22 मार्च 2012

मस्जिदे क़ाज़ी में मजलिसे तरहीम

मरहूमा हुसैन फातेमा (हुसैना) बिन्ते मरहूम नफीसुल हसन के ईसाले सवाब के लिए मस्जिदे क़ाज़ी (इलाहाबाद) में आज नमाज़े मग्रेबैन के बाद मजलिसे तरहीम का इनेकाद किया गया है जिनका इन्तेकाल 25 ज़िलहज (21 मार्च 2001 ) को हुआ था.
मरहूमा ने 1997 में अपने वालिद, मरहूम नफीसुल हसन (जिन्हें हम लोग भुग्गी कह कर मुखातिब करते थे) के हमराह हज के फराएज अंजाम दिए थे. हमें याद है कि  उस साल हमारा पहला हज था और हमारी मुलाक़ात मरहूमा से सफा की पहाड़ी पर सई करते हुए हुई थी. हमारी वालेदाह भी साथ थीं.
मरहुमीन मुस्लिम टूर के काफिले के साथ आए थे जो मरहूम मौलाना ज़फर अब्बास की जेरे निगरानी में था.
अल्लाह तआला इन मरहुमीन के दरजात में बुलंदी अता करे. यह लोग बहुत नेक इंसान थे.
आप लोगों से सुरह फातेहा की गुज़ारिश है. 

साल गिरह मुबारक


हमारे मामूं जनाब युसूफ हसन रिज़वी को उनकी साल गिरह पर ढेर सारी मुबारकबाद. अल्लाह तआला उन्हें अच्छी सेहत और तूलानी उम्र अता करे. 

19 मार्च 2012

टमाटर सूप बनाने का तरीका

टमाटर का सूप बनाने के लिए सामान 
4 -5 बड़े टमाटर, ढाई कप दूध, 1 प्याज, 2 -3 कलि लहसुन (चाहें तो ), एक चौथाई छोटी चम्मच पीसी सफ़ेद मिर्च, डेढ़ छोटी चम्मच नमक, सजावट के लिए आधा कप अंकुरित मुंग व चनें|
सूप बनाने का तरीका

  • सबसे पहले टमाटर, कटी हुई प्याज, लहसुन, आदि को मिक्सी में बारीक बारीक कर पीस लें, पिसने के बाद इसे छान लें|

  • अब पतीले में आवश्यकतानुसार घी गरम करके इसमें दूध डालकर मिला दें तथा अच्छी तरह उबालकर नमक, मिर्च व अन्य सभी सामग्री डालें|

  • कुछ समय बाद पतीले को नीचे उतारकर इस पर उबले अंकुरित चनें व मुंग दाल दें|अब आपका स्वादिष्ट टमाटर का सूप तैयार है|

  • 05 मार्च 2012

    ज़बान वक्फ है बस मदहे अस्करी के लिए

    इमाम हसन अस्करी (अ.स.) की विलादत के मौके पर मीर हसन मीर की एक मंक़बत:


    न खुसरवी के लिए है न अफसरी के लिए
    ज़बान वक्फ है बस मदहे अस्करी के लिए

    अगर न मिलती इन्हें नूरे अस्करी की ज़कात
    तरसते चाँद सितारे भी रौशनी के लिए

    गिराया आप का रौज़ा जिन्हों ने ऐ मौला
    शिकार पहला बनेंगे वह आखिरी के लिए

    इमाम फिर से बुलाएं मुझे भी सामर्रा
    तरस रही है जबीं कब से बंदगी के लिए

    मेरे इमाम का हमसर वह कैसे लाते भला
    मिला न जब कोई क़मबर की हम्सरी के लिए

    यह बोले दार पे मीसम मैं कैसे रुक जाऊं 
    ज़बां मिली है मुझे सिर्फ अली अली के लिए

    अली को देख के बालिं पर मैं पुकारूँगा
    ऐ मेरी मौत ठहर जा तू दो घडी के लिए

    हमें यह फख्र के हम उन के दर के नौकर हैं
    फ़रिश्ते खुद जहाँ आते हैं नौकरी के लिए

    नबी की आल से टकराए क्या ज़रूरी है
    तरीके और भी राएज हैं ख़ुदकुशी के लिए

    अलम बराए सहबा था जंगे खैबर में
    अलिफ़ से सब के लिए ऍन से अली के लिए  

    04 मार्च 2012

    सरकार हैदर के मकान पर कसीदा की महफिल

    कल रात  पारा के  सरकार हैदर रिज़वी  के मकान पर इमाम  हसन अस्करी (अ.स.) के रोज़े विलादत के सिलसिले में एक  कसीदा  की महफिल का इनेकाद किया गया. यहाँ करारी से ताल्लुक रखने वाले मोमिनीन जमा हो गए. ग्यारहवें इमाम की शान में कसीदा और मन्क़बत पढ़ी गई. जिस में डाक्टर अब्बास आलम, तूसी, ज़हीरुल, ज़व्वार, जावेद रिज़वी, हसन इलाहाबादी और शमीम अब्बास ने हिस्सा लिया.
    आखिर में मौलाना एहसान हैदर जवादी ने एक मुख़्तसर सी तक़रीर करके प्रोग्राम का इख्तेताम किया.
    मुर्ग़ की लज़ीज़ बिरयानी से मोमिनीन ने लुत्फ़ उठाया.
    नीचे इसी महफ़िल के दो कलाम का विडियो है, देखिए और comment कीजिए.


    03 मार्च 2012

    अबू मोहम्मद, मुबारक हो


    अबू मोहम्मद साहब करारी की फ़अआल शख्सियतों में से एक है. दीन की गुफ्तगू हो या समाजी, आप पेश पेश रहते हैं. यही नहीं, बल्कि मजालिस की पेश्खानी अपने अनोखे और जोशीले अंदाज़ में मर्सिया पढ़ कर करते हैं. यह मरासी अक्सर तबलीगी और इन्क़लाबी होते हैं.
    आज करारी में उनके दौलतखाने पर बरात की आमद है. उनकी दोख्तर सदफ का अकद नजरुल महदी के हमराह होना है.
    My Karari की जानिब से उनको और उनके ख़ानदान को बहुत बहुत मुबारकबाद.

    25 फ़रवरी 2012

    मरहूम मुख़्तार की तद्फीन आज लहना में

    लहना गाँव के सूबा मियां के फरजंद जो दिल्ली में Bombay Mercantile Bank में मुलाज़मत करते थे आज इलाहबाद में उनका इन्तेकाल हो गया. मरहूम का नाम मुख़्तार था और वोह एक मुद्दत से बीमार थे.
    मरहूम की तद्फीन आज लहना में 4 बजे शाम को होगी. 
    आप से नमाज़े वहशत पढने की गुज़ारिश है. 

    24 फ़रवरी 2012

    मरहूम सय्यद मंज़ूर हसन की 21 वीं बरसी

     गुज़िश्ता बुध, 29  रबीउल अव्वल को मरहूम सय्यद मंज़ूर हसन रिज़वी इब्ने सय्यद अख्तर हुसैन की 21  वीं बरसी थी. इसी मुनासेबत से मीरा रोड ग़रीब खाने पर फातेहा का इंतज़ाम था. 
    कबाब, ज़र्दा, गोश्त, पुलाव, रोटी, फल वगैरा दस्तरख्वान पर चुना गया था. 
    मरहुमीन का बड़ा एहसान होता है की वोह अपनी सालाना याद के साथ अच्छे अच्छे पकवान बनवाते हैं जिन् से हम अपने करीबी रिश्तेदारों के साथ सैर होते हैं और उन गुज़श्तागान को सुरह फातेहा हदया करते हैं जिसकी वजह से उनके उखरवी दरजात में इजाफा होता है.
    अल्लाह सुबहानाहू व ताआला हमारे नाना मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे, यकीनन वोह जवारे अहलेबैत (अ.स.) में होंगे क्यूंकि वो खुदा तर्स और इबादत गुज़ार मोहिब्बे आले रसूल (स.अ.) थे.
    आप लोगों से भी गुज़ारिश है की मरहूम को सुरह फातेहा से याद करें. 
    Pencil sketch of marhum Manzoor Hasan Rizvi

    17 फ़रवरी 2012

    मरहूमा ज़मीर फातेमा की बरसी की मजलिस

    मरहूमा ज़मीर फातेमा बिन्ते हुसैन अब्बास की बरसी की मजलिस 19 फ़रवरी को मीरा रोड में होगी.
    मरहूमा का इन्तेकाल गुज़िश्ता साल 21 रबीउल अव्वल (25 फ़रवरी) को करारी में हुवा था. मरहूमा के फरजंद जनाब सिब्ते साहब मीरा रोड में रहते हैं.
    आप से एक सुरह फातेहा की दरखास्त है.  

    06 फ़रवरी 2012

    एक ज़माना ऐसा भी था!

    जी हाँ. 
    एक  ज़माना ऐसा भी था जब जनाब हसन मोहम्मद रिज़वी मशहूर ब हस्सू  करारी में "Paradise" होटल चलाया करते थे. होटल की ख़ास बात उसकी साफ़ सफाई, नफासत पसंदी, अच्छे मेयार का नाश्ता, आर्डर देने पर ताज़ा मिठाई, उठने बैठने की सहूलत और  हस्सू भाई की तरफ से मुफ्त बीडी. 
    लेकिन एक चीज़ से जनाब को सख्त नफरत थी.....वोह था उधार.
    उधार की वजह से उन्हें होटल बंद करके बॉम्बे हिजरत करनी पड़ी.

    05 फ़रवरी 2012

    करारी में मजलिस के दौरान जाकिर पर एतेराज़

    करारी शिया जामा मस्जिद में मौलाना गरवी साहब मजलिस पढ़ते हुए.

    करारी शिया जामा मस्जिद में उस वक़्त हंगामा हो गया जब मौलाना गरवी साहब (अहमदाबाद) ने अपनी मजलिस की शुरुआत करारी वालों पर अफ़सोस जताते हुए किया. और कहा की उनके लिए यह खबर गिरां गुजरी के करारी की इसी मस्जिद में ईदे ग़दीर की नमाज़ बा जमाअत हुई.
    इस बात पर मजलिस में शरीक मोमिनीन ने ज़ेरे मिम्बर इस खबर की तरदीद की और कहा की मौलाना साहब पहले आप लोगों से तस्दीक कर लें उसके बाद इस तरह से मिम्बर से माईक पर इजहारे अफसोस करें.
    मजलिस में बहेस छिड गई और मौलाना साहब ने अपने अलफ़ाज़ वापस लेते हुए मजलिस को आगे बढाया.
    यह मजलिस मरहूम मोहम्मद रज़ा के ईसाले सवाब के लिए रखी गई थी और यह सालाना मजलिस 7 रबीउल अव्वल को नमाज़े मग्रबैन के बाद होती है.
    ईदे ग़दीर में नमाज़े जमाअत की बहेस मजलिस के बाद भी जारी रही. मोमिनीन ने मौलाना गरवी साहब को समझाया के आइन्दा कोई इस तरह की गुफ्तगू सरे मिम्बर करने से पहले उसकी मुकम्मल तहकीक और तस्दीक कर लें वरना समाज में बिला वजह इख्तेलाफ पैदा होजाता है.
    करारी में कोई ऐसा वाक़ेया पेश नहीं आया और न किसी ने ईदे ग़दीर की नमाज़ बा जमाअत  पढ़ी और न पढ़ाई. 

    31 जनवरी 2012

    आज नमाज़े मग्रबैन के बाद मजलिसे तरहीम

    करारी शिया जामे मस्जिद में मरहूम सय्यद मोहम्मद रेज़ा की बरसी के मौके पर आज नमाज़े मग्रबैन के बाद मजलिसे तरहीम का इनेकाद  किया गया है जिसमें मौलाना मोहम्मद रेज़ा (गरवी) खिताबत फरमाएंगे. आप से सुरह फातेहा की गुज़ारिश  है.
       

    30 जनवरी 2012

    जावेद रिज़वी के मकान पर आज रात में मजलिस

    मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करारवी
     आज रात 8 बजे करारी में जावेद रिज़वी के मकान पर मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के ईसाले सवाब की मजलिस रखी गई है. जिसे  मौलाना जैगमुर रिज़वी खिताब फ़रमाएँगे.
    मोमिनीन से ज्यादा से ज्यादा तादाद में शिरकत की दरखास्त है.   

    29 जनवरी 2012

    जाफरपुर महावां में ज़नानी शब् बेदारी

    कल रात जाफरपुर महावां में ज़नानी  शब् बेदारी हुई. यह प्रोग्राम हवेली में रात 9 बजे शुरू हुआ  और सुबह 5  बजे तक जारी रहा. गाँव की खवातीन ने शिरकत की.
    रात भर 4 मजलिसें हुईं और हर मजलिस के बाद 5 नौहे हुए. 
    यह सालाना प्रोग्राम दुसरे गाँव से भी खवातीन पहुँचती हैं. करारी से भी एक टेम्पो गया था.
    जाफरपुर महावन में अय्यामे अजा में बहुत सी मजलिस और जुलूस होते हैं. जिसमें बगैर तफरीके मज्हबो मिल्लत गाँव वाले शिरकत करते हैं. 

    मरहूम ज़फर अब्बास आबिदी का चेहलुम

    मरहूम सय्यद ज़फर अब्बास आबिदी 
    आज इलाहाबाद में  अनवारुल  ओलूम  के  सामने  वाले  मैदान में मरहूम ज़फर अब्बास साहब के चेहलुम के  मौके पर सुबह दस बजे मजलिसे तरहीम का इनेकाद किया गया है. 
    इलाहबाद का कोई ऐसा मर्द, औरत या बच्चा नहीं है जो मरहूम ज़फर अब्बास को न जानता रहा हो.
    एक मुखलिस मुबललिग़. एक जाज़िब खतीब. नेक, भरोसेमंद, बा अमल जाकिर. मुख्तार नामाह पढने का फनकार, मिम्बर की जीनत. और सब से बड़ी सिफत; एक निहायत ही लोगों के काम आने वाला सादा इंसान. जब तक सेहत साथ दे रही थी, करारी से जुड़े हुए थे. 
    हज का बेहतरीन रहबर. एक अरसा मुस्लिम टूर्स  के साथ होकर शिया हाजिओं को सहीह हज करवाते रहे. बाद में जब कंपनी कमज़ोर हो गई तो शिया प्राइवेट टूर में रहबरी की.
    हिंदुस्तान और पाकिस्तान के हाजी ज़फर अब्बास के नाम से मानूस थे. हज के काफिले में खुसूसन खवातीन के  पूरी तरह मुआविन रहते. मक्का में होटल के कमरे के दरवाज़ों पर नाम बनाम हाज्जा को  पुकारते और हरम जाने के लिए आमादा करते.
    जब भी मरहूम से मक्का या मदीना में हज के मौके पर हमसे मुलाक़ात होती तो हमारे वालिद को याद करते और लोगों से यह  कहते की "रज़ी मियां के वालिद (मरहूम गुलाम हसनैन करारवी) ने ही मुझे मुस्लिम टूर्स के साथ जाने पर जोर दिया ता की मोमिनीन हज के सही अरकान अदा कर सकें."
    बहुत मोहब्बती, खादिमे कौम और मुन्कसिर मिज़ाज (आज के दौर में खादिमे कौम का मुन्कसिर मिज़ाज होना नायाब है, वोह खादिम कम और मखदूम जियादा होते हैं).
    मरहूम हमेशा शेरवानी  में मलबूस होते. मुझे तो याद ही नहीं पड़ता के मैंने कभी  उन्हें बगैर शेरवानी के देखा हो. 
    परवर दिगार मरहूम के दरजात में बुलंदी अता करे. मुमकिन है की जौनपुर की यह शख्सियत मैदाने महशर में इलाहबाद के मोमिनीन की शफाअत की सिफारिश करे.
    आप से गुज़ारिश है की इस अज़ीम इंसान को सुरह फातेहा से ज़रूर याद करें.
      

    28 जनवरी 2012

    शैदाए रेज़ा के मकान पर खम्सा मजालिस

    जैगमुर रिज़वी मजलिस पढ़ते हुए
    आज रात 8 बजे शैदाए रेज़ा साहब के मकान पर चौथी मजलिस थी. यह खम्सा मजालिस पहली रबीउल से शुरू हुईं. कल आखरी मजलिस है. 
    यह खम्सा गुज़िश्ता कई साल से हो रहा है. मोमिनीन अच्छी तादाद में शिरकत करते हैं. बकौल नय्यर भाई के, आज, कल के मुकाबले मौसम कम ठंडा था.
    मौलाना सय्यद साजिद महदी उर्फ़ जैगमुर रिज़वी ने ज़ुल्म की किस्में बताईं. इमामत का दर्जा और मंसबे इमामत की अहमियत का तज्केरा किया.
    जनाबे सकीना के मसाएब पर मजलिस को ख़त्म किया.  

    काजी जी की मस्जिद में चेहलुम की मजलिस

    क़ाज़ी जी की मस्जिद, बख्शी बाज़ार, इलाहबाद 
    आज इलाहबाद की  बख्शी बाज़ार में क़ाज़ी जी की मस्जिद में मरहूम सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी के चेहलुम की मजलिस हुई जिसे  मौलाना एहसान हैदर जवादी ने ख़िताब फ़रमाया. मस्जिद मरहूम के चाहने वालों से छलक रही  थी जो हिंदुस्तान के मुख्तलिफ शहरों से तशरीफ़ लाए थे.
    मजलिस से पहले सोज़ खानी और पेश्खानी हुई. शाएरों ने अपना मंजूम नजराना पेश किया.
    मरहूम के फर्ज़न्दान राजू, अनवार और राशिद के लिए ये बहुत दुःख  भरा  दिन  था . राशिद अबू  धाबी  से चेहलुम के लिए आए  थे. अल्लाह  इनको  सबरे  जमील  अता  करे .
    मरहूम के छोटे  भाई  जनाब  मुख़्तार  साहब  पर अपने भाई  के बिछड़  जाने  से बहुत ज्यादा  असर  रहा , उन्होंने इलाज  में कोई  कसर  नहीं  छोड़ी  थी.
    परवरदिगार मरहूम को जवारे मासूमीन में जगह दे.

    25 जनवरी 2012

    इरफ़ान इलाहाबादी का कलाम


    Irfaan Allahabadi, a young poet

    वारिसे अह्मदे मुख्तार तक आते आते
    हक तलफ हो गया हक़दार तक आते आते
    खुम में अहमद से तो कहते रहे बखखिन बखखिन
    फिर गए हैदरे कररार तक आते आते
    दम निकल जाता है ईमान का बे हुब्बे अली
    खानाए काबा की दीवार तक आते आते
    रोकने निकली थी हैदर के फ़ज़ाइल दुनिया
    थक गई मीसमे तम्मार तक आते आते
    लोग समझे थे सिमट जाएगा ज़िक्रे हैदर
    हक मगर फैल गया दार तक आते आते
    या अली कहते ही इरफ़ान सहेम जाती हैं
    मुश्किलें मुझ से गुनाहगार तक आते आते

    हामिद चचा के चेहलुम का प्रोग्राम


    20 जनवरी 2012

    अम्बाही के बस्सन की तद्फीन दोपहर 3 बजे


    अम्बाही के बशीर हुसैन उर्फ़ बस्सन का कल हार्ट अटैक से  इन्तेकाल हो गया था. हसनैन मार्केट में कारोबार कर रहे वस्सन भाई के बड़े भाई थे. मरहूम की तद्फीन आज दोपहर 3 बजे होगी.
    आप से गुज़ारिश है की एक सुरह फातेहा उनके सवाब के लिए बख्श दें और साथ ही आज मगरिब की नमाज़ के बाद नमाज़े वहशत पढ़ें.  बशीर हुसैन इब्ने नजीर हुसैन.

    करबला में अरबईन पर दुआ-इ- कुमैल

    14 जनवरी 2012

    मरहूम सय्यद गुलाम पंजतन इब्ने काजिम हुसैन का चेहलुम


    परसों यानी पीर 16 जनवरी को करारी शरीफाबाद में मरहूम सय्यद गुलाम पंजतन के  चेहलुम की मजलिस होगी जिसमें मौलाना सय्यद हसनैन रिज़वी करारवी खिताबत फ़रमाएंगे.
    यह मजलिस सुबह 10 बजे कुरआन खानी के बाद शुरू होगी.
    आप से शिरकत की दरखास्त है. अगर आप किसी वजह से शरीक न हो सकें तो कम अज कम एक सुरह फातेहा से मरहूम को याद करें.
    तफसील  के लिए मरहूम के फरजंद शबीहुल काजिम से राबेता 9860451686 किया जा सकता है.

    करारी में शदीद कोहरा

    खमसा ( 5 ) मजलिसें और जुलूसे अजा


    इलाहाबाद की अंजुमन, अंजुमने मोहाफिज़े इस्लाम ने मुंबई के मलाड मालोनी में खमसा ( 5 ) मजलिसें और जुलूसे अजा का एहतिमाम किया है.
    यह मजालिस 22 जनवरी से 26 जनवरी तक रहेंगी . 26 जनवरी को शाम 4 बजे जुलूसे अजा बरामद होगा.
    मौलाना अकमल हुसैन काज़मी खेताबत फ़रमाएंगे.