौक़े पर My Karari के लिए खुसूसी तौर पर रिकॉर्ड करवाया 

16 जुलाई 2012

मीरा रोड, मुंबई में खतीब के घर महफ़िल

करारी,इलाहबाद के नवजवान शाएर जावेद रिज़वी के छोटे भाई ख़तीब साहब के मकान पर रात महफिले मुक़सिदा का इनेकाद हुआ था। यह महफ़िल इमामे ज़माना (अ.स.) की शान में हर साल शाबान के आखरी इतवार को होती है।
महफ़िल में इलाहबाद से आए हुए कई अफराद मौजूद थे। ओलमा हज़रात में मौलाना क़मर महदी, मौलाना एहसान हैदर जवादी, मौलाना जवाद हैदर जवादी और मौलाना हसनैन करारवी तशरीफ़ फरमा थे। रिज़वान हैदर जवादी ने हर अच्छे शेर पर खुल कर दाद दी।
इलाहबाद से मुख़्तार रिज़वी और जावेद रिज़वी ने महफ़िल में शिरकत की। अब्बास आलम साहब ने नेज़ामत के फ़राएज़ जावेद रिज़वी को सौँप दिया.
बहुत अच्छे अच्छे कलाम पढ़े गए। रोशन करारवी , मुख़्तार रिज़वी ने वाह  वाही  लूटी। हुसैन आलम ने छोटी बहेर में बेहतरीन कसीदा कहा। 
फहीम इलाहाबादी के शानदार और मुख़्तसर कलाम पर महफ़िल का इख्तेताम हुआ।  
1BHK के फ्लैट में "10ftx15ft" के हॉल में यह एक बड़ी महफ़िल थी। बॉम्बे में अपने घर पर मजलिस और महफ़िल करना एक बड़ी बात है।


हैदर अब्बास साहब अपना कलाम पढ़ते हुए 

15 जुलाई 2012

ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर का निकाह

मुम्बरा में मुक़ीम करारी के जनाब ओन मोहम्मद रिज़वी साहब की दोख्तर अज़ीज़ फातेमा सल्लमहा  का निकाह मौलाना मोहसिन हसन इब्ने ज़फरुल हसन (बनारस) के हमराह 27 जून को क़ाज़ीजी की मसजिद, बख्शी बाज़ार, इलाहबाद में नमाज़े मग़रेबैन के बाद हुआ।
इस तकरीब में करारी से तमाम रिश्तेदार मोजूद थे। बारात का इस्तेकबाल करेली के दुल्हन पैलेस में किया गया.
भाई  ओन मोहम्मद रिज़वी साहब को उनके 09821719933 नंबर पर मुबारकबाद दे सकते हैं। 

क़ाज़ीजी की मसजिद में निकाह का मंज़र , दुल्हन के मामूं मौलाना मोहम्मद अख्तर साहब दुल्हे के  बाईं  तरफ बैठे मुस्कुरा रहे हैं। मौलाना जवाद हैदर, मौलाना एहसान हैदर और मौलाना मोहम्मद अब्बास भी निकाह खानी में मौजूद थे।

13 जुलाई 2012

जुलूसे अमारी का एक और मन्ज़र

गुज़िश्ता 8 रबीउल अव्वल को करारी के जुलूसे अमारी में मौलाना मोहम्मद अख्तर साहब तक़रीर करते हुए। मौलाना साहब अहमदाबाद, गुजरात में जामए  इमाम ख़ुमैनी में मुदर्रिस हैं। 


12 जुलाई 2012

आप का तआवुन: अमारी जुलूस की हयात

 जनाब अज़ीज़ुल हसन साहब मोमिनीन को सवाब का मोक़ा देते हुए।  

यह कौन आया ज़माना सलाम करने लगा

 ज़ामिन अब्बास 8 रबीउल अव्वल  को जुलूसे अमारी, करारी में इसी साल नौहा पढ़ते हुए।


06 जुलाई 2012

क़ब्रस्तान बेहिश्ते ज़हरा, मीरा रोड

मरहूम शाहिद हुसैन नक़वी की तद्फीन अभी नमाज़े जुमा के बाद मीरा रोड के कब्रस्तान होने वाली है। इसका नाम मोमिनीन ने बेहिश्ते ज़हरा रख्खा है
इसी क़ब्रस्तान की तारीख़ मरहूम ने April 2010 में रिकॉर्ड की थी। आप की खिदमत में पेश है।  

05 जुलाई 2012

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन


जनाब शाहिद हुसैन नकवी सख्त अलील  थे  और मीरा रोड के भक्ति वेदान्ता में ICU में दाखिल थे  अभी 9.40 PM इन्तेक़ाल  कर गए. तद्फीन कल होगी 

04 जुलाई 2012

जनाब शाहिद हुसैन नकवी ICU में दाखिल



मरहूम प्यारे बाबा के दामाद जनाब शाहिद हुसैन नकवी सख्त अलील हैं और मीरा रोड के भक्ति वेदान्ता में ICU में दाखिल हैं। 
आप लोगों से गुज़ारिश है की उनकी सेहत के लिए "अम्मईं योजीब"" पढ़ें।.
कल ब्लड प्रेशर हाई  हो जाने से ब्रेन हेमरेज हो गया था।

30 जून 2012

मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी की मजलिसे तरहीम


मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी के इन्तेक़ाल के छे महीने मोकम्मल होने पर मजलिसे अजा का एहतिमाम किया गया है। 
इलाहाबाद के मोमिनीन से शिरकत की दरख्वास्त है।


तारीख :     1 July, इतवार , रात 8.30 बजे।
मक़ाम:      A-52, अब्बास हाउस, करेली, इलाहबाद.
ज़ाकिर :    मौलाना क़मर सुलतान साहब (Noida) 


आप से मरहूम के लिए सुरह फातेहा की गुज़ारिश है। 



29 जून 2012

कूंडा की याद


कूंडा खाए आज चौदा  दिन हो गए हैं लेकिन याद अब भी सता रही है. अब एक मौक़ा और है।
शबे बरात। लेकिन उस रात तो हलवा बनता है। चने का हलवा और रवा का, खीर तो साल में एक बार ही मज़ा देती है चाहे आप साल भर बनाते रहें। कूंडे की खीर का ज़ाइका ही कुछ और है। माहे रजब में ताकीबात और कूंडे वाह ... इबादत की लज्ज़त और खीर की लज्ज़त। 

25 जून 2012

माही दर आब (पानी में मच्छली)



सय्यद अली काज़ी तबातबाई (र.अ.) ने वसीय्यत में लिखा है की "मोमिन को मस्जिद में नमाज़ अदा करनी चाहिए, मिसाल देते हुए  फरमाते हैं, की  मोमिन की हैसियत मस्जिद में उसी तरह होना चाहिए जैसे मच्छली का पानी में रहना. "

आप फरमाते हैं की नमाज़ को बाज़ारी न बनाओ उसे अव्वले वक़्त अदा करो। अगर तुम ने नमाज़ की हिफाज़त की तो तमाम चीज़ें महफूज़ हो जाएँगी। नमाज़ के बाद तस्बीहे हज़रत ज़हरा (अ.स.) पढ़ना न भूलना क्यूंकि इस शुमार "ज़िक्रे कबीर " में होता है। उसके बाद आयतल कुर्सी को तर्क न करना। 

24 जून 2012

हैदर अब्बास साहब के मकान पर महफिले मकासिदा

मोमिनीन शाएर को गौर से सुनते हुए।
कल रात मीरा रोड में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की विलादत की मुनासिबत से हैदर अब्बास साहब ने अपने मकान पर महफिले मकासिदा का एहतिमाम किया  था. जिसमें  वाजिहुल हसनैन, हुज्जत, अशर, ज़व्वार, मौलाना शहीद साहब, ज़हीरुल हैदर, हसन इलाहाबादी और फहीम इलाहाबादी  ने अपना मंजूम नजराना पेश किया. मोमिनीन मेह्जूज़ हुए। ज़मज़म पुलाव का लुत्फ़ लिया और अपने घरों को रवाना हुए। 

अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी को बिखरने से बचाएं


 "ज़नो शौहर के हुकूक "

आज की इस मशीनी और दौड़ती भागती ज़िन्दगी में, शादी शुदा जिंदगियों में बहुत से मसाएल उभर कर सामने आ जाते हैं. घर के पुर सुकून माहोल को महेंगाई और आर्थिक परेशानी खराब कर देती  है  मियां बीवी के दरमियान मोहब्बत को कडवाहट में बदल देती हैं.
बीवी और शौहर की तालीमी न बराबरी भी टेंशन का बाईस होजाती है. किताब "ज़नो शौहर के हुकूक " मियां बीवी के पाक रिश्तो को बाक़ी रखने के लिए एक अच्छी गाइड है. इसे ज़रूर पढ़ें. उर्दू और अंग्रेजी ज़बानों में दस्तयाब है.
फ़ारसी ज़बान में मरहूम शैख़ मोहम्मद इस्माइल रजबी ने लिखी थी, जिसका तर्जुमा मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी ने किया था और उर्दू से अंग्रेजी में सय्यद अतहर हुसैन ने किया है. अगर कोई साहब दीन की खिदमत के लिए इस्लाम में "जनों शौहर के हुकूक" को हिंदी में तर्जुमा करदे तो बहुत से रिश्ते टूटने से बच सकते हैं.
उर्दू और अंग्रेजी की किताब निशुल्क/मुफ्त हासिल करने के लिए आप मुंबई के इस फ़ोन नंबर पर अपना नाम और पता लिखवा दें ताकि यह किताब आपके घर तक पहुँच जाए.
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