06 दिसंबर 2011

बड्दन भाई के घर पर सालाना मजलिस


शाम चार बजे नजीर अब्बास उर्फ़ बड्दन के घर पर नौ मुहर्रम को हर साल की तरह इस साल भी एक मजलिस बरपा हुई.
केसन ने सोज्खानी की, हुसैन भाई ने मजलिस पढ़ी जिस का उन्वान था सलवात की फजीलत. मजलिस के बाद नाज़िर हुसैन ने नौहा पढ़ा.

केसन सोज़ पढ़ते हुए

आज 9 मुहर्रम को करारी में अज़ादारी

आज  नों मुहर्रम को कोई जुलूस नहीं बरामद हुआ.
सिर्फ नमाज़े जोहर के बाद अहाता में गहवारा निकला गया.
रिज़वी कॉलेज में सालाना मजलिस हुई. हुसैन भाई ने निजामत के फराएज़  अन्जाम इस शेर से दिया.
अजब  मजाक था इस्लाम की तकदीर के साथ 
कटा हुसैन का सर नारए  तकबीर  के साथ
अबू मोहम्मद ने अपने चहेते शाएर जनाब पयाम आज़मी साहब का मुसद्दस बड़े जोशीले अंदाज़ से पढ़ा.
मजलिस जनाब मौलाना ज़ोहैरकैन साहब ने पढ़ी. उन्हों ने एक बहुत अहेम बात कही और कहा की मजलिस से क़ब्ल माइक  पर बानी मजलिस बहुत जोर नौहे का केसिट लगा देते हैं यह मुनासिब नहीं है. यह तफरीह है. अज़ादार अपनी कार में नौहा ऊँची आवाज़ में लगाए घुमते हैं. यह ठीक नहीं  है.
मजलिस के बाद हुसैन भाई ने मुख़्तसर  सा  नौहा पढ़कर  ज़िआरत   पर प्रोग्राम  को इख्तेताम  तक  पहुँचाया .
Rizvi  College Hall


05 दिसंबर 2011

करारी में आठ मुहर्रम के कुछ ख़ास प्रोग्राम

आठ मुहर्रम नमाज़े ज़ोहरैन के बाद रेहान भाई के घर से जुलूसे अजा बरामद होता है. यह खरकापर तक जाकर उनके दौलत खाने पर पलट कर आता है. शबीहे ज़ुल्जनाह भी जुलूस के साथ साथ रहता है.  मुख्तलिफ साहिबे बयाज़ नौहा खानी करते हैं. इन में करारी के मशहूर साहेबे बयाज़ जनाब हीरा साहब और जामिन अब्बास अपनी दर्द भरी आवाज़ में लोगों की आँखों में आंसू ले आते हैं.
उसके बाद शब् में रेहान भाई अपने दौलत कदे   पर नजर का इंतज़ाम भी करते हैं.
दिन में नमाज़े जोहर से क़ब्ल नाच घर पर शमीम हैदर उर्फ़ छोक्कन भाई के मकान पैर मजलिसे अजा बरपा हुई जिसमें मौलाना अख्तर रिज़वी ने खिताबत की. उसके बाद नौहाओ मातम हुआ. नमाज़ के बाद नजर का एहतेमाम भी था.
आठ मुहर्रम को ही करारी से करीब सरय्याँ गाँव में भी मजलिसओ जुलूस का सिलसिला था.

जुलूस खरकापर की तरफ  जाते  हुए 

04 दिसंबर 2011

सात मुहर्रम का जुलूस

कल 7 मुहर्रम थी. महल पर मोहल्ला से जुलूसे अजा तकरीबन 3 बजे दोपहर बरामद हुआ. शबीहे ज़ुल्जनाह हमराह था. कई अदद नौहे पढ़े गए.
यह जुलूस करबला में तमाम हुआ. इस जुलूसे के रूहे रवां जनाब गुलाम पंजतन काफी एहतेमाम करते हैं. ठीक मगरिब की नमाज़ के वक़्त जुलूस करबला पहुंचा और वहां से दोबारा महल पर पलटा.
बच्चे और नौजवानों  ने पुर जोर मातम किया.
करारी की कर्बला 

03 दिसंबर 2011

फाटक में शबीहे ताबूत

फाटक का  इमामबाडा बहुत क़दीम है. यहाँ पर हिन्दोस्तान के बड़े बड़े जाकेरीन ने खिताबत की है. इस साल मरहूम हिदायत हुसैन उर्फ़ हिद्दन के फरजंद की ज़िम्मेदारी है की वोह मजालिस को बरपा करें. वोह कर भी रहे हैं.
मौलाना जवाद हैदर साहब ज़ाकरी फरमा रहे हैं. आज रात फाटक से शबीहे ताबूत बरामद होंगे.
मौलाना जवाद हैदर साहब खिताब करते हुए.
     

कर्बला की जानिब जाने वाला जुलूसे अजा

छे मुहर्रम को अकील अब्बास के घर से (चमन गंज) कर्बला के लिए दो  पहर ३ बजे जुलूस अजा बरामद होता है.
इस जुलूस में शबिहे ज़ुल्जनाह भी साथ होता है.
अंजुमन की कोई क़ैद नहीं है. साहेबे बयाज़ नौहा पढ़ते हैं और अज़ादार मातम करते हुए कर्बला कि जानिब बढ़ते हैं.
इस का शुमार  क़दीमी जुलूस में होता है. मरहूम एजाज़ अब्बास उर्फ़ मुन्ने साहब बहुत एहतिमाम किया करते थे. अब भी यह बड़ी शानो शौकत से बरामद किया जाता है.
सूरज डूबते ही अपनी मंजिल कर्बला पहुँच जाता है.
कर्बला में इदारे इस्लाम की जानिब से जनाब राशिद रिज़वी के जेरे इंतज़ाम चाय की सबील लगती है. चाय की इस  सबील की शुरूआत मरहूम सय्यद  गुलाम हसनैन करारवी ने तकरीबन 18 साल पहले की थी. पहले यह चाय अबुल हसन की चक्की के आगे बनी जाती थी. लेकिन जब इस की तकसीम से जुलूस में बाधा आने लगी तो इसे कर्बला में मुन्ताकिल कर दिया गया.
पहली से दस मुहर्रम में कर्बला में ख़त्म होने वाले चार जुलूस हैं.
मुहर्रम की पांच, छे, सात और रोज़े आशुरा का जुलूस.
हज़रत अब्बास (अ.स.) की दरगाह 
चाय का एहतिमाम 

02 दिसंबर 2011

इमामबाडा रोशन अली में जोलूसे गहवारा

इमामबाडा रोशन अली में हर 6 मुहर्रम को 70  साल से शबीहे गह्वारए हज़रात अली असग़र बरामद होते आ रहे हैं.
आज की मजलिस मौलाना मुन्तजिर महदी ने पढ़ी. मजलिस के बाद एक ही नौहा पढ़ा जा सका क्यूंकि जुमा का रोज़ था, नमाज़े जुमा ज़वाले आफ़ताब की वजह से 11 .45  पर अज़ान होनी थी.
मौलाना मुन्तजिर मजलिस पढ़ते  हुए  

छे मोहर्रम: करारी में हस्बे प्रोग्राम अज़ादारी

आज मोहर्रम की 6 तारीख़ है. पहली मजलीस डिपुटी साहब के इमाम बाड़े में मौलाना ज़ोहैर कैन साहब ने पढ़ी.
दूसरी मज्लिस सवा आठ बजे बड़े दरवाज़े के इमाम बाड़े में हुई उसके बाद दौरे की दीगर मजालिस हुईं.
सवा दस बजे इमामबाडा रौशन अली में गहवारे की मज्लिस शुरू हो गई है. पहले तूसी रिज़वी ने कुरआन करीम की तिलावत की. अब उसके बाद सोज़ खानी का सिलसिला जारी है. महमूदुल हसन साहब अपने मखसूस और दिल्सोज़ अंदाज़ में पढ़ रहे hain.
जावेद रिज़वी ने अब इत्तेहाद पर  मुसद्दस पढना शुरू कर दिया है.

30 नवंबर 2011

करारी की मज्लिसें

इस्लामी तारीख़ के हिसाब से 1433 का आज चौथा दिन है. करारी में अब शहर से लोग आना शुरू हो जायेंगे. ज़ाकेरीन की तादाद इस साल अच्छी है.
सुबह 10 बजे रोशन अली के इमामबाड़े (बरगद) में मौलाना मुन्तज़िर महदी का बयान होता है.
मग्रिबैन के बाद  फाटक की मजलिस मौलाना जवाद  हैदर (जूडी) पढ़ रहे हैं.
रात ही में चौधरी के इमाम बाड़े में मौलाना शमीम रज़ा साहब जाकरी कर रहे हैं और रात की आखरी मजलिस खरकापर में मौलाना ज़ोहैरकैन साहब की खिताबत होती है.
बकिया तफसील करारी पहुँच कर. 

27 नवंबर 2011

आशिके शब्बीर दहशतगर्द होता ही नहीं

जिसकी   आँखें  हों  गमे   करबो बला  के  वास्ते
वोह  कभी  इरफान अपने  गम  प  रोता  ही  नहीं
दर  हकीकात  येह  गमे  शब्बीर  क  एजाज  है
आशिके   शब्बीर   दहशतगर्द   होता   ही  नहीं

21 नवंबर 2011

मरहूम पंजतन की तद्फीन आज दो बजे दिन में

 मरहूम पंजतन की तद्फीन आज दोपहर दो बजे करारी कर्बला में होगी.
एक तूलानी बीमारी के बाद कल घर पर इन्तेकाल हो गया था.
आप से नमाज़े मग़रिब के बाद मरहूम के लिए नमाज़े वहशत की दरख्वास्त है.
मरहूम पंजतन इब्ने काजिम हुसैन.

19 नवंबर 2011

मरहूमा ततहीर फातेमा की मजलिसे बरसी

कल इतवार 20 नवम्बर को  मरहूमा  ततहीर फातेमा की पहली बरसी के मौके पर मीरा रोड की महफिले पंजतन में मजलिसे अजा का इनएकाद किया गया है.
मौलाना सय्यद हसनैन करार्वी साहब जाकेरी फरमाएंगे.
सुबह 10 बजे कुरआन खानी के बाद मजलिस शुरू हो जाएगी
आप लोगों से शिरकत की दरखास्त है.
मजीद मालूमात के लिए 9969153744 पर साहबजादे साहब से राबता किया जा सकता है. 

17 नवंबर 2011

हुसैन आलम के मकान पर महफिले ग़दीर

husain aalam apna kalaam pesh karte hue
ईदे ग़दीर की मुनासेबत से मंगल को रात 9 बजे मीरा रोड, मुंबई  में हुसैन आलम के दौलत खाने पर महफिले मक़सिदा का इनेकाद कियागया. जिस मोमिनीन ने अच्छी तादाद में शिरकत की.

मीरा रोड के शाएरों के अलावा मेहमान शाएरों ने भी शिरकत की.
इर्ला से सादिक रिज़वी तशरीफ़ लाए थे. शमीम अब्बास ने भी अपने कलाम से नवाज़ा.
हसन करारवी ने सामईन से बहुत दाद बटोरी.
यह महफ़िल गुज़िश्ता तीन बरसों से ग़दीर के रोज़ हो रही है.
जिन लोगों ने अपना कलाम पेश किया उन्हें तहाऍफ़  से नवाज़ा गया.
हुसैन आलम साहब अक्सर अपने घर पर इस किस्म की तक्रीबात रखते हैं. अल्लाह उनकी तौफिक़ात में इजाफा करे.
ज़मज़म पुलाव बहुत शानदार रहा.

15 नवंबर 2011

इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

करारी के करीब, अतरसुय्या के रहने वाले हाजी सादिक अब्बास का आज सुबह इन्तेकाल हो गया. मरहूम तकरीबन 80 बरस के थे.
कल इंशाअल्लाह उनके आबाई गाँव अतर सुय्या में तद्फीन होगी.
मरहूम के दो फरजंद, हैदर अब्बास (हद्दू) और मोहम्मद अब्बास हैं.
एक सुरह फातेहा की गुज़ारिश है.

खेल के मैदान में


30 अक्टूबर 2011

मरहूम सय्यद हैदर महदी रिज़वी की 21 वीं बरसी



दरयापुर मंझ्यावा के मरहूम सय्यद हैदर महदी रिज़वी (आफताब) को 21 साल पहले मध्य परदेश के जबलपुर शहर में मस्जिद में जाफरानी दहशत गरदों ने  शहीद कर दिया. 
तारिख थी 30 अक्तूबर 1990  .
मरहूम की तद्फीन जबलपुर में ही 3 नवम्बर को  कर दी गयी.
मरहूम की इक्कीसवीं बरसी पर आप से  एक सूरा फातेहा की दरख्वास्त है.  

21 अक्टूबर 2011

मोहम्मद हुसैन मरहूम की मजलिसे चेहलुम

मोहम्मद हुसैन मरहूम मोहम्मद युसूफ की 23 अक्टूबर को  मजलिसे चेहलुम मुनाकिद की गई है. 
इस मजलिस को जनाब मौलाना एहसान हैदर जवादी साहब खेताब फ़रमाएंगे.
सुबह 10  कुरआन खानी के बाद मजलिस शुरू हो जईगी. पता है:
महफिले पंजतन, विशाल नगर, पंचवटी होटल के करीब, अम्बादी रोड, वसई (पश्चिम).
मजीद मालूमात के लिए 09881444658 पर राबता किया जा सकता है.   

20 अक्टूबर 2011

जश्ने अबू तालिब को सिर्फ तीन दिन बाकी

 करारी कोशाम्बी में जश्ने अबू तालिब को सिर्फ तीन दिन बाकी हैं. यह प्रोग्राम 23 अक्टूबर को होने वाला है जिसमें मुल्क के नामवर शाएर तशरीफ़ लाएंगे. 
आप भी अपने दोस्त एहबाब के साथ शरीक हूँ.
अंजुमने महदिया, करारी की जानिब से यह महफ़िल बहुत बड़े पैमाने पर मुनाकिद की जाती है.
इस में करारी जवान बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं.

11 अक्टूबर 2011

तीन बातें सिखाओ

नबी (स) ने फ़रमाया: 
  • अपनी औलाद को तीन बातें सिखाओ।:
  • अपनी नबी (स) की मुहब्बत। 
  • अपने नबी (स) की आल की मुहब्बत। 
  • क़ुरआने मजीद की तिलावत।

03 अक्टूबर 2011

मोहम्मद हुसैन साहब का इन्तेकाल


रात  3.40 बजे अग्योना के मोहम्मद हुसैन साहब का बम्बई के वसई अस्पताल में ICU  में इन्तेकाल हो गया. आप की उम्र तकरीबन  70 साल थी. 
मरहूम मोहम्मद हुसैन इब्ने युसूफ हुसैन, zainabia  में काम कर रहे  तनवीर के वालिद थे. 
तद्फीन मीरा रोड के कब्रस्तान, बेहिश्ते ज़हरा में आज 2 बजे दिन में होगी.
आप मरहूम के ईसाले सवाब के लिए एक सूरा फातेहा पढ़ें और नमाज़े मग़रिब के बाद नमाज़े वहशते कब्र पढना न भूलें.
मजीद मालूमात के लिए 09322264666  पर फोन कर सकते हैं. 

27 सितंबर 2011

करारी में शादियों का मौसम आ रहा है?

करारी में अगले महीने यानि अक्टूबर में कई अदद शादियाँ होंगी. ज़िल्हिज का महीना रहेगा. साथ ही दिवाली की छुट्टियां भी होने वाली हैं. मौसम भी सोहना रहेगा. अगर कोई शिरकत करना चाहता है (दावत नामह मिलने पर) तो उसे कम से कम बीस दिन की छुट्टी लेना पड़ेगी. 
इन तक्रीबात का सिलसिला करारी में जश्ने अबू तालिब से शुरू होगा जो 23 अक्टूबर को है. यह प्रोग्राम हर साल अंजुमने महदिया करती चली आ रही है.
इस अंजुमन के रूहे रवां जनाब फुरकान साहब है. इस महफिले मकासिदा में कोई मकामी शाएर नहीं होता बल्कि सब मेहमान शाएर अपना कलाम पढ़ते हैं. 

15 सितंबर 2011

सेहत के लिए दुआ की गुज़ारिश

अग्योना के जनाब मोहम्मद हुसैन, मुंबई के वसई इलाके में रहते हैं. 2 रोज़ पहले उन्हें सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई तो उन्हें वसई गाँव के ओम नर्सिंग होम में ICU में दाखिल किया गया. 
आप लोगों से गुज़ारिश है की उनकी सेहत्याबी के लिए "अम्मईं योजीब" पढ़ें.  
मोहम्मद हुसैन साहब, जैनबिया में काम कर रहे तनवीर के वालिद हैं.
मज़ीद जानकारी के लिए आप तनवीर से 09882444658 पर फ़ोन कर सकते हैं.  

13 सितंबर 2011

तीन बारात और दो अमवात

गुज़िश्ता आठ दिन करारी के लिए ख़ुशी और गमी के दिन थे, तीन बारात और दो अमवात. बेरुई के मौलाना हसनैन करारवी के फरजंद की बारात badaunpar  से मोहल्ला शरीफाबाद गई.
मौलाना हसनैन साहब  के बड़े भाई मासूम आलम के फरजंद की बारात करारी से करेली गई और मरहूम मंज़ूर हसन रिज़वी के नवासे, रिजवान इब्ने जियारत हुसैन की बारात करेली में Hira Palace पहुची. रात इसी शादी का वलीमा करेली के अम्बर पैलेस में हुआ. 
इन  आठ दिनों में चार दिन बारिश ने लिए. दो दिन बिजली के मसाएल रहे. जब तक पानी बरसता है मौसम अच्छा रहता है, लेकिन बाद की हालत काबिले बयान नहीं है.
सितम्बर के महीने को पश्चिमी  यूं पी वाले सितमगर कहते हैं. इस महीने में यू पी के गाँव में कोई तकरीब रखना इन्तेकाम लेने के बराबर है, गर्मी से दूल्हा के अलावा सब परेशान रहते हैं.
इस सितम्बर के महीने में मौसम के उतार चढ़ाव की वजह से अक्सर लोग बीमार हो जाते हैं. डाक्टरों का यह कमाई का सीज़न है.
चुंके यहाँ बम्बई की तरह मुसलसल बारिश नहीं होती इस वजह से अवाम छाता लेकर घर से बाहर नहीं निकलती. थोड़ी देर बरसते हैं. लोग कहीं भी पनाह ले लेते हैं.
बिजली की सहूलत की वजह से हाथ के पंखों का भी रवाज ख़त्म हो रहा है, अब लोग अखबार और रुमाल का इस्तेमाल करते हैं. घर में इनवर्टर ने ज़िन्दगी का निजाम बदल दिया है.

09 सितंबर 2011

हुसैन भाई को मुबारकबाद

ऐनुर रज़ा (हुसैन भाई) की बेटी की शादी  कल रात मोहम्मद रिज़वी के हमराह करारी में हो गयी. मोहम्मद मौलाना सय्यद हसनैन रिज़वी के फरजंद हैं. 
निकाह, करारी जामे मस्जिद में नमाज़े मग्रेबैन के बाद हुआ. दूल्हा के वकील मौलाना रज़ा haider थे और दुल्हन की जानिब से मौलाना मंज़र सादिक साहब थे.
अल्लाह इस जोड़े को सलामत रखे.

08 सितंबर 2011

इन्नालिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन

कल कराची पाकिस्तान में अशरफ भाई, सज्जाद भाई और ताहिर भाई की बड़ी बहेन, तौकीर फातेमा बिन्ते  अजहर हसन का इन्तेकाल हो गया और आज जोहर  के बाद  वादी  हुसैन  में  तद्फीन  हो  गई. आप लोगों से एक सुरे फातेहा और नमाज़े वहशत की दरख्वास्त है. 
और जानकारी के लिए 09769558264 पर contact किया जा सकता है

जश्ने अबू तालिब. की तय्यारी ज़ोरोशोर से

जश्ने अबू तालिब. की तय्यारी ज़ोरोशोर से. अंजुमने  महिद्य  गुज़िश्ता  3 बरसों  से अक्तूबर के महीने में जनाब अबू तालिब  (अ.स.) की शान में जश्न का एहतिमाम करती आ रही है.
जिस में मुल्क के नामवर शेर और मोक़र्रीर तशरीफ़ लाते हैं.
इस साल इस जश्न की निजामत अहमद बिजनौरी करने वाले हैं. यह जश्न कोशाम्बी जिले की सब  से  आला  तकरीब  है.
मौलाना राज़ी हैदर साहब की तक़रीर होगी.
मजीद मालूमात के लिए 09389337354 पर अज़ादार हुसैन से ली जा सकती है
कल दरयापुर  मंझ्यावान में जन्नतुल बाकी के इन्हेदाम पर एहतेजाज करते हुए एक जुलूस निकला गया. यह जुलूस तकरीबन दस बरसों से बरामद हो रहा है. इलाहाबाद और कोशाम्बी जिले के मोमिनीन इस तकरीब में शिरकत करते हैं. 

06 सितंबर 2011

कर्बला कब्रस्तान में आज अली हैदर की तद्फीन

मरहूम सय्यद गुलाम हसनैन रिज़वी के इसाले सवाब की मजलिस कल रात शिया जमे मस्जिद में मौलाना काज़मी साहब ने पढ़ी. मोमिनीन ने अच्छी तादाद में शिरकत की. मौलाना ने सूरए वाल असर को समझाया और कहा की इंसान घाटे में है, सिर्फ चन्द लोग ही कामयाब हैं.
आज शिया जामे मस्जिद के मेनेजर जनाब शमीम हैदर के छोटे भाई अली हैदर इब्ने गुलाम हैदर का सुबह इन्तेकाल हो गया, वोह कैंसर के  मरीज़ थे. उनकी तद्फीन कर्बला के कब्रस्तान में शाम 4 बजे हुई. मौलाना रज़ा हैदर साहब ने नमाज़े जनाज़ा के बाद मौत के सिलसिले में ताज़क्कुर दिया. मौलाना zameer   हैदर साहब ने नमाज़े जनाज़ा और तलकीन पढाई. जामे मस्जिद में मग़रिब की  नमाज़ के बाद मोमिनीन ने नमाज़े वहशत अदा की.
maulana  raza haider sahab taqreer karte hue

05 सितंबर 2011

करारी शिया जामे मस्जिद

कल रात करारी जामे मस्जिद में तमाम मोमिनीन से मुलाक़ात हुई. सब ने मुस्कुरा कर वही पुराना सवाल दोहराया के " कब आए?' आजकल मुज़फ्फर नगर, जओली के  मौलाना मोहम्मद आमिर काज़मी जामे मस्जिद में इमामत कर रहे हैं.
यह अनवारुल ओलूम, इलाहबाद से   फारिगुत तहसील हैं, जल्द ही रिश्ते इज्दवाज में बंधने वाले हैं. खिता बत  भी  अच्छी  करते  हैं. जोश है, जज़्बह है, बच्चों और नौजवानों में घिरे रहते हैं . साहेबे Laptop हैं इसी बात से उनकी शख्सियत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है .
माहे रमजान में बच्चों और नौजवानों से राबता रहा वोह इस लिए की उनकी खुसूसी क्लास में 63 बच्चे शिरकत करते थे.
भाई जैनुल अब्बास 30  बच्चियों की अलग क्लास चला रहे थे. इस क्लास में अहकाम के वाजिबात समझाया जा रहा था.
क्लास के सभी शोराका को इनाम से नवाज़ा गया. मोमिनीने करारी को इस नौजवान आलिमे दीन से बहुत तव्क़्क़ोआत हैं. अल्लाह उन्हें पूरा करे. 

करारी में वुरूद

आज कल करारी का मौसम बारिश के वक़्त और बारिश के बाद बहुत ही खुशगवार, लेकिन चन्द घंटों के बाद बग़ैर पंखा चलाए सुकून नहीं मिलेगा. 
कल, इतवार को करेली से करारी तक का सफ़र उछलते हुए कटा. सड़क पर बारिश ने गढ़े बना दिए. मारुती वैन वैसे भी अच्छी सड़क पर उछलती कूदती हुई दौड़ती है, इस मौसम में तो उसका हक बनता है की मुसाफिरों को सुकून से बैठने न दे.
कार में सामान ज्यादा होने की वजह से उछलने में थोड़ी कमी ज़रूर थी क्यूंकि वोह packing का काम दे रहा था.
घने बादल आए बरसे और चले गए. यह सिलसिला दिन में कई बार चलता रहा.
झींगुर, मेंडक और दीगर हशारात की आवाजें एक सुहाना background का समाँ बांधे हुए है.
बिजली की हालत बहुत अच्छी है. शाम 7 से सुबह 7 बजे  तक आना तो लाज़मी है. अगर और मेहरबान हुई तो दोपहर 11 से 3 बजे भी गर्मी की उमस से राहत देने आ जाएगी.
अब मौसम का मजीद लुत्फ़ उठाना है   तो अपने वतन आ जाइए.