25 जुलाई 2011
मुंबई में जश्ने नूर
लेबल:
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20 जुलाई 2011
सय्यद मोहम्मद हामिद रिज़वी अलील
| Sayyad Mohammad Haamid Rizvi |
06 जुलाई 2011
01 जुलाई 2011
तालाबपर करारी में 28 रजब का जुलूस
आज तालाबपर करारी में 28 रजब की मुनासेबत से एक जुलूस बरामद होता है. इमाम हुसैन (a.s.) की मदीने से रवानगी का ग़म मनाया जाता है . अंजुमने अब्बासिया के जेरे निगरानी यह एक क़दीमी जुलूस है. हिंदुस्तान के कोने कोने से लोग इसमें शिरकत के लिए जाते हैं.
बोले हुसैन वादए तिफली निभाते हैं
नाना सलाम लीजिए परदेस जाते हैं.
नाना सलाम लीजिए परदेस जाते हैं.
अंजुमन के सदर जनाब फजलुल अब्बास (मास्टर साहब) और सेक्रेटरी जनाब गुलाम पंजतन इस जुलूस के निगराँ हैं और ज़हूर महदी (गुड्डू) इस के रूहे रवाँ. बकिया नौजवान, जवान, और बुज़ुर्ग इस में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.
यह जुलूस मदीना से अहले हरम की रुखसती की याद में बरामद होता है और 8 रबीउल अव्वल को शरीफाबाद करारी मे अहले हरम के लुटे हुए काफले की मदीना वापसी की याद में दूसरा जुलूस, जुलूसे अमारी के नाम से बरामद होता है .
27 जून 2011
तद्फीन आज 4 बजे शाम
दर्यापुर मंझ्यावा के मरहूम मोहम्मद हैदर जिन का इन्तेकाल गुज़िश्ता शब् 10 बजे हुआ था आज शाम 4 बजे तद्फीन को होगी.
फ़रज़न्दे अकबर इरफ़ान सउदी अरब के शहर अल्हासा में हैं, उनकी शिरकत मुमकिन नहीं है. लेकिन छोटे फरजंद रिजवान आज सुब्ह की परवाज़ से बम्बई से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं.
सउदी अरब में इरफ़ान से राबता के लिए 00966564809442 पर कॉल किया जा सकता है.
मरहूम को सूरा फातेहा से याद करें और आज नमाज़े मग़रिब के बाद नमाज़े वहशत पढना न भूलें.
26 जून 2011
मंझ्याएँ के मोहम्मद हैदर इन्तेकाल कर गए
करारी से करीब एक मशहूर गाँव दर्यापुर मंझ्यावा के मोहम्मद हैदर साहब का आज एक तवील बीमारी की वजह गाँव में ही इन्तेकाल हो गया. मरहूम ने बम्बई में भी अपनी उम्र का एक हिस्सा गुज़ारा था, पहले वोह इमामबाडा बबरअली में रहते थे उसके बाद वोह मलाड मालोनी मुन्ताकिल हो गए.
इरफ़ान इलाहाबादी और रिजवान करारवी यह दोनों नौजवान शाएर इन्हीं मरहूम के फरजंद हैं. इरफ़ान फिलवक्त सौदी अरब में रोज़गार कम रहे हैं और रिजवान बम्बई से करीब पनवेल में बरसरे रोज़गार हैं.
मरहूम की तद्फीन कल ज़ोहरैन की नमाज़ के बाद मंझ्याएँ में होगी.
मज़ीद तफसील और ताज़ियत के लिए रिजवान को 07498498731 पर राबेता किया जा सकता है.
21 जून 2011
मीसाक़ महदी (शाज़ रिजवी) की अज़ान
आज शाज़ ने MyKarari.com के लिए अज़ान रिकोड करवाई. उन्हों ने कहा की उनकी ज़िन्दगी का मकसद है की वोह कुरआने करीम के एक अच्छे क़ारी और एक अच्छे मुआज्ज़िन बनें.
दुनिया में जिस जिस जगह की मस्जिद जाएँ वहां अज़ान दें. आइए हम देखें की वोह अपने मकसद में कब कामयाब होते हैं. आप भी उनकी कामयाबी के लिए दुआ करें.
16 जून 2011
अशरफ भाई के घर निआज़
आज 13 रजब , हज़रात अली (अ.स.) की विलाद के मौके पर बम्बई के अलग अलग इलाकों में मौला अली के चाहने वालों ने अपने घरों में नज्र का एहतिमाम किया जिसे कूंडा भी कहा जाता है. अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को दावत दी. नज्र में खीर, मिठाई, पूड़ियाँ, चना बटाटा, दही वडा, मीठी टिकया और सालन चावल रखा गया.
बांद्र इलाके में बब्बन मामूं (मरहूम याकूब हसन रिज़वी) के घर और सान्ताक्रुज़ में अशरफ भाई के घर नज्र चखने के लिए गए थे. तमाम चीज़ें खुश जाएका थीं.
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| बांए तरफ वामिक और दाईं तरफ अशरफ भाई नज्र करने के बाद चखते हुए. |
14 जून 2011
11 जून 2011
मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी
कल 9 रजब को हमारे दादा मरहूम सय्यद अमीर अली रिज़वी की 26 वीं बरसी है. मरहूम का इन्तेकाल 1985 में तकरीबन 95 साल की उम्र में करारी में हुआ था. मरहूम इलाहाबाद और करारी परगना के अतराफ में अपने दौर के जाने माने मर्सिया खाँ थे. अक्रबा परवरी की एक मिसाल से.
कर्बला की जियारत का भी शरफ हासिल किया था. उनके दौर में इमाम हुसैन (अ.स.) की जियारत के लिए जाना नहीं था, पानी के जहाज़ से बसरा (इराक) सफ़र किया जाता था और वहां से रेल से कर्बला जाना पड़ता था.
मरहूम सय्यद मंज़ूर तकवी (कज्जन) की पहली बरसी
आज करारी जामे मस्जिद में नमाज़े ज़ोह्र से पहले मरहूम सय्यद मंज़ूर तकवी उर्फ़ कज्जन,की पहली बरसी की मजलिस हुई जिसे प्रोफ़ेसर अबुल कासिम साहब ने ख़िताब किया. मरहूम का गुज़िश्ता साल कानपूर में इन्तेकाल हुआ और उनकी तद्फीन करारी में हुई. बरसी की मजलिस में तमाम बेटे और दामाद शरीक थे. मरहूम ने अपनी हयात के आखरी साल का हज अदा किया और मुहर्रम में हर मजलिस में मौजूद रहते थे.
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09 जून 2011
मरहूम साकिब रिज़वी की पहली बरसी
मरहूम साकिब रिज़वी की पहली बरसी, रविवार (इतवार), 12 जून रिज़वी कालिज बांद्रा में मुनाकिद होगी.
सुबह 11 बजे कुरआन खानी के बाद जनाब मीर नज़ीर बाक़री साहब पेश्खानी करेंगे और उसके बाद मौलाना सय्यद ज़हीर अब्बास साहब खेताबत फर्माएंगे. आप से शिरकत की दरख्वास्त है. अगर मुमकिन न हो तो एक सुरह फातेहा से मरहूम को याद कर लें.
अग्यओना गाव का एक जवान
करारी से क़रीब अग्यओना गाव के एक जवान, जनाब शजरुल तकवी. आप बम्बई शहर में रहते हैं. बहुत नेक और दिलचस्प शख्सियत हैं. अल्लाह इन्हें तरक्की दे, क्यूंकि यह मेहनतकश और इमानदार हैं. अगर अच्छी नौकरी मिल जाए तो शजरुल GULF जाने के लिए भी तैयार हैं. आज के दौर में ऐसे जवान कम ही दस्तयाब हैं. इन्हें आप Facebook पर भी देख सकते हैं. Shajrul Taqvi.
08 जून 2011
07 जून 2011
30 मई 2011
इरान, इराक और शाम की ज़ियारात की तसावीर
.15 अप्रैल से 13 मई 2011 तक की तस्वीरें
29 मई 2011
24 मई 2011
विलादते जनाबे फातेमा ज़हरा मुबारक
तज़किरा फ़ातेमा ज़हरा का ज़रा हो जाए
क्या हकीकत है ज़माने को बयां हो जाए
उस से अल्लाहो -नबी हो नहीं सकते राज़ी
जिस से शेह्ज़ादिए-कौनेन ख़फा हो जाए
21 मई 2011
सय्यद सफी हैदर इन्तेकाल कर गए
आज शाम करेली, इलाहाबाद में सय्यद सफी हैदर रिज़वी ने इस दुनियाए फानी को खैरबाद कहा और अबदी दुनिया को कूच किया. मरहूम 80 साल से ज्यादा जिए. आप का ताल्लुक करारी से मिला हुआ गाँव अग्योना था. मरहूम ने शरीके हयात के साथ साथ दो लड़कियां और एक फरजंद को दाग़े मुफारेक़त दिया. अल्लाह उनके पस्मान्दगान को सब्र अता करे.
सफी हैदर साहब ने बहुत ही सादा ज़िन्दगी गुज़ारी. एक मुद्दत से बीमार रहने के बाद आज दाइए अजल को लब्बैक कहा. इलाहबाद शहर के दर्याबाद के कब्रस्तान में कल इंशा अल्लाह सुबह नौ बजे तद्फीन होगी.
आप से एक सुरह फातेहा की दरख्वास्त है.
19 मई 2011
हवाई जहाज़ का सस्ता किराया और मुश्किल सफ़र
ज़ियारत के लिए आमादा होने पर इस बात का ख़याल रहे की सफ़र की परेशानियां सामने आएंगी. लोग लम्बी दूरी के सफ़र से घबरा जाते हैं.
बम्बई या देहली से शाम पहुंचना काफी थका देने वाला सफ़र होता है. अगर सउदी एरलाईन्स से टिकट है तो खाने पीने की परेशानी न होगी, लेकिन अगर सस्ती एरलाईन्स, अल अरेबिया से जाना है तो बहुत दिक्कत पेश आती है. क्यूंकि अल अरेबिया का सस्ता टिकट होने की वजह से जहाज़ में नाश्ता और खाना नहीं दिया जाता. यहाँ तक की जहाज़ में पानी भी खरीद कर पीना पड़ता है. एक बोतल पानी 40 रूपए में. देह्शत्गर्दों के डर से मुसाफिर को जहाज़ में अपने साथ पानी ले जाने की भी इजाज़त नहीं है.
अगर हवाई जहाज़ किसी वजह से ताखीर से आए या जाए तो मुसाफिर को या तो भूका रहना पड़ेगा या फिर महंगा खाना पीना खरीदना पड़ेगा. यह दिक्क़तें न आएं अगर जहाज़ दिल्ली या बम्बई से सीधा शाम पहुंचे. लेकिन ऐसी कोई परवाज़ नहीं है. उम्मुल मसाएब, जनाबे जैनब (अ.स.) की ज़ियारत करने जा रहे हैं तो परेशानियों से घबराना कैसा?
18 मई 2011
बम्बई से शाम के लिए रवानगी
| होटल बिनाए कासिम में |
खलीज की सब से अच्छी हवाई सेवा सउदी एरलाइन्स की मानी जाती है. लेकिन शाम (सिरिया) जाने के लिए कोई सीधी परवाज़ नहीं है. बम्बई से रियाज़ और रियाज़ से दमिश्क जाना पड़ता है. रियाज़ में 4 घंटा हवाई अड्डे पर इंतज़ार कर के कुल नौ घंटे में आप बम्बई से दमिश्क पहुँच जायेंगे.
इत्तेफाक से सउदी अरब के मदीना और दीगर शहरों में रेतीले तूफ़ान की वजह से 15 अप्रैल को सुबह 7 बजे बम्बई हवाई अड्डे से उड़ने वाला जहाज़ 18 घंटे देर से उड़ा. रियाज़ हवाई अड्डे पर 10 घंटे कियाम करने के बाद हम लोग दमिश्क शाम 7 बजे पहुंचे और सय्यदः जैनब शहर के होटल "बिनाए कासिम" में रात 9 बजे सामान रखा. होटल जनाबे ज़ैनब के रौज़े के पिछवाड़े ही था. चूँकि रौज़ा रात 10 बजे बंद हो जाता है इस लिए हम लोग खा पीकर सो गए और जियारत दुसरे रोज़ पर टाल दी. इस ताखीर से हमारा एक दिन ज़ाए हुआ.
17 मई 2011
वतन वापसी
| नजफ़ में रौज़ाए हज़रत अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) |
शाम, ईराक और ईरान की ज़ियारात अपने इख्तिताम पर आई. 28 दिनों का यह टूर निहाएत ही कामयाब रहा. तीनो ममालिक में मौसम बहुत ही शानदार था. अप्रैल के दुसरे हफ्ते से मई के दुसरे हफ्ते में मौसम बहुत ही प्यारा रहता है, वरना मई के तीसरे हफ्ते से गर्मी शुरू हो जाती है. मौसम से परेशानी का एहसास खुसूसन ईराक में होता है. वहाँ बिजली हर दो घंटे के बाद चार घंटे गाएब रहती है, इस तरह 24 घंटों में सिर्फ 8 घंटा बिजली की सप्लाई रहती है. अक्सर होटल बिजली आने पर ही AC चलाते हैं, वरना जेनेरटर के ज़रिए सिर्फ पंखा चल सकता है.
यह मसअला पूरे ईराक में है. हम लोगों ने जब सरज़मीने नजफ़ पर क़दम रखा तो मग़रिब की अज़ान होने वाली थी और उस वक़्त बिजली नहीं थी. पूरा शहर जेनेरटर की आवाज़ से गूँज रहा था. चार बरसों में नजफ़ काफी तब्दील हो चुका था. सिकुरिटी बहुत सख्त थी. हालात को देखते हुए ज़रूरी भी था. शारे रसूल पर होटल शिक़ाकुल ईमान में तीन रोज़ कियाम करना था. यह होटल उसी सड़क पर वाके है जहां अयातुल्लाह सीस्तानी साहब का दफ्तर है.
शाम से तकरीबन 30 घंटे के बस के सफ़र के बाद हिम्मत नहीं हुई की उसी शब् अमीरुल मोमिनीन (अ.स.) के रौज़े पर हाजरी देते. रात के 11 बज रहे थे और रौज़ा 12 बजे बंद हो जाता है.
21 अप्रैल 2011
शाम में मौजूद हैं
सीरिया में आज पांचवां और आखरी दिन है. मौसम अच्छा है मगर हालात ठीक नहीं हैं. जोर्डन की सरहद पैर बसे शहरों में वहाबियों ने फसाद फैला रखा है. सय्येदा जैनब जहाँ जनाबे जैनब का रौज़ा है वहां फिल वक़्त हालात बेहतर हैं. हमारा काफ़ला हर जगह जियारत के लिए जा सका. हज़रात हाबील की कब्र, असहाबे कहेफ से मंसूब ग़ार, सुकैना बीनते अली इब्ने अबी तालिब का रौज़ा, हज़रत रोक़य्या, दरबारे शाम. वगैरा, आज कर्बला के लिए रवाना होंगे. इंशा अल्लाह. करारी के ओलामा से मुलाक़ात हुई. अग्यौना के मोहम्मद काजिम , करारी के रेहान, लहना के मौलाना. वगैरा. सब बहुत खुश हुए और अहले वतन की खिअरियत दरयाफ्त करने लगे.
15 अप्रैल 2011
10 अप्रैल 2011
01 अप्रैल 2011
मदीना, हर मुसलमान के दिल की तमन्ना
हज 2009 के दौरान मदीनातुर रसूल में खींची गई तस्वीरें
लेबल:
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jannatul baqi,
madina,
muslims,
rasool
29 मार्च 2011
महफिले सक्काए सकीना में मजलिस
गुज़िश्ता इतवार 27 मार्च को मीरा रोड मुंबई में मरहूम एहसान फातेमा का चेहलुम मुनाकिद हुआ जिस में मौलाना सय्यद हसनैन करारवी ने खेताबत फ़रमाई. यह मजलिस महफिले सक्काए सकीना में थी.
नीचे विडियो में उस मजलिस का एक हिस्सा दिखाया गया है.
26 मार्च 2011
बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम
यह तस्वीरें करारी में बनी हाशिम का कब्रस्तान, वादिस सलाम की हैं. गुज़िश्ता मुहर्रम (1432 ) 2010 में इस कब्रस्तान में 12 मुहर्रम को मौलाना रज़ा हैदर साहब ने मरहूम सय्यद ग़ुलाम हसनैन करार्वी के कब्र के सरहाने मजलिस पढ़ी थी .
22 मार्च 2011
मरहूम मौलाना हैदर महदी साहब का चेहलुम
"तनजीमुल मकातिब के इख्तेलाफात का पहला शिकार?" हुसैन भाई अपनी डाएरी में शाएद यही दर्ज कर रहे हैं.
मरहूम मौलाना हैदर महदी साहब के चेहलुम पर ली गई मज़ीद तस्वीरों को देखने के लिए click करें
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