गुज़िश्ता बुध, 29 रबीउल अव्वल को मरहूम सय्यद मंज़ूर हसन रिज़वी इब्ने सय्यद अख्तर हुसैन की 21 वीं बरसी थी. इसी मुनासेबत से मीरा रोड ग़रीब खाने पर फातेहा का इंतज़ाम था.
कबाब, ज़र्दा, गोश्त, पुलाव, रोटी, फल वगैरा दस्तरख्वान पर चुना गया था.
मरहुमीन का बड़ा एहसान होता है की वोह अपनी सालाना याद के साथ अच्छे अच्छे पकवान बनवाते हैं जिन् से हम अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ सैर होते हैं और उन गुज़श्तागान को सुरह फातेहा हदया करते हैं जिसकी वजह से उनके उखरवी दरजात में इजाफा होता है.
अल्लाह सुबहानाहू व ताआला हमारे नाना मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे, यकीनन वोह जवारे अहलेबैत (अ.स.) में होंगे क्यूंकि वो खुदा तर्स और इबादत गुज़ार मोहिब्बे आले रसूल (स.अ.) थे.
आप लोगों से भी गुज़ारिश है की मरहूम को सुरह फातेहा से याद करें.
कबाब, ज़र्दा, गोश्त, पुलाव, रोटी, फल वगैरा दस्तरख्वान पर चुना गया था.
मरहुमीन का बड़ा एहसान होता है की वोह अपनी सालाना याद के साथ अच्छे अच्छे पकवान बनवाते हैं जिन् से हम अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ सैर होते हैं और उन गुज़श्तागान को सुरह फातेहा हदया करते हैं जिसकी वजह से उनके उखरवी दरजात में इजाफा होता है.
अल्लाह सुबहानाहू व ताआला हमारे नाना मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे, यकीनन वोह जवारे अहलेबैत (अ.स.) में होंगे क्यूंकि वो खुदा तर्स और इबादत गुज़ार मोहिब्बे आले रसूल (स.अ.) थे.
आप लोगों से भी गुज़ारिश है की मरहूम को सुरह फातेहा से याद करें.
![]() |
| Pencil sketch of marhum Manzoor Hasan Rizvi |

















