17 अक्टूबर 2013
15 अक्टूबर 2013
14 अक्टूबर 2013
क्या हज एक पिकनिक हो गया है?
भांजा: मामूजन, सऊदी अरब के जीज़ान शहर के पेश इमाम ने हज को एक पिकनिक ( picnic ) से ताबीर किया है . उन्होंने यह क्यों कहा ?
मामूनजान : बेटा आजकल हज पिकनिक की तरह ही होता जा रहा है . विमान से 5 घंटे में मीकात पहुंचे , एहराम बांधकर बस में बैठे, मक्का पहुंच गए .
आलीशान होटल में रहने , सुंदर और AC बसों में यात्रा , अच्छे प्रकार के खाने , अराफात से मिनी air condition ट्रेन में मिना पहुंचे , चौड़े चौड़े तीन शैतान को कंकरी मारी ( पहले तीन स्तंभ थे जिन पर निशाना लगाना आसान नहीं था , लेकिन अब तकरीबन चालीस फिट चौड़ी दीवार है ) बेहतरीन किस्म के खेमे जिसमें उच्च प्रकार के कालीन बिछे हुए और barbeque में लगे सीख कबाब और मुर्गी प्रदर्शन , ताज़ा और शुद्ध पानी की व्यवस्था , विश्व प्रसिद्ध ' फास्ट फूड ' होटल , नरम तकिया ,आरामदेह बिस्तर , उठते बैठते सुविधाएं. यह सब picnic के लक्षण नहीं तो और क्या है?
असली हज कहां गया ? लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक क्यों ? बलिदान का मतलब क्या है? सफा और मारवाह को अल्लाह की निशानी क्यों कहा गया है ? प्रयास का मतलब क्या है ? तवाफ़ क्यों किया जाता है ? हजरे असवद क्या याद दिलाता है ? मकामे इब्राहीम क्यों है ? मुस्तजार का इतिहास क्या है? हिज्र इस्माइल में कितने अम्बिया दफन हैं ? मिजाबे रहमत के नीचे प्रार्थना मांगने की पुण्य क्या है?
इन सब बातों से हाजियों की बहुमत ना वाकिफ है ...... ज़रा सी तकलीफ़ से हाजी को हालते इह्राम में गुस्सा आ जाता है .
हाजी यह भूल जाता है यह वही अल्लाह का घर है जिसका तवाफ़ अम्बिया ने किया, उनके औसिया ने बजा लाया , इस्लाम के बुज़ुर्ग ओलमा ने उसका चक्कर लगाया.
हज में जितनी तकलीफ हो उतना ही सवाब है. हज पर एक दिरहम खर्च करना हजार दिरहम के बराबर है. अराफात में ठहेरने से वह पापों से मुक्त हो जाता है.
रसूल (स.) के नवासे इमाम हसन अलैहिस्सलाम ने 25 / हज मदीना से मक्का पैदल किया था.
इसमें कोई शक नहीं कि बहुतों के लिए अब हज 'पिकनिक' हो चुका है, लोग सिर्फ 'हाजी' का लेबल ले कर वहाँ से वापस आते हैं.
मामूनजान : बेटा आजकल हज पिकनिक की तरह ही होता जा रहा है . विमान से 5 घंटे में मीकात पहुंचे , एहराम बांधकर बस में बैठे, मक्का पहुंच गए .
आलीशान होटल में रहने , सुंदर और AC बसों में यात्रा , अच्छे प्रकार के खाने , अराफात से मिनी air condition ट्रेन में मिना पहुंचे , चौड़े चौड़े तीन शैतान को कंकरी मारी ( पहले तीन स्तंभ थे जिन पर निशाना लगाना आसान नहीं था , लेकिन अब तकरीबन चालीस फिट चौड़ी दीवार है ) बेहतरीन किस्म के खेमे जिसमें उच्च प्रकार के कालीन बिछे हुए और barbeque में लगे सीख कबाब और मुर्गी प्रदर्शन , ताज़ा और शुद्ध पानी की व्यवस्था , विश्व प्रसिद्ध ' फास्ट फूड ' होटल , नरम तकिया ,आरामदेह बिस्तर , उठते बैठते सुविधाएं. यह सब picnic के लक्षण नहीं तो और क्या है?
असली हज कहां गया ? लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक क्यों ? बलिदान का मतलब क्या है? सफा और मारवाह को अल्लाह की निशानी क्यों कहा गया है ? प्रयास का मतलब क्या है ? तवाफ़ क्यों किया जाता है ? हजरे असवद क्या याद दिलाता है ? मकामे इब्राहीम क्यों है ? मुस्तजार का इतिहास क्या है? हिज्र इस्माइल में कितने अम्बिया दफन हैं ? मिजाबे रहमत के नीचे प्रार्थना मांगने की पुण्य क्या है?
इन सब बातों से हाजियों की बहुमत ना वाकिफ है ...... ज़रा सी तकलीफ़ से हाजी को हालते इह्राम में गुस्सा आ जाता है .
हाजी यह भूल जाता है यह वही अल्लाह का घर है जिसका तवाफ़ अम्बिया ने किया, उनके औसिया ने बजा लाया , इस्लाम के बुज़ुर्ग ओलमा ने उसका चक्कर लगाया.
हज में जितनी तकलीफ हो उतना ही सवाब है. हज पर एक दिरहम खर्च करना हजार दिरहम के बराबर है. अराफात में ठहेरने से वह पापों से मुक्त हो जाता है.
रसूल (स.) के नवासे इमाम हसन अलैहिस्सलाम ने 25 / हज मदीना से मक्का पैदल किया था.
इसमें कोई शक नहीं कि बहुतों के लिए अब हज 'पिकनिक' हो चुका है, लोग सिर्फ 'हाजी' का लेबल ले कर वहाँ से वापस आते हैं.
13 अक्टूबर 2013
अरब लीग और जंग बंदी
लेबल:
arab league,
israel,
mamuja,
my karari,
saudi arabia,
syria
12 अक्टूबर 2013
दुआ का कुबूल होना
पैग़म्बरे इस्लाम (स. अ.) ने फ़रमाया:
या अली! ख़ुदा वनदे आलम ऐसे आदमी की दुआ को जो ज़बान से तो निकले ,दिल उस से ग़ाफिल हो, कोबूल नहीं करता।
या अली! ख़ुदा वनदे आलम ऐसे आदमी की दुआ को जो ज़बान से तो निकले ,दिल उस से ग़ाफिल हो, कोबूल नहीं करता।
11 अक्टूबर 2013
खेल या तेजारत और सियासत
करारी में जश्ने अबू तालिब का छटा साल
06 अक्टूबर 2013
25 सितंबर 2013
24 सितंबर 2013
"लईम " किसे कहते हैं?
भांजा: मामूजान "लईम " किसे कहते हैं?
मामूजान: समाज में ऐसे लोग भी होते हैं जो अपनी ज़िन्दगी दौलत कमाने में सर्फ़ कर देते हैं, हलाल और हराम जारिए का ख्याल भी नहीं करते हैं. ऐसे अफराद अपनी कमाई में से कोई हिस्सा ज़रुरत मंदों में तकसीम नहीं करते बल्कि सिर्फ अपने और अपने घर वालों पर खर्च करते हैं, ऐसे अफराद को "बखील"यानी कंजूस कहा जाता है.
और एक तबका मोआशरे में ऐसा होता है जो दौलत इकठ्ठा करता है इन्फाक नहीं करता न अपने और न अपने घर वालों पर खर्च करता है इस शख्स को "लईम" कहते हैं,
दौलत होते हुवे भी वोह बद हाल रहता है और दूसरों से अपनी ज़रूरीयात की तवक़्क़ो रखता है..
मामूजान: समाज में ऐसे लोग भी होते हैं जो अपनी ज़िन्दगी दौलत कमाने में सर्फ़ कर देते हैं, हलाल और हराम जारिए का ख्याल भी नहीं करते हैं. ऐसे अफराद अपनी कमाई में से कोई हिस्सा ज़रुरत मंदों में तकसीम नहीं करते बल्कि सिर्फ अपने और अपने घर वालों पर खर्च करते हैं, ऐसे अफराद को "बखील"यानी कंजूस कहा जाता है.
और एक तबका मोआशरे में ऐसा होता है जो दौलत इकठ्ठा करता है इन्फाक नहीं करता न अपने और न अपने घर वालों पर खर्च करता है इस शख्स को "लईम" कहते हैं,
दौलत होते हुवे भी वोह बद हाल रहता है और दूसरों से अपनी ज़रूरीयात की तवक़्क़ो रखता है..
23 सितंबर 2013
तबाही और बर्बादी
22 सितंबर 2013
समर हसन की जानिब से मुम्बरा में तशक्कुर की महफ़िल
कल रात मुम्बरा में समर हसन रिज़वी ने अपने फरजंद अरमान रिज़वी के शिफ़ा याब होने पर एक महफ़िल का इनेक़ाद किया।
नमाज़े मग़रिब के बाद इस मुख़्तसर से प्रोग्राम में हलचल आज़मी और मोहसिन जैदी साहेबान ने अपना कलाम पढ़ा और मौलाना एहसान हैदर साहब ने तक़रीर की.
सोहाना कंपाउंड की मस्जिद में हुवे इस प्रोग्राम का इफ्तेताह खुद समर हसन ने किया।
आज इसी सोहाना में एक मजलिसे तरहीम बाद नमाज़े मग़रिब रखी गई जिसमें मौलाना मुन्तसिर साहब (मोहसिन) खिताबत फ़रमाएंगे।
यह मजलिस समर हसन की मरहूमा वालेदा के ईसाले सवाब के लिए है.
नमाज़े मग़रिब के बाद इस मुख़्तसर से प्रोग्राम में हलचल आज़मी और मोहसिन जैदी साहेबान ने अपना कलाम पढ़ा और मौलाना एहसान हैदर साहब ने तक़रीर की.
सोहाना कंपाउंड की मस्जिद में हुवे इस प्रोग्राम का इफ्तेताह खुद समर हसन ने किया।
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| समर हसन अपना कलाम पेश करते हुए |
यह मजलिस समर हसन की मरहूमा वालेदा के ईसाले सवाब के लिए है.
21 सितंबर 2013
मुसलमानों की टोपी
20 सितंबर 2013
केसन, कुछ यादें
वादिस सलाम, करारी में मरहूम केसन 2007 सोज़ पढ़ते हुए।
18 सितंबर 2013
आबिद रज़ा की मुबारकबाद
17 सितंबर 2013
इमाम रेज़ा (अ.स.) की विलादत मुबारक हो
आप सभी लोगों की ख़िदमत में आठवें इमाम, हज़रत अली रेज़ा की विलादत पर मुबारकबाद।
27 अगस्त 2013
24 अगस्त 2013
16 अगस्त 2013
15 अगस्त 2013
29 जुलाई 2013
17 जुलाई 2013
मुंबई के जैनाबिया इमाम बाड़े में मजलिसे तरहीम
मंगल 16 जुलाई को ज़ेनाबिया इमामबाड़े में मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करारवी की 17 वीं बरसी पर मजलिसे अज़ा इनेक़ाद किया गया था।
तिलावते कुरआन मजीद की तिलावत शमीम करारवी ने की, सोज़ ख्वानी नय्यर जौनपुरी ने की और मोमिनीन को हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हसनैन ने खिताब किया।
मजलिस के बाद इफ्तार का भी इंतज़ाम था। मुंबई के कोने कोने से दोस्त, अहबाब, अज़ीज़ो अकारिब ने शिरकत की।
तिलावते कुरआन मजीद की तिलावत शमीम करारवी ने की, सोज़ ख्वानी नय्यर जौनपुरी ने की और मोमिनीन को हुज्जतुल इस्लाम मौलाना हसनैन ने खिताब किया।
मजलिस के बाद इफ्तार का भी इंतज़ाम था। मुंबई के कोने कोने से दोस्त, अहबाब, अज़ीज़ो अकारिब ने शिरकत की।
| शमीम क़ुरआन की तिलावत करते हुए |
12 जुलाई 2013
03 जुलाई 2013
21 जून 2013
मरहूम हसन अशरफ (प्यारे रज़ा) का बीसवां
कल रात मरहूम हसन अशरफ इब्ने अज़हर हसन (जो की करारी में प्यारे रज़ा के नाम से जाने जाते थे) के बीसवें की मजलिस उनके दौलत खाने पर हुई। जिसमें मौलाना अब्बास आलम साहब ने खिताबत फरमाई। मजलिस के बाद माहिर ने एक छोटा सा नौहा भी पढ़ा।
मरहूम का इन्तेक़ाल 6 जून को हरकते क़ल्ब बंद हो जाने की वजह से हुआ था।
इंशा अल्लाह 7 जुलाई को रिज़वी कॉलेज बांद्रा में सुबह 11 बजे मरहूम का चेहलुम है।
| मौलाना अब्बास आलम साहब मजलिस पढ़ते हुए |
लेबल:
azhar hasan,
chehlum majlis,
hasan ashraf,
karari
20 जून 2013
18 जून 2013
17 जून 2013
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