14 अप्रैल 2014

उम्मुल बनइन आप पे नाचीज़ का सलाम

एय फ़ातेमा कलाबिया एय दुख्तरे हुज़ाम 
एय मादरे खुदाए वफ़ा ज़ौजए इमाम 
है तेरी ज़ात लायक़े सद इज़्ज़ोँ एहतेराम 
उम्मुल बनइन आप पे नाचीज़ का सलाम 
वारे हैं तुम ने चार पिसर जो हुसैन पर 
एहसान है वह दीने शहे मशरिक़ैन पर 
इरफ़ान इलाहाबादी 

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