22 अक्टूबर 2010
शीराज़ी रिजवी ICU में
सुब्बन रिजवी के बड़े साहबजादे "शीराज़ी" की अचानक तबीयत खराब हो जाने की वजह से उन्हें इलाहबाद के मेडिकल कॉलेज में ICU में दाखिल किया गया है. उसकी सेहत के लिए दस मर्तबा "अम्मैं योजीबुल मुजतर्रा इजा द आहो व यक्शिफुस सू" पढ़ें.
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17 अक्टूबर 2010
मजलिसे चेहलुम
जनाब आका हसन मरहूम का चेहलुम करारी में 07 नवम्बर को होने जा रहा है. यह मजलिस करारी शिया जामे मस्जिद में होगी. बॉम्बे में रिहाइश पजीर मौलाना सय्यद हसनैन रिजवी करार्वी खिताबत फ़रमाएंगे. मजलिस ठीक 11.00 बजे दिन में शुरू हो जायगी .
बरसी की मजलिस
रियाज़ फातेमा मरहूमा, सुब्बन रिजवी की अहलिया की बरसी की मजलिस आज रात 8.00 बजे बॉम्बे के मलाड मालोनी में होगी. आप लोगों से शिरकत की दरखास्त है. यह मजलिस 3 इमामबाड़े में होगी.
03 अक्टूबर 2010
आका हसन मरहूम का फातेहा
जुमा एक अक्टूबर 2010 के रोज़ हमारे मरहूम फुफा आका हसन रिजवी का फातेहा मीरा रोड में मज्जन रिजवी के घर हुवा था. उनके इन्तेकाल को नौ दिन पूरे हुए. इस मौके पर ज़नानी मजलिस हुई और करीबी रिश्तेदारों ने नमाज़े मग़रिब के बाद फातेहा दिया . नीचे तस्वीर उसी वक़्त की है. आप से भी गुज़ारिश है की मरहूम को हम्द और सुरे तौहीद पढ़ कर बख्श दें.
02 अक्टूबर 2010
करारी में जुलूसे अमारी 2008
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28 सितंबर 2010
खुर्शीद मुज़फ्फर नगरी हिन्दुस्तान के मशहूर कसीदा पढने वालों में शुमार किये जाते हैं. उनकी आवाज़ का जादू सुनने वाले को मसहूर कर देता है. नीचे विडियो में उन्हों ने वोह कसीदा पढ़ा है जो तकरीबन 15 से 20 साल पुराना है. मगर जब वोह अपने मखसूस अंदाज़ में पढ़ते हैं तो बिलकुल ताज़ा मालूम होता है. सुनने वाला चाहे कितना ही थका हुआ हो वोह अपनी थकान को भूल कर अहले बैत की मोहब्बत में डूब जाता है. खुदा, खुर्शीद भाई की आवाज़ को हमेशा तरो ताज़ा रखे .
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23 सितंबर 2010
मरहूम आका हसन का सेव्वोम आज
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलाय्हे राजेऊन. सय्यद आका हसन इब्ने नाजिम हुसैन का कलकत्ता मेल में इलाहाबाद जाते हुए इगतपुरी से पहले मंगल रात तकरीबन 11.30 बजे इन्तेकाल हो गया. मरहूम की तद्फीन बुध को शाम 4.30 बजे बम्बई के रेह्मताबाद कब्रस्तान में अमल में आई.
मरहूम आका हसन हमारे फुफा थे. 12 सितम्बर को सख्त बीमारी की वजह से उन्हें मीरा रोड के अस्पताल में दाखिल किया गया. वहां पर जब उम की तबियत में फर्क न हुवा तो उन्हें 15 सितम्बर २०१० को बम्बई के मशहूर सरकारी अस्पताल KEM ले जाया गया . एक हफ्ता रहने पर जब और शिफा के आसार नहीं दिखाई दिए तो उन्हें इलाहाबाद के लिए 21 सितम्बर को ले जाने के लिए कलकत्ता मेल में सवार किया गया. लेकिन मिटटी बम्बई की थी.
आज आंबेडकर रोड, बान्द्रा में मग्रेबय्न की नमाज़ के बाद मरहूम के फातेहा की मजलिस है. आप लोगों से शिरकत की गुज़ारिश है. यह भी गुज़ारिश है की मरहूम को एक सुरह फातेहा पढ़ कर बख्श दें.
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18 सितंबर 2010
"यौमे ग़म "
आज 8 शव्वाल. 1925 में आले सऊद ने मदीना में जन्नतुल बक़ी पर बने मासूमीन के रोजों को शहीद करवाया था. इस वाकए को याद करते हुए दुनिया भर के मुसलमान "यौमे ग़म " मनाते हैं.
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15 सितंबर 2010
सय्यद आका हसन रिज़वी की सेहत के लिए दुआ
गुज़िश्ता सनीचर से हमारे फुफा सय्यद आका हसन रिज़वी मीरा रोड के अस्पताल में ICU में दाखिल थे, कल उन्हें KEM अस्पताल में ले जाया गया. हालत पूरी तरह से काबू में नहीं है. आप लोगों से गुज़ारिश है के उनकी सेहत की दुआ करें.
शिफा के लिए सब से बेहतरीन दुआ, कुरआन मजीद की आयत ," अम्मईं युजीबुल मुज्तार्रा इजा द आ हो व यक्शिफुस सू " है, इसे दस बार पढ़ें . अधिक जानकारी के लिए 9820817072 पर काल करें.
शिफा के लिए सब से बेहतरीन दुआ, कुरआन मजीद की आयत ," अम्मईं युजीबुल मुज्तार्रा इजा द आ हो व यक्शिफुस सू " है, इसे दस बार पढ़ें . अधिक जानकारी के लिए 9820817072 पर काल करें.
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06 सितंबर 2010
01 सितंबर 2010
ज़फर की नज़र से
21 रमजान की सुबह जैनाबिया इमामबाड़ा में मौला अली (अ.स.) के ताबूत बरामद होने के बाद ज़फर (पापा) ने अपने तास्सुरात पेश किये . ज़फर का ताल्लुक तलाब्पर करारी से है.
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31 अगस्त 2010
रमजान महीना और आम मुसलमान
रमजान महीने के बारे में आम मुस्लमान के नज़र्यात. हर तबके के लोगों ने अपनी अपनी बात कही है.
30 अगस्त 2010
शबे कद्र के आमाल की किताब
माहे रमजान की किताब जिसमे दुआ , शबे कद्र के आमाल, ईद के आमाल, ईद की नमाज़, नमाज़े शब् इस किताब में हैं , किताब को डाउनलोड कर के उसका print निकाल लें.
28 अगस्त 2010
इमाम हसन (अ.स.) की विलादत के मौके पर एक और कसीदा
इमाम हसन (अ.स.) की विलादत के मौके पर एक और कसीदा जिसे मुफ्ती गंज, लखनऊ के मशहूर शाएर जनाब असद नकवी नसीराबादी ने Mumbai Shia News के ख़ास तौर पर रिकाड करवाया . आप भी उनके खुसूसी अंदाज़ से मेह्जूज़ हों .
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27 अगस्त 2010
इफ्तार की तय्यारी
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26 अगस्त 2010
15 माहे रमजान, इमाम हसन (अ.स.) की विलादत का दिन
15 माहे रमजान, इमाम हसन (अ.स.) की विलादत का दिन है. आप लोगों कि खिदमत में My Karari की जानिब से मुबारकबाद.
इस मुबारक और ख़ुशी के मौके पर चार मिसरे पेश किये जा रहे हैं .
इस मुबारक और ख़ुशी के मौके पर चार मिसरे पेश किये जा रहे हैं .
22 अगस्त 2010
17 अगस्त 2010
करारी के पास लहना गाँव में फसाद
पढ़िए दैनिक जागरण की रिपोर्ट :
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6651817_1.html
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6653034_1.html
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6651817_1.html
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_6653034_1.html
रोज़ा खोलने के वक़्त में शिया और दूसरे फिरकों के दरमियान फर्क क्यूँ ?
माहे रमजान में शिया हजरात दूसरे फिरकों के मुकाबले रोज़ा देर से क्यूँ खोलते हैं? इस मसले को समझा रहे हैं मौलाना सय्यद हसनैन करार्वी.
11 अगस्त 2010
ज़मीर हैदर (शब्बू) का सायन अस्पताल में इन्तेकाल
ज़मीर हैदर, मरहूम रियाजुल हैदर के फरजंद जो शब्बू के नाम से पुकारे जाते थे और मुम्बरा में रहते थे कल उनका बॉम्बे के सायन अस्पताल में इन्तेकाल हो गया. तद्फीन आज शाम को मीरा रोड के कब्रस्तान में होना है.
सनीचर के दिन होटल में काम करते शब्बू पियाज़ कि बोरियां चढ़ा रहे थे कि एक बोरी उनके सर गिरी जिसकी वजह से उनके गर्दन की हड्डी टूट गई . तीन रोज़ ICU में रहने के बाद कल रात उनहूँ ने दम तोड़ दिया और अपनी माँ , बीवी और एक बेटी को रोता बिलाकता दूसरी और अबदी दुनिया को कूच कर गए. यह २८ साल का नौजवान बहुत खुश मिज़ाज था. अपनी बेवा माँ का बहुत ख़याल रखता था. चार महीना पहले ही बाप का साया सर से उठा था.
आप लोगों से आज शब् नमाज़े वहशत की दरख्वास्त है.
सनीचर के दिन होटल में काम करते शब्बू पियाज़ कि बोरियां चढ़ा रहे थे कि एक बोरी उनके सर गिरी जिसकी वजह से उनके गर्दन की हड्डी टूट गई . तीन रोज़ ICU में रहने के बाद कल रात उनहूँ ने दम तोड़ दिया और अपनी माँ , बीवी और एक बेटी को रोता बिलाकता दूसरी और अबदी दुनिया को कूच कर गए. यह २८ साल का नौजवान बहुत खुश मिज़ाज था. अपनी बेवा माँ का बहुत ख़याल रखता था. चार महीना पहले ही बाप का साया सर से उठा था.
आप लोगों से आज शब् नमाज़े वहशत की दरख्वास्त है.
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10 अगस्त 2010
05 अगस्त 2010
जब इमाम आयेंगे
जब इमाम आयेंगे. सिब्ते जफ़र की मशहूर नज़्म जिसमे उन्हों ने हमारे ज़मीर को झिंझोड़ने की कोशिश की है और एक हद तक कामयाब हुए हैं. उसका असर होता है चाहे थोड़ी देर के लिए ही क्यूँ न हो. आप की खिदमत में पेश है.
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04 अगस्त 2010
मंज़ूर तकवी उर्फ़ कज्जन का आज इन्तेकाल हो गया
मंज़ूर तकवी उर्फ़ कज्जन ने आज सुबह तकरीबन ५.३० बजे इस फानी दुनिया को खैरबाद कह दिया . आप की उम्र ८० से ज्यादा थी. मरहूम ने गुज़िश्ता साल हज का फ़रीज़ा भी अंजाम दिया था. कानपूर में एक हफ्ते से अस्पताल में दाखिल थे. फालिज का ज़बरदस्त झटका था. मरहूम कि तद्फीन आज करारी में होगी.
मरहूम ने एक अरसा बॉम्बे में गुज़ारा . बर्फ की कंपनी में मुलाजिम थे. बहुत मिलनसार थे. सामाजिक शख्सियत थे. बॉम्बे की मोगल मस्जिद में काफी मारूफ थे. हमारी Association of Imam Mahdi (a.s.) के मद्दाह थे. इमामे ज़माना (अ.स.) का ज़िक्र आते ही आँखें डबडबा जाती थीं. मरहूम कि औलाद में ६ बेटे और ५ बेटियां हैं. सब से बड़े फरजंद तनवीर और सब से छोटे मेह्रोज़ हैं.
मरहूम कि तद्फीन आज शाम ५ बजे अम्बाही बाग़ में होगी. नमाज़े मग्रेबैन में नमाज़े वहशत पढना न भूलें .
मरहूम ने एक अरसा बॉम्बे में गुज़ारा . बर्फ की कंपनी में मुलाजिम थे. बहुत मिलनसार थे. सामाजिक शख्सियत थे. बॉम्बे की मोगल मस्जिद में काफी मारूफ थे. हमारी Association of Imam Mahdi (a.s.) के मद्दाह थे. इमामे ज़माना (अ.स.) का ज़िक्र आते ही आँखें डबडबा जाती थीं. मरहूम कि औलाद में ६ बेटे और ५ बेटियां हैं. सब से बड़े फरजंद तनवीर और सब से छोटे मेह्रोज़ हैं.
मरहूम कि तद्फीन आज शाम ५ बजे अम्बाही बाग़ में होगी. नमाज़े मग्रेबैन में नमाज़े वहशत पढना न भूलें .
01 अगस्त 2010
सुरूद: या इमामे ज़माँ आप क्यूँ हैं निहां
यह तराना तकरीबन दस साल पहले बॉम्बे में १५ शाबान के जश्न में पढ़ा गया था . इस तराने को मरहूम अल्लामा जीशान हैदर जवादी ने लिखा था. इस को स्कूल के बच्चों ने बहुत ख़ूबसूरती से पढ़ा है.
31 जुलाई 2010
मरहूमा कनीज़ कुबरा की तीसरी बरसी है
आज शाबान की १८ तारीख, हमारी नानी, मरहूमा कनीज़ कुबरा की तीसरी बरसी है . मरहूमा एक नेक सिफात की हामिल और अहलेबैत की सच्ची मोहब्बत रखने वाली कनीज़ थीं . उन्हों ने ६ बेटों और ४ बेटियों की परवरिश की. जिस में सब से बड़े मशहूर मुफक्किर और शाएर मरहूम महमूद सरोश थे और सब से छोटे सादिक हसन रिजवी हैं. यह भी शाएरी करते हैं और खूब करते हैं. दीगर ४ बेटों में याकूब हसन रिजवी , युसूफ हसन रिजवी, डॉक्टर अख्तर हसन रिज़वी (रिजवी बिल्डर्स) और सिब्ते हसन रिज़वी हैं. मरहूमा कनीज़ कुबरा की ४ बेटियों में सबसे बड़ी का इन्तेकाल हो गया है, उसके बाद हमारी वालेदा हैं.
कल रात हम लोगों ने मरहूमा कनीज़ कुबरा का घर पर फातेहा दिलाया . दस्तरखान पर जिन चीज़ों को रखा था उसकी तस्वीरें पेशे खिदमत हैं.
कल रात हम लोगों ने मरहूमा कनीज़ कुबरा का घर पर फातेहा दिलाया . दस्तरखान पर जिन चीज़ों को रखा था उसकी तस्वीरें पेशे खिदमत हैं.
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28 जुलाई 2010
मरहूम शमीम काजिम का चेहलुम
मरहूम शमीम काजिम का चेहलुम २५ जुलाई को उनके आबाई गाँव रक्सुवारा में हुआ जो करारी से तकरीबन चार कि मि दूर है. . मजलिस मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अशफाक साहब ने पढी . मरहूम नई दिल्ली के ओखला के कब्रस्तान में अपनी अहलिया मर्हुमः के सरहाने दफन हैं. यह कब्रस्तान बटला हाउस के बिलकुल करीब है. न जाने ऐसा क्यूँ हुआ कि उन्हें अपने आबाई वतन में दफन नहीं किया गया और मुसलमानों के इस मुश्तरका कब्रस्तान में गुमनामी के हवाले कर दिया गया जहाँ कोई शमा रौशन करने वाला भी नहीं है, फातेहा पढना तो दूर की बात है . यह इतनी बड़ी शख्सियत के साथ सितम ज़रीफी नहीं है तो क्या है! अल्लाह तआला मरहूम को जवारे आइम्मा में जगह दे. आप भी उन्हें एक सुरह फातेहा से बख्श दें, क्यूँ की अब वोह आप के मोहताज हैं. मौत सब से बड़ी इबरत है अगर लेने वाला ले सके .
नीचे की तस्वीर उनके कब्र की है जिस पर अभी कोई निशान नहीं है.
नीचे की तस्वीर उनके कब्र की है जिस पर अभी कोई निशान नहीं है.
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23 जुलाई 2010
मरहूम साकिब रिजवी का चेहलुम
मरहूम साकिब रिजवी का चेहलुम रविवार २५ जुलाई को होगा जिसमें मौलाना मिर्ज़ा मोहम्मद अतहर साहब जाकरी करेंगे. यह मजलिस सुबह ११ बजे रिज़वी कॉलेज बंदर में होगी.
17 जुलाई 2010
हज़रत अब्बास (अ.स.) की विलादत मुबारक
आज ४ शाबान हैं. हज़रत अब्बास (अ.स.) की विलादत का दिन. आप सब लोगों को मुबारकबाद पेश करते हैं . अल्लाह उन हज़रत के सदके में हम को भी बा वफा बना दे. जिस तरह हज़रत अब्बास (अ.स.) ने कर्बला में अपने वक़्त के इमाम पर अपनी जान दे दी उसी तरह हम भी अपने ज़माने के इमाम की खिदमत कर सकें.
अगर हम अपने माँ बाप भाई बहेन से वफ़ा करेंगे तब हम अपने वक़्त के इमाम से वफादारी कर सकेंगे.
अगर हम अपने माँ बाप भाई बहेन से वफ़ा करेंगे तब हम अपने वक़्त के इमाम से वफादारी कर सकेंगे.
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