16 जून 2011

अशरफ भाई के घर निआज़

आज 13 रजब , हज़रात अली (अ.स.) की  विलाद के मौके पर बम्बई के अलग अलग इलाकों में मौला अली के चाहने वालों ने अपने घरों में नज्र  का एहतिमाम किया जिसे कूंडा भी कहा जाता है. अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को दावत दी. नज्र में खीर, मिठाई, पूड़ियाँ, चना बटाटा, दही वडा, मीठी टिकया और सालन चावल रखा गया.
 बांद्र इलाके में बब्बन मामूं (मरहूम याकूब हसन रिज़वी) के घर और सान्ताक्रुज़ में अशरफ भाई के घर नज्र चखने के लिए गए थे. तमाम चीज़ें खुश जाएका थीं. 
बांए तरफ वामिक और दाईं तरफ अशरफ भाई नज्र करने के बाद चखते हुए.

14 जून 2011

अल्लामाह जीशान हैदर जवादी (ताबा सराह)

यह तवीर मरहूम के चेहलुम के मौके पैर बनाई थी. इसे इलाहाबाद में स्टेज पर लगाया गया था. 

11 जून 2011

मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी

कल 9 रजब को हमारे दादा मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी है. मरहूम का इन्तेकाल 1985 में तकरीबन 95 साल की उम्र में करारी में हुआ था. मरहूम इलाहाबाद और करारी परगना के अतराफ में अपने दौर के जाने माने मर्सिया खाँ थे. अक्रबा परवरी की एक मिसाल से. 
कर्बला की जियारत का भी शरफ हासिल किया था. उनके दौर में इमाम हुसैन (अ.स.) की जियारत के लिए जाना नहीं था, पानी के जहाज़ से बसरा (इराक) सफ़र किया जाता था और वहां से रेल से कर्बला जाना पड़ता था. 
अल्लाह तआला मरहूम का शुमार अहलेबैत (अ.स.) के चाहने वालों में करे. एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.
मरहूम अमीर अली की 26 वीं बरसी पर बम्बई में उनकी तीसरी, चौथी और पांचवीं नस्ल फातेहा देते हुए.

मरहूम सय्यद मंज़ूर तकवी (कज्जन) की पहली बरसी

आज करारी जामे मस्जिद में नमाज़े ज़ोह्र से पहले मरहूम सय्यद मंज़ूर तकवी उर्फ़ कज्जन,की पहली बरसी की मजलिस हुई जिसे प्रोफ़ेसर अबुल कासिम साहब ने ख़िताब किया. मरहूम का गुज़िश्ता साल कानपूर में इन्तेकाल हुआ और उनकी तद्फीन करारी में हुई. बरसी की मजलिस में तमाम बेटे और दामाद शरीक थे. मरहूम ने अपनी हयात के आखरी साल का हज अदा किया और मुहर्रम में हर मजलिस में मौजूद रहते थे.

09 जून 2011

मरहूम साकिब रिज़वी की पहली बरसी

मरहूम साकिब रिज़वी की पहली बरसी, रविवार (इतवार), 12 जून रिज़वी कालिज बांद्रा में मुनाकिद होगी.
सुबह 11 बजे कुरआन खानी के बाद जनाब मीर नज़ीर बाक़री साहब पेश्खानी करेंगे और उसके बाद मौलाना सय्यद ज़हीर अब्बास साहब खेताबत फर्माएंगे. आप से शिरकत की दरख्वास्त है. अगर मुमकिन न हो तो एक सुरह फातेहा से मरहूम को याद कर लें.

अग्यओना गाव का एक जवान

करारी से क़रीब अग्यओना गाव के एक जवान, जनाब शजरुल तकवी. आप बम्बई शहर में रहते हैं. बहुत नेक और दिलचस्प शख्सियत हैं. अल्लाह इन्हें तरक्की दे, क्यूंकि यह मेहनतकश और इमानदार हैं. अगर अच्छी नौकरी मिल जाए तो शजरुल GULF जाने के लिए भी तैयार हैं. आज के दौर में ऐसे जवान कम ही दस्तयाब हैं. इन्हें आप Facebook  पर  भी देख सकते हैं. Shajrul Taqvi.
   

08 जून 2011

तन्जीमुल मकतिब के एक और अहेम रुक्न का इस्तीफा

अलहाज मौलाना मोहम्मद अली आसिफ साहब ने तन्जीमुल मकातिब से इस्तीफा दिया. इस की मोकम्मल रिपोर्ट उर्दू में पेश है. इसे क्लिक करके download करें.

07 जून 2011

पह्चानिए, कौन?

यह साहब करारी के पास अमुरा गाव से ताल्लुक़ रखते हैं.
 

24 मई 2011

विलादते जनाबे फातेमा ज़हरा मुबारक

तज़किरा  फ़ातेमा  ज़हरा  का  ज़रा  हो  जाए 
क्या  हकीकत  है  ज़माने  को  बयां  हो  जाए
उस  से  अल्लाहो -नबी  हो  नहीं  सकते  राज़ी
जिस  से  शेह्ज़ादिए-कौनेन  ख़फा  हो  जाए 

21 मई 2011

सय्यद सफी हैदर इन्तेकाल कर गए


आज शाम करेली, इलाहाबाद में सय्यद सफी हैदर रिज़वी ने इस दुनियाए फानी को खैरबाद कहा और अबदी दुनिया  को कूच किया. मरहूम 80 साल से ज्यादा जिए. आप का ताल्लुक करारी से मिला हुआ गाँव अग्योना था. मरहूम ने  शरीके हयात के साथ साथ दो लड़कियां और एक फरजंद को दाग़े मुफारेक़त दिया. अल्लाह उनके पस्मान्दगान को सब्र अता करे. 
सफी हैदर साहब ने बहुत ही सादा ज़िन्दगी गुज़ारी. एक मुद्दत से बीमार रहने के बाद आज दाइए अजल को लब्बैक कहा. इलाहबाद शहर के दर्याबाद के कब्रस्तान में कल इंशा अल्लाह सुबह नौ बजे तद्फीन होगी.
आप से एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है. 

19 मई 2011

हवाई जहाज़ का सस्ता किराया और मुश्किल सफ़र


ज़ियारत के लिए आमादा होने पर इस बात का ख़याल रहे की सफ़र की परेशानियां सामने आएंगी. लोग  लम्बी दूरी के सफ़र से  घबरा जाते हैं. 
बम्बई या देहली से शाम पहुंचना काफी थका देने वाला सफ़र होता है. अगर सउदी एरलाईन्स से टिकट है तो खाने पीने की परेशानी न होगी, लेकिन अगर सस्ती एरलाईन्स, अल अरेबिया से जाना है तो बहुत दिक्कत पेश आती है. क्यूंकि अल अरेबिया का  सस्ता टिकट होने की वजह से जहाज़ में नाश्ता और खाना नहीं दिया जाता. यहाँ तक की जहाज़ में पानी भी खरीद कर पीना पड़ता है. एक बोतल पानी 40 रूपए में. देह्शत्गर्दों के डर से मुसाफिर को जहाज़ में अपने साथ पानी ले जाने की भी इजाज़त नहीं है.
अगर हवाई जहाज़ किसी वजह से ताखीर से आए या जाए तो मुसाफिर को या तो भूका रहना पड़ेगा या फिर महंगा खाना पीना खरीदना पड़ेगा. यह दिक्क़तें न आएं अगर जहाज़ दिल्ली या बम्बई से सीधा शाम पहुंचे. लेकिन ऐसी कोई परवाज़ नहीं है. उम्मुल मसाएब, जनाबे जैनब (अ.स.) की ज़ियारत करने जा रहे हैं तो परेशानियों से घबराना कैसा?  

18 मई 2011

बम्बई से शाम के लिए रवानगी

होटल बिनाए कासिम में
 खलीज की सब से अच्छी हवाई सेवा सउदी एरलाइन्स की मानी जाती है. लेकिन शाम (सिरिया) जाने के लिए कोई सीधी परवाज़ नहीं है. बम्बई से रियाज़ और रियाज़ से दमिश्क जाना पड़ता है. रियाज़ में 4 घंटा हवाई अड्डे पर इंतज़ार कर के कुल नौ घंटे में आप बम्बई से दमिश्क पहुँच जायेंगे.
इत्तेफाक से सउदी अरब के मदीना और दीगर शहरों में रेतीले तूफ़ान की वजह से 15 अप्रैल को सुबह 7 बजे बम्बई हवाई अड्डे से उड़ने वाला जहाज़ 18 घंटे देर से उड़ा. रियाज़ हवाई अड्डे पर 10 घंटे कियाम करने के बाद हम लोग दमिश्क शाम 7 बजे पहुंचे और  सय्यदः  जैनब शहर के होटल "बिनाए कासिम" में रात 9 बजे सामान रखा. होटल जनाबे ज़ैनब के रौज़े के पिछवाड़े ही था. चूँकि रौज़ा रात 10 बजे बंद हो जाता है इस लिए हम लोग खा पीकर सो गए और जियारत दुसरे रोज़ पर टाल दी. इस ताखीर से हमारा एक दिन ज़ाए हुआ.

17 मई 2011

वतन वापसी

नजफ़ में रौज़ाए हज़रत अमीरुल मोमिनीन (अ.स.)
  शाम, ईराक और ईरान की ज़ियारात अपने इख्तिताम पर आई. 28 दिनों का यह टूर निहाएत ही कामयाब रहा. तीनो ममालिक में मौसम बहुत ही शानदार था. अप्रैल के दुसरे हफ्ते से मई के दुसरे हफ्ते में मौसम बहुत ही प्यारा रहता है, वरना मई के तीसरे हफ्ते से गर्मी शुरू हो जाती है. मौसम से परेशानी का एहसास खुसूसन ईराक में होता है. वहाँ बिजली हर दो घंटे के बाद चार घंटे गाएब रहती है, इस तरह 24 घंटों में सिर्फ 8  घंटा बिजली की सप्लाई रहती है. अक्सर होटल बिजली आने पर ही AC चलाते हैं, वरना जेनेरटर के ज़रिए सिर्फ पंखा चल सकता है. 
यह मसअला पूरे ईराक में है. हम लोगों ने जब सरज़मीने नजफ़ पर क़दम रखा तो मग़रिब की अज़ान होने वाली थी और उस वक़्त बिजली नहीं थी.  पूरा शहर जेनेरटर की आवाज़ से गूँज रहा था. चार बरसों में नजफ़ काफी तब्दील हो चुका था. सिकुरिटी बहुत सख्त थी. हालात को देखते हुए ज़रूरी भी था. शारे रसूल पर होटल शिक़ाकुल ईमान में तीन रोज़ कियाम करना था. यह होटल उसी सड़क पर वाके है जहां अयातुल्लाह सीस्तानी साहब का दफ्तर है. 
शाम से तकरीबन 30 घंटे के बस के सफ़र के बाद हिम्मत नहीं हुई की उसी शब् अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) के रौज़े पर हाजरी देते. रात के 11 बज रहे थे और रौज़ा 12 बजे बंद हो जाता है.

21 अप्रैल 2011

शाम में मौजूद हैं

  सीरिया  में आज पांचवां और आखरी दिन है. मौसम अच्छा है मगर हालात ठीक नहीं हैं. जोर्डन की सरहद पैर बसे शहरों में वहाबियों ने फसाद  फैला रखा है. सय्येदा जैनब  जहाँ जनाबे जैनब का रौज़ा है वहां फिल वक़्त हालात बेहतर हैं. हमारा काफ़ला हर जगह जियारत के लिए जा सका. हज़रात हाबील की कब्र, असहाबे कहेफ से मंसूब ग़ार, सुकैना बीनते अली इब्ने अबी तालिब का रौज़ा,  हज़रत रोक़य्या, दरबारे शाम. वगैरा, आज कर्बला के लिए रवाना होंगे. इंशा अल्लाह.  करारी के ओलामा से मुलाक़ात हुई. अग्यौना के मोहम्मद काजिम , करारी के रेहान, लहना के मौलाना. वगैरा. सब बहुत खुश हुए और अहले वतन की खिअरियत दरयाफ्त करने लगे.

15 अप्रैल 2011

आज जियारत के काफले की रवानगी

आज हम लोगों को दमिश्क (शाम) रवाना होना था, लेकिन सउदी अरब में खतरनाक ओलाबारी से परवाज़ मुंबई न पहुँच सकी और जहाज़ अपने वक़्त पर रवाना न हो सका. ज़ाएरीन को जनाबे ज़ैनब के रौज़े पर पहुँचने के लिए बेचैन हैं. अल्लाह उनकी तमन्ना पूरी करे.

29 मार्च 2011

महफिले सक्काए सकीना में मजलिस

गुज़िश्ता इतवार 27 मार्च को मीरा रोड मुंबई में मरहूम एहसान फातेमा का चेहलुम मुनाकिद हुआ जिस में मौलाना सय्यद हसनैन करारवी ने खेताबत फ़रमाई. यह मजलिस महफिले सक्काए सकीना में थी.
नीचे विडियो में उस मजलिस का एक हिस्सा दिखाया गया है.

26 मार्च 2011

बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम

 यह तस्वीरें करारी में बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम की हैं. गुज़िश्ता मुहर्रम (1432 ) 2010 में इस कब्रस्तान में 12 मुहर्रम को मौलाना रज़ा हैदर साहब ने मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के कब्र के सरहाने मजलिस पढ़ी थी .

22 मार्च 2011

मरहूम मौलाना हैदर महदी साहब का चेहलुम


"तनजीमुल मकातिब के इख्तेलाफात का पहला शिकार?"  हुसैन भाई अपनी डाएरी  में शाएद यही दर्ज कर रहे हैं.
मरहूम मौलाना हैदर महदी साहब  के चेहलुम पर ली गई मज़ीद तस्वीरों को देखने के लिए click करें 

21 मार्च 2011

मजलिसे चेहलुम

मरहूमा सय्यादा एहसान फातेमा बिन्ते  सय्यद अफसर हुसैन   का चेहलुम 27 मार्च को मुंबई के मीरा रोड में महफिले सक्काए सकीना, सुपर मार्किट के करीब,  में मुनाकिद होगा जिसमें मौलाना सय्यद हसनैन रिज़वी करार्वी खिताबत फ़रमाएंगे. सुब्ह 10 बजे कुरआन ख्वानी होगी और 11 बजे मजलिसे अज़ा होगी. आप लोगों की शिरकत ग़मज़दा अहले खाना के तसकीने क़ल्ब का बाइस होगी.
औरतों के लिए मजलिस में अलग से इंतज़ाम होगा.
सोगवार: सय्यद ऐनुल अब्बास. फोन: 9819168455   

18 मार्च 2011

रज़ा रिज़वी (शीलू) की वालेदा की बरसी की मजलिस

मरहूमा  सय्यदा हुसैन फ़ातेमा बिन्ते मरहूम सय्यद नफीसुल हसन (भुग्गी बाबा) की बरसी की मजलिस कल  इलाहाबाद में काजी जी की मस्जिद में नमाज़े मग्रबैन की नमाज़ के बाद हुई. मरहूमा के दो फरजंद हैं. शीलू (रज़ा रिज़वी ) और जिया रिज़वी (शेरू). मरहूमा के ईसाले सवाब के लिए एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.

14 मार्च 2011

उमरह रवानगी

Hajare Aswad, Hajj 2009
मरहूम बेच्चन बाबा के फ़रज़न्द मौलाना मोहम्मद अख्तर रिज़वी मए कहारी और मए पिसरान आज सुबह उमरह करने के लिए बम्बई से जद्दाह के लिए रवाना हो गए. दो हफ़्तों का यह टूर मदीना और मक्काह का है. अल्लाह तआला इनकी ज़ियारात और उमरह को कामयाब करे.
तकरीबन दो बरसों से उमरह बजा लाने का रुझान मोमिनीन के दरमियान में इजाफा हुआ है. ख़ास तौर पर मार्च और अप्रैल के महीनों में. इस मौसम में सिर्फ 35 हज़ार रोप्यों में उमरह मोकम्मल हो जाता है. जब की हज्ज अदा करने के लिए एक लाख सत्तर हज़ार का खर्च बैठता है. खोदा तमाम हज्ज, उमरह और जियारत की तमन्ना रखने वालों को मुशर्रफ करे. आमीन.  

08 मार्च 2011

शाम-ईराक-ईरान की ज़ियारात

शाम-ईराक-ईरान की ज़ियारात.
काफ्ला 14 अप्रैल को रवाना होगा.
सिर्फ 55,000 /- . कुल 28 दिन.
राबता करें: 09920276708 

05 मार्च 2011

मरहूम असग़र अब्बास के ईसाले सवाब की मजलिस

आज मुंबई के कुर्ला के नज़र अली इमामबाड़े में मरहूम असग़र अब्बास (छोक्कन भाई) के ईसाले सवाब के लिए मजलिसे अजा का इनेकाद बाद नमाज़े मग़रिब किया  गया है. मरहूम का इन्तेकाल 2 मार्च 2011 को हुआ था. इस मजलिस को मौलाना सय्यद हसनैन करार्वी खेताब करेंगे.
आप लोगों से शिरकत की  गुज़ारिश है. मज़ीद मालूमात के लिए पापा (ज़फर) से राबता इस नं 9969425157 पर किया जा सकता है. 

04 मार्च 2011

मरहूम मंज़ूर हसन रिज़वी की बीसवीं बरसी

मरहूम मंज़ूर हसन रिज़वी इब्ने अख्तर हुसैन की कल 29 रबीउल अव्वल को बीसवीं बरसी है. मरहूम हमारे नाना थे. उनके 6 बेटे और 5 बेटियाँ थीं जिसमें 4 फरजंद और 3 दुखतर हयात हैं. सबसे बड़े फरजंद मरहूम महमूद सरोश 13 साल पहले इन्तेकाल कर गए, वोह एक जाने माने शाएर थे. उनसे छोटे याकूब हसन रिज़वी तकरीबन 24 साल पहले  सड़क हादसे का शिकार हो गए थे. 
डाक्टर अख्तर हसन रिज़वी उनके पांचवें फरजंद हैं जिनका शुमार मुल्क के मशहूर बिल्डर माने जाते हैं. साथ ही उनहूँ ने तालीमी मैदान में खिदमात अंजाम देकर अपना और अपने वालेदैन का नाम रोशन किया है. जौनपुर का कालिज, बम्बई में रिज़वी कॉलेज और करारी में एक बहुत ही बड़ा कॉलेज उनकी ही काविशों का नतीएजा है. 
मरहूम मंज़ूर हसन रिज़वी ने अपनी ज़िन्दगी का एक बड़ा हिस्सा बम्बई में गुज़ारा और रिटायर होने के बाद करारी में रहने लगे. बागबानी का बहुत शौक़ था. पेड़ पौदों से दिलचस्पी थी. अमरुद और आम के बाग़ में बराबर हाजरी देते. 
अपनी सेहत का ख्याल रखते, तकरीबन सौ साल जिए लेकिन कमर नहीं झुकी. तबियत ज़रा सी नासाज़ होती तो खाने पर रोक लगा देते. पेट खराब होने न देते और रोज़ नहार मुंह 'निम्कौरी' फांकते थे.
हर नमाज़ का खात्मा अपनी औलाद के लिए बा आवाज़ बुलंद देर तक दुआ करते, हर  एक बेटा बेटी का नाम लेले कर दुआ करते. 
शाएर अकबर इलाहाबादी के अशआर ज़बानी याद थे और हमेशा उन्हें पढ़ा करते थे. हाफेज़ा तेज़ था, सिर्फ बीनाई  ज़रा कमज़ोर हो गई थी. कभी परेशान दिखाई नहीं दिए. हर हाल में मूतमइन नज़र आते. 
अल्लाह ताआला उनके दरजात में बुलंदी अता करे. एक सूरा फातेहा से मरहूम को नवाज़ने की गुजारिश है.

03 मार्च 2011

आज तालाब्पर में छोक्कन भाई सिपुर्दे ख़ाक

असगर अब्बास ( छोक्कन ) इब्ने ज़व्वार हुसैन का कल 11 .00 बजे दिन में इलाहबाद के अस्पताल में इन्तेकाल हो गया था. आज तकरीबन 11 .00 बजे दिन में तालाब्पर में उनकी तद्फीन हो गई. मरहूम के दो फ़रज़न्द हैं. छोक्कन भाई बहुत ही खुश मिज़ाज थे. अक्सर मजालिस में सोज़ खानी किया करते थे. अल्लाह ताआला उन्हें जवारे मासूमीन में जगह अता करे. 
आप से सुरह फातेहा की दरख्वास्त है. और साथ ही मगरिब की नमाज़ के बाद नमाज़े वहशत पढना न भूलें.